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बड़ा कदम: आजादीसैट लॉन्च करने की तैयारी में इसरो, इस साल 75 छात्र उपग्रह भी छोड़े जाएंगे

Wed, 18 May 2022 09:10 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 18 May 2022 09:10 PM IST
सार

निजी फर्मों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोले जाने के बाद से केवल दो वर्षों में 55 से अधिक स्टार्ट-अप ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ पंजीकरण कराया है।

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ISRO lines up Azadisat, 75 student satellites for launch this year
isro(logo) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

इसरो ने भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर इस साल आजादीसैट और 75 छात्र उपग्रहों को लॉन्च करने की योजना बनाई है। इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में विज्ञान विभागों और मंत्रालयों की संयुक्त बैठक के दौरान यह बात कही। मंत्री ने कहा कि निजी फर्मों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोले जाने के बाद से केवल दो वर्षों में 55 से अधिक स्टार्ट-अप ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ पंजीकरण कराया है। सिंह ने कहा कि 55 प्रस्तावों में से 29 उपग्रह से संबंधित हैं, 10 अंतरिक्ष अनुप्रयोगों और उत्पादों के लिए, आठ प्रक्षेपण वाहनों से संबंधित हैं और आठ जमीनी प्रणालियों और अनुसंधान से संबंधित हैं।

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उन्होंने कहा कि स्टार्ट-अप के नौ प्रस्तावों के 2022-23 तक पूरा होने की उम्मीद है। सिंह के अनुसार, सभी छह एस एंड टी विभागों द्वारा वैज्ञानिक अनुप्रयोगों और तकनीकी समाधानों के लिए प्राप्त 38 लाइन मंत्रालयों से 204 विषम समस्याओं के एस एंड टी समाधानों का सीएसआईआर द्वारा प्राथमिकता के आधार पर कार्यान्वयन हुआ है। उन्होंने कहा कि सभी विभागों से भागीदारी के क्षेत्रों पर इनपुट मिले हैं, जबकि जैव प्रौद्योगिकी विभाग और इसरो ने कुछ चुनौतियों के लिए समाधान विकास/तैनाती में अग्रणी होने के लिए अपनी प्राथमिकता प्रस्तुत की है।
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सिंह ने कहा कि कृषि, खाद्य, शिक्षा, कौशल, रेलवे, सड़क, जल शक्ति, बिजली और कोयला जैसे क्षेत्रों के लिए पिछले साल सितंबर में पहल शुरू होने के बाद से विभिन्न वैज्ञानिक अनुप्रयोगों पर काम किया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि सीएसआईआर ने उत्तर पूर्वी परिषद (एनईसी) की मदद से पूर्वोत्तर राज्यों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी हस्तक्षेप की आवश्यकता वाली 50 समस्याओं की पहचान की है और इसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के साथ साझा किया गया है। 

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