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ISRO निजी कंपनियों को देगा PSLV तकनीक: भारत के स्पेस बाजार में बड़ा मौका, 30 महीने तक लॉन्च करेंगी सैटेलाइट
Fri, 22 May 2026 09:34 PM IST
शिवम गर्ग
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: शिवम गर्ग
Updated Fri, 22 May 2026 09:34 PM IST
सार
पीएसएलवी तकनीक निजी कंपनियों को सौंपने का फैसला भारत के स्पेस सेक्टर के लिए ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। अब सिर्फ इसरो ही नहीं, बल्कि भारतीय प्राइवेट कंपनियां भी अंतरिक्ष की दौड़ में दुनिया से मुकाबला करती नजर आएंगी। इससे भारत की स्पेस ताकत और आर्थिक क्षमता दोनों को नई उड़ान मिलेगी।
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, ISRO
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए IN-SPACe ने भारतीय निजी कंपनियों को PSLV (पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) की पूरी तकनीक ट्रांसफर करने की घोषणा की है। इस कदम को भारत के स्पेस सेक्टर के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है, क्योंकि इससे निजी कंपनियां वैश्विक सैटेलाइट लॉन्च बाजार में सीधे प्रतिस्पर्धा कर सकेंगी।
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ISRO देगा 30 महीने तक तकनीकी सहयोग
भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) ने कहा कि चयनित कंपनियों को इसरो की ओर से 30 महीने तक तकनीकी और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट दिया जाएगा। यह सहायता तब तक जारी रहेगी, जब तक संबंधित कंपनी दो PSLV वाहनों का निर्माण और सफल लॉन्च नहीं कर लेती या तय समय सीमा पूरी नहीं हो जाती।
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किन कंपनियों को मिलेगा मौका?
IN-SPACe के अनुसार, यह अवसर उन भारतीय कंपनियों के लिए है, जिन्हें मल्टी-डिसिप्लिनरी टर्न-की प्रोजेक्ट्स का अनुभव हो और जो स्पेस या एयरोस्पेस सेक्टर में काम कर चुकी हों।
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शर्तों के मुताबिक:-
• कंपनी या कंसोर्टियम सदस्य के पास कम से कम 5 साल का स्पेस/एयरोस्पेस अनुभव होना चाहिए।
• पिछले 5 वर्षों में किसी भी 3 साल का वार्षिक टर्नओवर 400 करोड़ रुपये से अधिक होना चाहिए।
• या फिर कंपनी की वैल्यूएशन कम से कम 1000 करोड़ रुपये होनी चाहिए।
क्या है PSLV की खासियत?
पीएसएलवी भारत का भरोसेमंद सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल माना जाता है। यह कई सफल मिशनों के जरिए दुनिया भर में अपनी विश्वसनीयता साबित कर चुका है। इसरो ने इसी रॉकेट की मदद से कई विदेशी और भारतीय उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित किए हैं। इसकी सफलता दर काफी ऊंची मानी जाती है।
भारत को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएसएलवी तकनीक को निजी कंपनियों को सौंपने से भारत की स्पेस इकॉनमी को नई रफ्तार मिलेगी। इससे निजी निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर काम करने का मौका मिलेगा। साथ ही भारत अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट लॉन्च मार्केट में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा। सरकार और इसरो लंबे समय से भारत को ग्लोबल स्पेस लॉन्च हब बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं और पीएसएलवी तकनीक ट्रांसफर को उसी रणनीति का बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में भारतीय निजी कंपनियां भी विदेशी ग्राहकों के लिए सैटेलाइट लॉन्च सेवाएं देती नजर आ सकती हैं।