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Hindi News ›   India News ›   Interview: Set-top box portability will be applicable in 2019

2019 में लागू होगी सेट टॉप बॉक्स पोर्टेबिलिटी, नए टेलीकॉम उद्योग को बढ़ावा

Mon, 11 Feb 2019 04:24 AM IST
गौरव द्विवेदी पीयूष पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
पीयूष पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Mon, 11 Feb 2019 04:24 AM IST
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Interview: Set-top box portability will be applicable in 2019
आरएस शर्मा

दूरसंचार नियामक ट्राई उपभोक्ता हितों को कायम रख नए टेलीकॉम उद्योग को बढ़ावा देने और दुनियाभर में इस क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों को देश में लाने पर काम कर रहा है। ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंगए कॉलिंग ऐपए सेटटॉप बॉक्स की इंट्रापोर्टेबिलिटी जैसी तमाम सेवाओं पर नियामकीय व्यवस्था लागू करने पर आगे बढ़ रहा है। टेलीकॉम क्षेत्र में ग्राहक सेवा सुधारनेए ब्रॉडकास्टिंग के नए नियमों और प्री पेड सिम के न्यूनतम टैरिफ पर ट्राई की भूमिका और उठाए जाने वाले कदमों समेत अन्य मुद्दों पर पीयूष पांडेय ने नियामक चेयरमैन आरएस शर्मा से बातचीत। पेश है उसके मुख्य अंश:

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सवाल- सेट.टॉप बॉक्स इंट्रापोर्टेबिलिटी के लिए ट्राई नियम लाने वाला था। अब तक यह कार्यवाही कहां तक पहुंची है?
जवाब- सेटटॉप बॉक्स इंट्रापोर्टेबिलिटी उसी तर्ज पर हैए जैसे मोबाइल सिम में सेवा प्रदाता को पोर्ट करने की व्यवस्था है। ट्राई की नजर में सेट.टॉप बॉक्स पोर्टेबल होने चाहिएए क्योंकि इसका फायदा सीधे तौर पर ग्राहक को होगा। इस व्यवस्था के लिए हम लोग प्रयास कर रहे हैंए क्योंकि यह एक तकनीकी मामला है। इसमें तकनीक से जुड़े ऐसे कई अहम पहलू हैं जिन पर बारीकी से विचार किया जाना जरूरी है। जैसे किस तरह से पोर्टेबिलिटी लाने के दौरान पायरेसी की समस्या से कैसे निपटा जाए या उस पर नियंत्रण रखते हुए इस व्यवस्था को कैसे लागू किया जाए। इस पर ट्राई काम कर रहा है और हमें उम्मीद है कि इस साल के अंत तक नियामक इस मसले पर कामयाबी पा लेगा। इसके बाद कोई भी ग्राहक जैसे मोबाइल फोन बाजार से लाकर किसी भी कंपनी का सिम डालकर चलाता है। उसी तरह सेट.टॉप बॉक्स लाएंगे और किसी भी डीटीएच कंपनी का कॉर्ड डालकर चैनल देख सकेंगे। ऐसे में सेट.टॉप बॉक्स समेत अन्य कोई बदलाव नहीं करना पड़ेगा जिससे ग्राहक पर खर्च का भार नहीं पड़ेगा। मौजूदा समय नापसंद डीटीएच सेवा को कई बार लोग सिर्फ इसलिए चलाते रहते हैं कि नई कंपनी की सेवाएं लेने पर एक.मुश्त खर्च कर नया सेट.टॉप बॉक्स लेना पड़ेगा। 
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सवाल-कॉलिंग ऐप और ओवर द टॉप ;ओटीटीद्ध सेवाओं को दायरे में लाने के लिए ट्राई ने क्या कदम उठाए हैं
जवाब- अमेजन प्राइमए नेटफ्लिक्स समेत अन्य ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग ओटीटी सेवा प्रदाता और कॉलिंग.मैसेजिंग ऐप गूगल डुओए फेसबुकए व्हाट्सऐप तथा स्काइप को नियामकीय दायरे में लाने के लिए पिछले साल नवंबर में ट्राई ने विचार.विमर्श किया था। इस पर हमने एक परामर्श पत्र जारी किया था। उस पर अंतिम चरण में विचार विमर्श चल रहा है। इससे जुड़े कई तकनीकी पहलू हैं जिन पर चर्चा चल रही है और उम्मीद है कि जल्द उनका हल निकाल लिया जाएगा। इसके बाद हम इस मसले पर निर्णय ले सकेंगे। रहा सवाल ओटीटी के स्वनियमन का तो कोई व्यवस्था नहीं होने की स्थिति में कोई भी सेवा प्रदाता यह कर सकता है। 
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सवाल- नए नियमों से डीटीएच और केबल सेवा महंगी करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। क्त्रिस्सिल की रिपोर्ट में नियामक पर लगाए गए आरोप की हकीकत क्या है?
जवाब- उत्तर प्रदेश की रिपोर्ट गलत तथ्यों पर आधारित है। कोई भी निष्कर्ष तथ्यों के आधार पर निकाला जाता है और अगर तथ्य ही गलत होगा तो निष्कर्ष भी गलत होगा। उन्होंने जो तथ्य लिए हैंए जो शीर्ष दस चैनल हैं। उन चैनल के की स्थिति यह है कि जिन दस चैनल को उन्होंने चुना है। वह विभिन्न भाषाओं के हैंए जैसे सन टीवी तमिल भाषा काए जी अनमोल है हिन्दी का और स्टार मां लिया है तेलगू काए जीटीवी लिया है तेलगू का। इसके अलावा स्टार भारतए स्टार उत्सव तथा  स्टार प्लस एक तरह का कंटेट है। यह भी तीनों ले लिएए हकीकत में उन्होंने क्या किया है कि पहले ही शीर्ष दस चैनल निकाल लिए और कहा कि ग्राहक इनको देखेगा तो उसे क्या नुकसान होगा। अब आप बताइये कि देश में कौन ऐसा व्यक्ति होगा कि तमिल भी देखेगाए हिन्दी भी देखेगाए तेलगू भी देखेगा और अन्य भाषाओं के चैनल भी देखेगा। रिपोर्ट में उन्होंने जिस ग्राहक को प्रतिनिधि के तौर पर बताया हैए जिसके आधार पर सेवाएं महंगे होने का दावा किया गया है। हकीकत में वह ग्राहक हो ही नहीं सकता। इस प्रकार का ग्राहक होगाए तब तो आप इस तरह की बात करेंगे। अन्यथा ऐसे दावे निरर्थक होंगेए क्योंकि जब कोई इस तरह से चैनल चुन ही नहीं रहा तो महंगे होने का सवाल नहीं पैदा होता। ट्राई ने ग्राहकों को नए नियमों के तहत चैनल चुनने का अधिकार प्रदान किया है। इसके फ्रेमवर्क पर नवंबरए 2015 से काम शुरू हुआ और एक फरवरीए 2019 में यह लागू हुआ। तमाम कानूनी लड़ाईयों और हरेक पहलू को परखने के बाद नियामक नए नियमों को लाया है। यह नियम तैयार करने का निर्देश टीडीसैट ने ट्राई को दिया था।


सवाल- कॉलड्रॉप के बारे में नियामक का क्या विचार हैए क्या कोई सुधार आया है?
जवाब- कॉलड्रॉप गुणवत्ता सेवाओं का एक हिस्सा हैए जो उपभोक्ता के लिए बड़ी परेशानी का करण बनता है। ट्राई के नए मानकों से सुधार आ रहा है। मानकों को पूरा नहीं कर पा रही कंपनियों पर जुर्माना भी लगाया गया है। नियामक की इस पर पैनी निगाह हैए क्योंकि यह उपभोक्ता के लिए प्राथमिक है। इसमें कई तकनीकी पहलू भी हैंए लेकिन जिन आधारों पर नए मानक तैयार किए गए हैंए उनकी कसौटी पर दूरसंचार कंपनियों को खरा उतरना रहता है। ट्राई का उद्देश्य उपभोक्ता हित का ख्याल रखना है जिसके लिए वह तत्पर है और निरंतर काम कर रहा है। 

सवाल- प्री पेड सिम पर न्यूनतम टैरिफ दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने हाल ही में लागू किया। इसे अगर बढ़ाया गया तो ट्राई क्या कदम उठाएगा?
जवाब- देखिए ट्राई ने पिछले पंद्रह वर्षों में 2004 से टैरिफ पर नियामक का कोई नियंत्रण नहीं है। इसमें हम कोई हस्तक्षेप नहीं करते हैंए देश में दूरसंचार कंपनियों के बीच भारी प्रतिस्पर्धा है और वह यह तय कर सकती हैं कि क्या टैरिफ तय किया जाना है। ग्राहकों को टैरिफ लागू करने के बारे में सूचित करना और उन्हें पूरी जानकारी देने को लेकर ट्राई ने इस मामले में हस्तेप जरूरी किया था। लेकिन टैरिफ पर नियंत्रण नियामक नहीं करताए यह शुरू से स्पष्ट है।

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