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ट्रंप के बयान से आईटी इंडस्ट्री सचेत, नैसकॉम कर सकता है ट्रंप से मुलाकात

Tue, 13 Dec 2016 03:53 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 13 Dec 2016 03:53 AM IST
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IT industry concerned by the statement of Trump
डोनल्ड ट्रंप - फोटो : Forbes

आईटी औद्योगिक संगठन नैसकॉम ने कहा है कि अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नौकरियों के मामले में आंख बंद करके सुरक्षा की बात करने से अमेरिका में नई नौकरियों नहीं निकलेंगी। नैसकॉम ने कहा है कि जल्द ही अमेरिका के नए प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश की जाएगी ताकि उन्हें बताया जा सके कि कैसे भारतीय कंपनियां अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 

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पिछले सप्ताह ट्रंप ने कहा था कि एच-1बी वीजा के नियमों में सख्ती की जाएगी और पुराने वीजा में नियमों के उल्लंघन की जांच की जाएगी। एच1-बी वीजा को बंद करने या इसके नियम को कठोर बनाने से अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स को नौकरी करने में दिक्कत आएगी, वहीं अमेरिका में पहले से काम कर रहे भारतीयों को भी जांच का सामना करना पड़ सकता है।
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नैसकॉम के मुताबिक, ट्रंप कारोबार के समर्थक हैं और कारोबारी होने के नाते वह इस बात को समझेंगे कि अमेरिका में नई नौकरियों के सृजन के लिए सिर्फ एक ही रास्ता है कि अमेरिका की कारपोरेट कंपनियां आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धी हो जाएं। नैसकॉम ने यह उम्मीद जताई है कि ट्रंप इस बात को समझेंगे कि आंख बंद करके सुरक्षावाद को बढ़ावा देने से अमेरिका में नई नौकरियां नहीं निकलेंगी बल्कि इससे नौकरियां खत्म होंगी। 

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अमेरिका में भारतीय आईटी कंपनियों का कारोबार 10 लाख 28 हजार करोड़ रुपये

IT industry concerned by the statement of Trump

नैसकॉम के मुताबिक, भारतीय आईटी कंपनियों को इस बात की उम्मीद है कि अमेरिका में जो भी फैसले किए जाएंगे, वह पूरी तरह से हकीकत पर आधारित होंगे। नैसकॉम जल्द ही अमेरिका की नई सरकार के समक्ष अपने विचारों को रखेगा।

आगामी 20 जनवरी को ट्रंप राष्ट्रपति का पदभार संभाल रहे हैं। ट्रंप के रुख को देखते हुए अमेरिका में काम करने वाली भारतीय आईटी कंपनियों ने अपनी-अपनी कंपनियों में अमेरिकी नागरिकों को नौकरी देना शुरू कर दिया है। 

अमेरिका में भारतीय आईटी कंपनियों का कारोबार लगभग 10 लाख 28 हजार करोड़ रुपये का है। टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो जैसी कंपनियां अमेरिका में एच1-बी वीजा के जरिए बड़े पैमाने पर भारत से कर्मचारियों को ले जाती रही हैं।

अमेरिकियों के मुकाबले अपेक्षाकृत कम वेतन के चलते कंपनियां भारतीय इंजीनियरों को तवज्जो देती हैं। वर्ष 2005 से 2014 के दौरान इन तीन कंपनियों में एच1-बी वीजा पर काम करने वाले कर्मचारियों का आंकड़ा 86,000 से अधिक था।

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