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29 दिन बाद चांद की कक्षा में पहुंचा चंद्रयान-2, 11 बजे के सिवन करेंगे प्रेस कांफ्रेंस
Tue, 20 Aug 2019 05:17 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Tue, 20 Aug 2019 05:17 AM IST
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चंद्रयान- 2
- फोटो : ANI
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देश के दूसरे महत्वाकांक्षी चंद्रमिशन चंद्रयान-2 ने अपनी असली अग्निपरीक्षा को पार कर लिया है। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण के 29 दिन बाद चंद्रयान-2 चांद की कक्षा में प्रवेश कर चुका है। चंद्रयान-2 को चांद की कक्षा में प्रवेश कराना वैज्ञानिकों के लिए बेहद कड़ी चुनौती थी। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के अध्यक्ष के सिवनइसे लेकर आज सुबह 11 बजे प्रेस कांफ्रेंस करेंगे।
इससे पहले सोमवार को सिवन ने बताया था कि चांद की कक्षा में आने के बाद से चंद्रयान-2 चांद की चार कक्षाओं से होकर गुजरेगा, जिसके बाद यह चांद की अंतिम कक्षा में दक्षिणी ध्रुव पर करीब 100 किमी ऊपर से गुजरेगा। इसी दौरान यानी दो सितंबर को यान का विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा। विक्रम चार दिन तक 30 गुणा 100 किमी के दायरे में चांद का चक्कर लगाएगा। इसके बाद यह चांद के दक्षिणी ध्रुव में सतह पर सात सितंबर को अपना कदम रखेगा।
22 जुलाई को लॉन्च हुए इस मिशन ने इससे पहले 23 दिन पृथ्वी के चक्कर लगाए थे। फिर चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने में इसे 6 दिन लगे। चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद यान 13 दिन तक चक्कर लगाएगा।
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4 दिन बाद यानी संभवत: 7 सितंबर को वह चांद की सतह पर पहले से निर्धारित जगह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक, चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग इसरो के लिए इस मिशन की सबसे बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि वहां हवा नहीं चलती और गुरुत्वाकर्षण बल भी हर जगह अलग-अलग होता है।
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इससे पहले सोमवार को सिवन ने बताया था कि चांद की कक्षा में आने के बाद से चंद्रयान-2 चांद की चार कक्षाओं से होकर गुजरेगा, जिसके बाद यह चांद की अंतिम कक्षा में दक्षिणी ध्रुव पर करीब 100 किमी ऊपर से गुजरेगा। इसी दौरान यानी दो सितंबर को यान का विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा। विक्रम चार दिन तक 30 गुणा 100 किमी के दायरे में चांद का चक्कर लगाएगा। इसके बाद यह चांद के दक्षिणी ध्रुव में सतह पर सात सितंबर को अपना कदम रखेगा।
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22 जुलाई को लॉन्च हुए इस मिशन ने इससे पहले 23 दिन पृथ्वी के चक्कर लगाए थे। फिर चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने में इसे 6 दिन लगे। चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद यान 13 दिन तक चक्कर लगाएगा।
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4 दिन बाद यानी संभवत: 7 सितंबर को वह चांद की सतह पर पहले से निर्धारित जगह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक, चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग इसरो के लिए इस मिशन की सबसे बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि वहां हवा नहीं चलती और गुरुत्वाकर्षण बल भी हर जगह अलग-अलग होता है।
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