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J&K: आतंकी अहमद मीर के जनाजे में लगे ISIS के नारे, सेना ने दो दिन पहले किया था ढेर
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
Updated Mon, 20 Nov 2017 02:06 PM IST
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मुगीस अहमद मीर की शव यात्रा
- फोटो : File Photo
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जम्मू-कश्मीर के जकूरा में शुक्रवार को हुए सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ में मारे गए आतंकी मुगीस अहमद मीर की अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में लोग उमड़े। इस दौरान यहां मौजूद लोगों ने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के समर्थन में नारे लगाए। शनिवार को श्रीनगर-गुलमर्ग रोड पर स्थित पंपोर में तहरीक-उल-मुजाहिदीन के आतंकी मुगीस को दफनाया गया।
मुगीस के जनाजे में आए लोगों ने न सिर्फ इस्लामिक स्टेट के समर्थन में नारेबाजी की बल्कि खबर यह भी है कि इन्होने आतंकी जाकिर मूसा के समर्थन में भी नारे लगाए। यही नहीं लोगों ने अलगाववादियों और भारतीय सुरक्षा बलों के खिलाफ नारेबाजी की।
मुगीस के समर्थकों ने उसके शव को इस्लामिक स्टेट के झंडे में लपेटा हुआ था। घाटी में हुई नारेबाजी के बाद इसे आईएसआईएस की दस्तक के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि रविवार को कश्मीर के आईजी मुनीर खान ने आईएस की मौजूदी से साफ इनकार किया है।
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ये भी पढ़ेंः J&K: आतंकियों को माशूकाओं की वफाई पर हो रहा शक, मिलने से कर रहे हैं तौबा
वहीं पुलिस ने कहा कि 2016 में घाटी में हिजबुल मुजाहिदीन के चीफ बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कमांडर बने जाकिर मूसा को ज्यादा समर्थन नहीं मिल रहा है। आईजी मुनीर ने कहा, 'हम जांच कर रहे हैं कि आखिर जम्मू-कश्मीर में जारी आतंकवाद पर इस्लामिक स्टेट का प्रभाव कितना है।'
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मुगीस के जनाजे में आए लोगों ने न सिर्फ इस्लामिक स्टेट के समर्थन में नारेबाजी की बल्कि खबर यह भी है कि इन्होने आतंकी जाकिर मूसा के समर्थन में भी नारे लगाए। यही नहीं लोगों ने अलगाववादियों और भारतीय सुरक्षा बलों के खिलाफ नारेबाजी की।
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मुगीस के समर्थकों ने उसके शव को इस्लामिक स्टेट के झंडे में लपेटा हुआ था। घाटी में हुई नारेबाजी के बाद इसे आईएसआईएस की दस्तक के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि रविवार को कश्मीर के आईजी मुनीर खान ने आईएस की मौजूदी से साफ इनकार किया है।
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वहीं पुलिस ने कहा कि 2016 में घाटी में हिजबुल मुजाहिदीन के चीफ बुरहान वानी के मारे जाने के बाद कमांडर बने जाकिर मूसा को ज्यादा समर्थन नहीं मिल रहा है। आईजी मुनीर ने कहा, 'हम जांच कर रहे हैं कि आखिर जम्मू-कश्मीर में जारी आतंकवाद पर इस्लामिक स्टेट का प्रभाव कितना है।'