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इसरो ने लॉन्च किया अत्याधुनिक मौसम उपग्रह, जानें क्या है इसकी खासियत?

Fri, 09 Sep 2016 02:21 AM IST
एजेंसी/ श्रीहरिकोटा
एजेंसी/ श्रीहरिकोटा Updated Fri, 09 Sep 2016 02:21 AM IST
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ISRO Successfully launched INSAT-3DR
- फोटो : PTI

स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज से लैस हेवी-ड्यूटी रॉकेट की पहली परिचालन उड़ान से सफलता की इबारत लिखते हुए भारत ने बृहस्पतिवार को अत्याधुनिक मौसम उपग्रह इनसैट-3डीआर लांच किया। इसे जीएसएलवी-एफ05 के जरिए लांच किया गया।

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सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लांच पैड से शाम के 4.50 बजे 49.13 मीटर लंबे रॉकेट ने उड़ान भरी। इसने आकाश को चीरते हुए लगभग 17 मिनट बाद 2,211 किग्रा वजनी इनसैट-3डीआर को जिसोसिन्क्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया।
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अधिकारियों ने बताया कि पहले तय हुआ था कि इस उपग्रह का प्रक्षेपण 4.10 बजे किया जाएगा लेकिन क्रायोस्टेज फिलिंग के काम में विलंब के कारण प्रक्षेपण का समय 4.50 बजे किया गया।इनसैट-3डीआर के अभियान की आयु 10 साल है।

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जीएसएलवी-एफ05 की खास बातें

ISRO Successfully launched INSAT-3DR

​यह पिछले मौसम अभियान की सेवाओं को जारी रखेगा और विभिन्न मौसमी, खोज और राहत सेवाओं की क्षमता बढ़ाएगा। जीएसएलवी की यह दसवीं उड़ान थी और यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज से लैस रॉकेट की पहली परिचालन उड़ान थी।

एक और सफलता हासिल करने के लिए इसरो के अध्यक्ष एएस किरण कुमार ने अपने वैज्ञानिकों की टीम की पीठ थपथपाई। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र एसएचएआर के निदेशक पी कुन्हीकृष्णन ने कहा कि बृहस्पतिवार को सटीक लांचिंग हुई। उपग्रह को बहुत ही सटीक जियोसिन्क्रोनस कक्षा में स्थापित किया गया।

ये पहला मौका है जब इसरो ने क्रायोजेनिक अपर स्टेज इंजन के जरिए ज्यादा वजनी सैटेलाइट स्पेस में भेजा है। जीएसएलवी की यह चौथी उड़ान थी।
- क्रायोजेनिक इंजन से लैस रॉकेट से तीन बार उपग्रह भेजे जा चुके हैं।
- इस उड़ान के साथ इंजन के उन्नत रूप से अधिक वजन को भेजने की क्षमता को परखा जाना है।
- क्रायोजेनिक इंजन के उन्नत रूप को जीएसएलवी में तीसरे स्टेज में लगाया जाएगा। इस इंजन में ईंधन के रूप में तरल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का इस्तेमाल होता है।

क्रायोजेनिक इंजन विकसित करने वाला छठा देश है भारत

ISRO Successfully launched INSAT-3DR

भारत छठा ऐसा देश है जिसने क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन विकसित किया है। इसी इंजन से अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा चांद तक पहुंची थी।

क्या है इनसैट-3 डीआर?
- अत्याधुनिक मौसम उपग्रह
- वजन : 2211 किलोग्राम
- मिशन अवधि : 10 साल

खासियत : थर्मल इंफ्रारेड बैंड से समुद्र के तापमान को सटीक मापा जा सकेगा, इसमें छह चैनल इमेजर, 19 चैनल साउंडर उपकरण लगे हैं, रात में भी बादलों और धुंधले आकाश पर साफ नजर रखी जा सकती है,  1,700 वाट सौर पैनल से खुद बनाएगा ऊर्जा, डाटा रिले ट्रांसपोंडर और सर्च और रेस्क्यू ट्रांसपोंडर के जरिए बचाव अभियानों में करेगा मदद, सूचना का आदान-प्रदान तेज होगा।
- तीन मौसम उपग्रह पहले भेजे जा चुके हैं : 2002 में कल्पना-1, 2003 में इनसेट-3ए और 2013 में इनसैट-3डी नामक स्वदेशी उपग्रह इसरो लांच कर चुका है।

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