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इटैलियन नौसैनिकः यूएन अदालत के फैसले पर ये हैं भारत के 7 तर्क

Tue, 03 May 2016 01:56 PM IST
बीबीसी न्यूज
बीबीसी न्यूज Updated Tue, 03 May 2016 01:56 PM IST
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 Italian naval issue: 7 logic of india on UN decision

भारत में 2012 में हुए दो मछुआरों की हत्या के अभियुक्त इतालवी नौसैनिकों से जुड़े संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ट्राइब्यूनल के फ़ैसले पर विवाद छिड़ गया है। नौसैनिकों पर भारत में सुनवाई को ट्राइब्यूनल में इटली ने चुनौती दी थी। 

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इटली का कहना है कि ट्राइब्यूनल ने भारत में पकड़े गए एक इतालवी नौसैनिक सल्वाटोर जिरोन को मुक़दमे की कार्रवाई पूरी होने तक स्वदेश भेजे जाने का आदेश दिया है। जबकि भारत का कहना है कि इटली फ़ैसले को ग़लत ढंग से पेश कर रहा है।
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जानिए ट्राइब्यूनल के फ़ैसले पर भारत सरकार ने क्या कहा-

1. ट्राइब्यूनल ने अपने फैसले में कहा है कि सल्वाटोर जिरोन की ज़मानत की शर्तों में किसी तरह का बदलाव लाने के लिए भारत और इटली दोनों को भारत के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का इंतज़ार करना होगा।
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2. जिरोन सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में रहते हुए मुक़दमें की कार्रवाई पूरी होने तक के लिए इटली लौट सकते हैं, ट्राइब्यूनल ने इस बात की पुष्टि की है कि अगर इस मामले में ट्राइब्यूनल पाता है कि भारत को जिरोन के बारे में फ़ैसला करने का अधिकार है तो इटली का दायित्व होगा कि वह उसे भारत को वापस करे।

3. ट्राइब्यूनल ने यह फ़ैसला भारत के सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ा है कि जिरोन की ज़मानत की ठीक ठीक क्या शर्तें होंगी, इसमें कई बातें हो सकती हैं। पहली यह कि जिरोन सुप्रीम कोर्ट की ओर से इटली में मुक़र्रर किए गए किसी अधिकारी को रिपोर्ट करे। दूसरे वह अपना पासपोर्ट इटली अधिकारियों को सौंप दे, और तीसरे वह हमारे सुप्रीम कोर्ट की इजाज़त के बिना इटली से बाहर ना जाए। यही नहीं, इटली हर तीन महीने पर अपनी स्थिति से सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराए।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में रहेंगे दोनों नौसैनिक

 Italian naval issue: 7 logic of india on UN decision

4. जिरोन के भारत वापसी के संबंध में इटली की ओर से ली गई ज़िम्मेदारी का रिकॉर्ड भी ट्राइब्यूनल के सामने है, और इसी के अनुसार इटली अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत अपनी ज़िम्मेदारी पूरी करने के लिए बाध्य है।

5. ट्राइब्यूनल का मानना है अगर जिरोन मौजूदा अवधि तक के लिए इटली वापस जाते हैं तो उस पूरी अवधि में वे सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में रहेंगे।

6. सरकार ट्राइब्यूनल के फ़ैसले की प्रति का अध्ययन कर रही है जो उसे आज ही मिली है, सरकार इस दिशा में क्या क़दम उठाए इसका फ़ैसला करने के लिए वह उचित समय पर सुप्रीम कोर्ट की सलाह लेगी।

7. भारत को भरोसा है कि इस मामले में सरकार की स्थिति और प्रमुख तर्कों को ट्राइब्यूनल के सामने रखा गया है, सुप्रीम कोर्ट के अधिकार को बरक़रार रखा गया है। भारत को उम्‍मीद है कि अधिकार क्षेत्र के मुद्दे पर फ़ैसला उसके पक्ष में होगा।

बता दें कि दो इतालवी नौसैनिकों मैसिमिलानो लाटोरे और सल्वाटोर जिरोन पर फ़रवरी 2012 में केरल के नज़दीक समुद्र में दो भारतीय मछुआरों वैलेंटीन और अजेश बिंकी की हत्या का आरोप है।

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