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साक्षात्कार: हारी हुई मानसिकता का गठबंधन भाजपा के लिए चुनौती नहीं- राजनाथ सिंह

Tue, 05 Jun 2018 09:18 AM IST
विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला, नई दिल्ली 
विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला, नई दिल्ली  Updated Tue, 05 Jun 2018 09:18 AM IST
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Interview: Rajnath singh says Coalition is not challenge for BJP
गृहमंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : amar ujala
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह मोदी सरकार के चार साल को विकास, सुरक्षा और लोककल्याण के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ कार्यकाल मानते हैं तो गांव, गरीबों व किसानों के हित में कई कार्यक्रमों से लोगों में विश्वास का माहौल बना है। 
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कुछ उपचुनावों में हार को महत्तवहीन बताते हुए राजनाथ ने कहा कि हारी मानसिकता के लोग 2019 में भाजपा के लिए चुनौती नहीं बन सकते। कश्मीर के मसले पर गृह मंत्री ने कहा कि सभी से बिना शर्त बातचीत के दरवाजे खुले हैं। हालात सामान्य होने पर ही कश्मीर समेत प्रभावित इलाकों से अफ्स्पा हटाया जाएगा। 
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चार साल को कैसे आंकते हैं?

सरकार के चार वर्ष का कार्यकाल हर तरह से उत्कृष्ट है। हर मोर्चे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार सफल रही है। चाहे आर्थिक प्रगति हो, आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा हो, विदेश नीति हो, गांव गरीब किसान का उत्थान हो, हर क्षेत्र में सरकार ने उल्लेखनीय काम किए हैं। आजादी के बाद कई वर्षों तक जब देश की विकास दर दो से तीन प्रतिशत रहती थी तो दुनिया में इसे हिंदू विकास दर कहा जाता था। लेकिन अब हमारी विकास दर अभी 7.4 है जिसके और बढ़ने का अनुमान है। 
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विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था की पटरी से उतार दिया है?

विपक्ष कुछ भी कहे लेकिन भारत जो विश्व की दस सबसे विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों की सूची में था जो मोदी सरकार के चार साल में सात सर्वाधिक विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों की श्रेणी में आ गया है। एक आर्थिक रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2018-19 में भारत पांच बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में शामिल हो जायेगा और आगामी कुछ वर्षों में भारत प्रथम तीन विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों में होगा।यूपीए सरकार के समय महंगाई की दर विकास दर से डेढ़ से दो गुना होती थी जो आज घटकर विकास दर के आधी के आसापास है।

उपचुनावों में भाजपा हार रही है। क्या विपक्षी गठबंधन 2019 में भाजपा के लिए चुनौती बनेगा?

हारी हुई मानसिकता और डर से बना गठबंधन कभी भाजपा के लिए चुनौती नही बन सकता। उपचुनावों के नतीजों को कई स्थानीय मुद्दे प्रभावित करते हैं, उन्हें 2019 के लोकसभा चुनावों का पैमाना नहीं माना जा सकता। कभी कभी बड़ी जीत के लिए कुछ पीछे भी हटना पड़ता है। 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद जितने भी विधानसभा चुनाव हुए कुछ अपवादों को छोड़कर भाजपा सब में जीती है। मुझे पूरा विश्वास है कि 2019 में फिर भाजपा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बहुमत से सरकार बनाएगी। 

गुजरात में भाजपा हारते हारते बची और कर्नाटक में जीत की कगार तक पहुंच कर भी बहुमत नहीं जुटा पाई। क्यों ?

Interview: Rajnath singh says Coalition is not challenge for BJP
गृहमंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : डेंमो
गुजरात में हमने छठी बार सरकार बनाई। यह कोई मामूली बात नहीं है। जबकि कर्नाटक में 2013 में भाजपा सिर्फ 40 सीटें जीती थी, इस बार हम 40 से 104 तक पहुंचे। पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है और हम बहुमत के बेहद करीब हैं। 

गोवा, मणिपुर और मेघालय में राज्यपाल सबसे बड़े दल को सरकार बनाने के लिए नहीं बुलाते हैं, लेकिन कर्नाटक में बुलाकर सरकार बनाने का मौका देते हैं। यह क्या उचित था?

ये फैसला राज्यपाल का था और उन्हें जो उचित लगा उन्होंने किया। इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।

मोदी सरकार व वाजपेयी सरकार में क्या अंतर है और किसे बेहतर मानते हैं?

दोनों सरकारों में विकास की निरतंरता रही है। अटल जी की सरकार ने पूरे विश्व को भारत की आर्थिक क्षमता से परिचित कराया। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत को आथिर्क और सामरिक शक्ति बनाने के जो बीज बोए गए थे, जो काम शुरु हुए थे, उनमें बीच में दस साल का ठहराव आ गया था। लेकिन मोदी सरकार के आने बाद वह विकास यात्रा फिर तेज हुई और अनेक नई नीतियों, योजनाओं और कार्यक्रमों के द्वारा देश को आगे बढ़ाने का काम तेज हुआ। अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है।

मोदी सरकार ने गरीबों और वंचितों के लिए अनेक योजनाएं और नीतिगत कार्यक्रम शुरु किए हैं। जनधन योजना के तहत 31 करोड़ लोगों के बैंक खाते, सबसे बड़ा कर सुधार जीएसटी, डीबीटी के जरिए सब्सिडी का सीधे खातों में पहुंचना, किसान फसल बीमा सुरक्षा योजना, अटल पेंशन योजना, आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं मामूली उपलब्धि नहीं हैं।

आंतरिक सुरक्षा मोर्चे पर सरकार कितनी सफल है?

Interview: Rajnath singh says Coalition is not challenge for BJP
राजनाथ सिंह
पिछले चार वर्षों में मुख्य भूमि में कोई बड़ी आतंकवादी घटना नहीं हुई है। गुरदासपुर और पठानकोट में जरूर आतंकवादी हमले हुए लेकिन सारे आतंकवादी मारे गए। पूर्वोत्तर में आम तौर पर शांति है। नगा समझौते में प्रगति हो रही है। जल्दी ही उस पर अमल होगा। पूर्वोत्तर के कई राज्यों से सशस्त्र बल विशेष संरक्षण कानून (एएफएसपीए) हटा लिया गया है। यह काम कांग्रेस सरकार भी नहीं कर पाई।

एएफएसपीए हटाने की मांग जम्मू कश्मीर से भी कई बार उठी है। खुद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती इसे हटाने के पक्ष में बयान देती रही हैं। कश्मीर समेत देश के किसी भी हिस्से में एएफएसपीए कानून लगाने के पक्ष में सरकार नहीं है। लेकिन परिस्थितियां सामान्य होनी चाहिए। कश्मीर में जैसे ही परिस्थिति सामान्य होगी सरकार यह कानून हटा लेगी।

क्या सरकार कश्मीर समस्या का हल सिर्फ गोली से हल करना चाहती है या बोली यानी बातचीत का विकल्प भी खुला है?

गोली सिर्फ उनके लिए है जो विदेशी शह पर भारत के खिलाफ हथियार उठाकर आतंकवाद फैला रहे हैं। हमारे सुरक्षा बलों पर हमले कर रहे हैं। शेष किसी के साथ बोली का विकल्प खुला हुआ है। हम हर एक से बातचीत को तैयार हैं। जिसे भी बात करनी हो वो आ सकता है। लेकिन बातचीत के लिए कोई शर्त नहीं होगी।
 
लेकिन पाकिस्तान और आतंकवाद के मोर्चे पर हालात जस के तस क्यों हैं?

पाकिस्तान का रवैया कभी भी सहयोग पूर्ण नहीं रहा है। उसकी हरकतें हमेशा भारत को परेशान करने वाली रही हैं और उनमें अभी भी कोई कमी नहीं आई है।  जहां आतंकवाद का सवाल है निश्चित रूप से पाकिस्तान का उसमें बड़ा हाथ है। साथ ही आतंकवाद अब एक वेश्विक चुनौती बन गया है। कश्मीर की समस्या भी पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित है। लेकिन 1990 के शुरुआती वर्षों में कश्मीर के जो हालात थे, उनसे आज काफी बेहतर हैं।अभी और सुधार की जरूरत है।

रमजान के मौके पर एकतरफा संघर्ष विराम का फैसला क्या पीडीपी के दबाव में लिया गया। क्या यह तुष्टीकरण नहीं है ?

Interview: Rajnath singh says Coalition is not challenge for BJP
Rajnath Singh
रमजान मुस्लिम समाज का बड़ा पर्व होता है। सरकार नहीं चाहती कि एसे मौके पर कोई एसी घटना हो जिससे उनके त्यौहार में बाधा पड़े। क्योंकि सुरक्षा बलों के ऑपरेशन में कई बार मजबूरी में जन जीवन बाधित होता है। कश्मीर के लोग भी भारतीय हैं और उनकी भावनाओं और हितों का ख्याल रखना सरकार का कर्तव्य है।

इसलिए रमजान के मौके पर सुरक्षा बलों के ऑपरेशन फिलहाल रोकने की घोषणा की गई है। लेकिन अगर मौके का फायदा उठाकर कोई आतंकवादी हमला होता है तो सुरक्षा बल न सिर्फ उसका मुंहतोड़ जवाब देंगे बल्कि उनका ऑपरेशन फिर शुरु हो जाएगा। सीमा पार से आतंकवादियों की घुसपैठ रोकने के लिए जैसी कार्रवाई पहले चल रही थी, वह चलती रहेगी उस पर कोई रोक नहीं है।

जम्मू कश्मीर में पीडीपी भाजपा गठबंधन सरकार है। क्या केंद्र सरकार और खुद आप राज्य सरकार के कामकाज से संतुष्ट हैं ?

जम्मू कश्मीर की सरकार के कामकाज का आकलन और सही मूल्यांकन तो जनता ही करेगी। हमारी कोशिश है सरकार ठीक चलती रहे और राज्य में हालात सामान्य करने के लिए उसे जो भी सहायता सहयोग चाहिए केंद्र सरकार उसे दे रही है।

नक्सलवादी तो देश के भीतर ही पनप रहे हैं जो आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं ?

नक्सलवादी जिन्हें माओवादी भी कहा जाता है अब हारी हुई लड़ाई लड़ रहे हैं। 2013 में देश के 90 जिले नक्सल प्रभावित थे। बल्कि और पहले 135 जिलों में नक्सली सक्रिय थे। अब सिमट कर सिर्फ 50 जिलों में रह गए हैं और इन 50 जिलों में भी सिर्फ सात से नौ जिलों में ही नक्सली प्रभावशाली हैं। पहले की तुलना में अब सुरक्षा बलों पर माओवादियों के हमले कम हुए हैं। माओवादी बड़ी संख्या में मारे गए या समर्पण कर दिया।

नक्सल प्रभावी क्षेत्रों में विकास कार्य भी तेज किए गए हैं। छत्तीसगढ़ और झारखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जहां सुरक्षा बलों की पहुंच नहीं थी, वहां सुरक्षा बलों के शिविर स्थापित किए गए हैं। पिछले सात महीनों एसे 16-17 शिविर बने हैं। नई बस्तरिया बटालियन का गठन किया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने भी ब्लैक पैंथर फोर्स खड़ी की है। माओवादियों के आर्थिक स्रोतों का पता लगाकर उनकी कमर तोड़ी जा रही है। माओवादियों के खिलाफ लड़ाई अब अपने अंतिम दौर में है।

पूर्वोत्तर में अब मिजोरम को छोड़कर भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार है। लेकिन अभी भी बांग्लादेश से घुसपैठ नहीं रुकी है ?

Interview: Rajnath singh says Coalition is not challenge for BJP
rajnath singh
बांग्लादेश की सीमा काफी हद तक सील हो गई है। कुछ क्षेत्र असम और त्रिपुरा में एसे हैं जहां भौतिक रूप से सीमा सील करना मुमकिन नहीं है, वहां नई तकनीक से युक्त कॉम्प्रेहेन्सिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम का नया प्रयोग किया जा रहा है। जिसके तहत टेक्नालॉजिकल सॉल्यूशन्स के जरिए सेंसर, राडार, कैमरा आदि आधुनिक तकनीक वाले उपकरणों को लगाकर निगरानी की जाएगी और एक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर होगा। जैसे ही कोई सीमा उल्लंघन करने की कोशिश करेगी तत्काल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को खबर हो जाएगी और उसे पकड़ लिया जाएगा।

सरकार का नारा तो सबका साथ सबका विकास का है लेकिन अल्पसंख्यकों और दलितों पर हमले क्यों बढ़ रहे हैं ?

कुछ ताकतें भाजपा और मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए अल्पसंख्यकों और दलितों को डराने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन किसी को भी डरने की आवश्यकता नहीं है। सरकार की नीति सबका साथ और सबका विकास की है और हम इस नीति पर प्रतिबद्ध हैं। सरकार सबकी है देश के 125 करोड़ लोगों का भरोसा इसे प्राप्त है।

महिला सुरक्षा को लेकर भी सरकार की खासी बदनामी हुई चाहे उन्नाव का मामला हो या कठुआ का ?

महिला सुरक्षा के प्रति हमारी सरकार बेहद संवेदनशील है। महिलाओं के प्रति अपराध वाले कानून को और अधिक कठोर किया गया है। नाबालिग लड़कियों से बलात्कार के अपराधियों को मौत की सजा का प्रावधान इसमें जोड़ा गया है। बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ सरकार का कार्यक्रम है और हमारी सरकार महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बेहद संवेदनशील और प्रतिबद्ध है।
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