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आइरिस लावन को भारत में पनाह दिए जाने पर क्या बोली सरकार?: संसद में जयशंकर ने बताया- ईरानी समकक्ष मदद के आभारी
Mon, 09 Mar 2026 03:34 PM IST
Pavan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Mon, 09 Mar 2026 03:34 PM IST
सार
पश्चिम एशिया में व्याप्त संकट पर बोलते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संसद को बताया कि भारत ने मानवीय आधार पर ईरान जहाज को डॉकिंग की अनुमति दी थी। इस दौरान उन्होंने जानकारी दी कि भारत सरकार ने संघर्षरत क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी कई कदम उठाए हैं।
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लोकसभा में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत ने एक मानवीय कदम उठाते हुए ईरान के जहाज आईरिस लावन को केरल के कोच्चि बंदरगाह पर रुकने की अनुमति दी। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि इस फैसले के लिए ईरान के विदेश मंत्री ने भारत का आभार भी जताया है। उन्होंने कहा कि इस समय ईरान के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क करना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन भारत ने स्थिति को देखते हुए मानवीय आधार पर यह फैसला लिया।
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'ईरान ने तीन जहाजों के डॉकिंग की मांगी थी अनुमति'
विदेश मंत्री ने संसद को बताया कि 28 फरवरी को ईरान ने अपने तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर रुकने की अनुमति मांगी थी। भारत ने 1 मार्च को इसकी मंजूरी दे दी। इसके बाद आइरिस लावन 4 मार्च को कोच्चि पहुंचा। जहाज के चालक दल को फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में रखा गया है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत को लगा कि ऐसा करना सही और मानवीय कदम था।
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अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने मांगी थी मदद
दरअसल, इससे पहले ईरान का एक और युद्धपोत आइरिस डेना डूब गया था। जानकारी के अनुसार यह जहाज श्रीलंका के गाले तट से लगभग 40 समुद्री मील दूर अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में टॉरपीडो से नष्ट हो गया था। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
'भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है संघर्ष का असर'
संसद में बोलते हुए डॉ. जयशंकर ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है, क्योंकि इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाला हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार तेल की उपलब्धता, कीमत और जोखिम, तीनों बातों को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है और भारतीय उपभोक्ताओं के हित को सबसे ऊपर रखा जाएगा।
'पश्चिम एशियाई नेताओं के संपर्क में हैं प्रधानमंत्री मोदी'
विदेश मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार पश्चिम एशिया के कई नेताओं से संपर्क में हैं। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति, कतर के अमीर, सऊदी अरब और कुवैत के क्राउन प्रिंस, बहरीन के किंग, ओमान के सुल्तान, जॉर्डन के किंग और इस्राइल के प्रधानमंत्री से बात की है। अमेरिका के साथ भी भारत का राजनयिक स्तर पर संपर्क बना हुआ है।
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अब तक 67 हजार भारतीय लौटे वतन- विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय ने बताया कि अब तक लगभग 67,000 भारतीय अलग-अलग देशों की सीमाएं पार कर सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान में मौजूद भारतीय दूतावास पूरी तरह काम कर रहा है और कई देशों में भारतीय दूतावासों ने एडवाइजरी जारी की है। तेहरान में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
विपक्ष ने चर्चा की मांग कर की नारेबाजी
हालांकि, इस मुद्दे पर संसद में विपक्ष ने चर्चा की मांग करते हुए नारेबाजी भी की। विपक्षी सांसद तख्तियां लेकर सदन के बीच में आ गए और बहस की मांग करने लगे। उस समय सदन की अध्यक्षता कर रहे सांसद जगदंबिका पाल ने विपक्ष से नारेबाजी न करने और मंत्री की बात सुनने की अपील की।
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'ईरान ने तीन जहाजों के डॉकिंग की मांगी थी अनुमति'
विदेश मंत्री ने संसद को बताया कि 28 फरवरी को ईरान ने अपने तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर रुकने की अनुमति मांगी थी। भारत ने 1 मार्च को इसकी मंजूरी दे दी। इसके बाद आइरिस लावन 4 मार्च को कोच्चि पहुंचा। जहाज के चालक दल को फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में रखा गया है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत को लगा कि ऐसा करना सही और मानवीय कदम था।
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अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने मांगी थी मदद
दरअसल, इससे पहले ईरान का एक और युद्धपोत आइरिस डेना डूब गया था। जानकारी के अनुसार यह जहाज श्रीलंका के गाले तट से लगभग 40 समुद्री मील दूर अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में टॉरपीडो से नष्ट हो गया था। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
'भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है संघर्ष का असर'
संसद में बोलते हुए डॉ. जयशंकर ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है, क्योंकि इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाला हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार तेल की उपलब्धता, कीमत और जोखिम, तीनों बातों को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है और भारतीय उपभोक्ताओं के हित को सबसे ऊपर रखा जाएगा।
'पश्चिम एशियाई नेताओं के संपर्क में हैं प्रधानमंत्री मोदी'
विदेश मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार पश्चिम एशिया के कई नेताओं से संपर्क में हैं। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति, कतर के अमीर, सऊदी अरब और कुवैत के क्राउन प्रिंस, बहरीन के किंग, ओमान के सुल्तान, जॉर्डन के किंग और इस्राइल के प्रधानमंत्री से बात की है। अमेरिका के साथ भी भारत का राजनयिक स्तर पर संपर्क बना हुआ है।
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अब तक 67 हजार भारतीय लौटे वतन- विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय ने बताया कि अब तक लगभग 67,000 भारतीय अलग-अलग देशों की सीमाएं पार कर सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान में मौजूद भारतीय दूतावास पूरी तरह काम कर रहा है और कई देशों में भारतीय दूतावासों ने एडवाइजरी जारी की है। तेहरान में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
विपक्ष ने चर्चा की मांग कर की नारेबाजी
हालांकि, इस मुद्दे पर संसद में विपक्ष ने चर्चा की मांग करते हुए नारेबाजी भी की। विपक्षी सांसद तख्तियां लेकर सदन के बीच में आ गए और बहस की मांग करने लगे। उस समय सदन की अध्यक्षता कर रहे सांसद जगदंबिका पाल ने विपक्ष से नारेबाजी न करने और मंत्री की बात सुनने की अपील की।
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