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Cabinet Reshuffle: क्या फंस गया मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार, अब होगा भी या नहीं? जानें सभी समीकरण

Sun, 23 Jul 2023 08:19 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Sun, 23 Jul 2023 08:19 PM IST
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सार
सियासी जानकारों का कहना है कि इस साल होने वाले चार राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले एक बार अटकलें लगाई जा रही थी कि जल्द ही मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। कयास तो यह लगाए जा रहे थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्रांस जाने के पहले ही मोदी कैबिनेट में कुछ फेरबदल किए जा सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 
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Is the expansion of the Modi cabinet stuck will it happen now or not Know all equations Update
कैबिनेट। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

क्या मोदी मंत्रिमंडल का होने वाला विस्तार अब सियासी दांव-पेंच में उलझ गया है या मानसून सत्र के बाद एक बार फिर से मोदी के मंत्रिमंडल के विस्तार की संभावना है। सियासी गलियारों में अभी भी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं हो रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार की संभावनाएं फिलहाल जल्दी नजर नहीं आ रही हैं। इसके पीछे उनका तर्क है कि जिन राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं, वहां के नेताओं की पहले ही मोदी मंत्रिमंडल में मजबूत हिस्सेदारी है। एनडीए के घटक दलों की बैठक के बाद जो सियासी समीकरण बने हैं, उसमें भी फिलहाल किसी भी राज्य के नेता को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावनाएं नहीं बन रही है। हालांकि, कुछ सियासी जानकारों का मानना है कि मानसून सत्र के बाद मोदी कैबिनेट में 2024 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर छोटा सा फेरबदल हो सकता है।



इसलिए लगाए जा रहे हैं यह कयास
सियासी जानकारों का कहना है कि इस साल होने वाले चार राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले एक बार अटकलें लगाई जा रही थी कि जल्द ही मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। कयास तो यह लगाए जा रहे थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्रांस जाने के पहले ही मोदी कैबिनेट में कुछ फेरबदल किए जा सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 


राजनीतिक विश्लेषक हरिकिशन शर्मा बताते हैं कि इस साल होने वाले मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के नेताओं की मोदी कैबिनेट में हिस्सेदारी है। वह कहते हैं कि मध्य प्रदेश से पांच सांसद मोदी की कैबिनेट में हैं। नरेंद्र सिंह तोमर, वीरेंद्र सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, पहलाद पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते शामिल हैं। इसलिए मध्यप्रदेश में आने वाले विधानसभा के चुनावों को देखते हुए फिलहाल तो ऐसी संभावना नहीं बन रही है कि वहां से किसी नेता को मंत्रिमंडल में शामिल कर विधानसभा के चुनावों में सियासी निशाना लगाया जाए। 

राजस्थान में भी सियासी समीकरण मंत्रिमंडल में ठीक-ठाक
सियासी जानकारों का मानना है कि मध्य प्रदेश में जिस तरीके से मोदी कैबिनेट में पांच मंत्री हैं, उसी तरह राजस्थान में भी सियासी समीकरण मोदी मंत्रिमंडल से ठीक-ठाक साधा जा रहा है। राजस्थान से मोदी सरकार में चार मंत्री कैबिनेट में हैं। इसमें भूपेंद्र यादव, गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल और कैलाश चौधरी राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 

राजनीतिक विश्लेषण जटाशंकर सिंह कहते हैं कि राजस्थान की सियासत को समझते हुए हैं अर्जुन राम मेघवाल को राज्यमंत्री से कैबिनेट मंत्री का दर्जा अभी हाल में ही मोदी सरकार में दिया गया है। वो कहते हैं कि मेघवाल को कैबिनेट मंत्री बनाकर मोदी सरकार ने राजस्थान में दलित समुदाय को बड़ा संदेश भी दिया। 

सियासी जानकारों का कहना है कि मोदी कैबिनेट में राजस्थान के सियासी समीकरणों को साधने वाले नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह भी मिली है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक जटाशंकर सिंह कहते हैं कि राजस्थान के कुछ नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह देकर अभी भारतीय जनता पार्टी कुछ और सियासी समीकरण जरूर साध सकती है।

तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की भी हिस्सेदारी
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कैबिनेट मंत्री जी किशन रेड्डी को तेलंगाना का भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा सियासी दांव तो चल ही दिया है। राजनीतक विश्लेषक हरिओम तंवर कहते हैं कि फिलहाल जिस तरीके से भारतीय जनता पार्टी तेलंगाना में अपनी मजबूत पैठ बनाना चाह रही है, उस लिहाज से उसको तेलंगाना के कुछ नेताओं को जरूर अपने मंत्रिमंडल में जगह दिए जाने की संभावनाएं बनती है। 

इसी तरह छत्तीसगढ़ में भी रेणुका सिंह को मोदी कैबिनेट में जगह मिली हुई है। राजनीतिक विश्लेषक तंवर का मानना है कि यह दो राज्य ऐसे हैं जहां पर भारतीय जनता पार्टी सियासी तौर पर कुछ लोगों को फिलहाल मंत्रिमंडल में जगह दे सकती है, लेकिन जिन राज्यों में चुनाव होना है वहां के नेताओं की मोदी मंत्रिमंडल में पहले से हिस्सेदारी बनी हुई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाओं के न किए जाने की बड़ी वजह यही सियासी गणित नजर आ रही है। 

सियासी जानकारों का मानना है कि जिस तरीके से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्रांस जाने से पहले मंत्रिमंडल विस्तार की अटकले लगाई जा रही थी। वहीं अब एनडीए के घटक दलों की बैठक के बाद विस्तार की संभावनाएं कम होती नजर आ रही है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषकों ओपी तंवर कहते हैं कि एनडीए के घटक दलों की बैठक के बाद जो समीकरण बनते नजर आ रहे हैं, उसमें बिहार और उत्तर प्रदेश से जरूर कैबिनेट में सियासी फेरबदल की संभावनाएं बनती दिखी है, लेकिन यह संभावनाएं लोकसभा के चुनावों के नजरिए से बन रही है। 

तंवर का मानना है कि अगर मंत्रिमंडल का विस्तार होगा भी तो विधानसभा के चुनावों की बजाय लोकसभा के चुनावों के नजरिए से ही होगा। इसीलिए अब दक्षिण भारत के राज्यों कि नेताओं को लेकर मंत्रिमंडल में जगह मिलने की चर्चाएं भी हो रही हैं।

विधानसभा नहीं लोकसभा के लिहाज से होगी पूरी रणनीति
अब जो भी रणनीति बनाई जा रही है वह 2024 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर ही बन रही है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक ओपी तंवर का मानना है कि मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार अगर तय रणनीति के मुताबिक हुआ तो सितंबर से अक्तूबर महीने में हो सकता है। इस दौरान जातिगत और क्षेत्रवार समीकरणों को साधते हुए ही सियासी फील्डिंग सजाई जा सकती है। उनका मानना है कि अभी जिन राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं उस लिहाज से मोदी मंत्रिमंडल में वहां के नेताओं की मजबूत भागीदारी है। इसलिए अब जो भी समीकरण तैयार हो रहे हैं वह सब लोकसभा के लिहाज से ही हो रहे हैं। 

2 साल पहले 2 साल के चुनावी लिहाज से हुआ था मंत्रिमंडल विस्तार
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 2021 जुलाई में जब मोदी मंत्रिमंडल में विस्तार हुआ था, तो उसके बाद 2 साल के भीतर दस  राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने थे। यही वजह थी कि उस मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, मणिपुर, हिमाचल, गुजरात, नागालैंड, मेघालय, त्रिपुरा और कर्नाटक के नेताओं को इन राज्यों में सियासी संदेश देने के लिए मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। 

सियासी जानकारों का कहना है कि अब जिन राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं, वहां के नेता पहले से ही मंत्रिमंडल में शामिल हैं। इसलिए अगले कुछ दिनों में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार पर फिलहाल विराम लगता हुआ नजर आ रहा है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक जटाशंकर सिंह कहते हैं कि सियासी नजरिए से आकलन करके यह मंत्रिमंडल विस्तार के विराम की बात कही जा सकती है, लेकिन इसका दावा नहीं किया जा सकता है कि मंत्रिमंडल विस्तार नहीं हो सकता। भाजपा से जुड़े हुए कुछ नेताओं का दावा है कि मानसून सत्र के बाद मंत्रिमंडल का बहुत बड़े स्तर पर तो नहीं लेकिन विस्तार तो होगा।

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