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Womens Day 2017: वो पांच महिला आंदोलन जो हमेशा याद रखें जाएंगे

Wed, 08 Mar 2017 03:39 PM IST
amarujala.com-written by: संदीप भट्ट
amarujala.com-written by: संदीप भट्ट Updated Wed, 08 Mar 2017 03:39 PM IST
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International Women’s Day 2017: Five mass movements spearheaded by women
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर देश की उन महिलाओं का जिक्र होना जरूरी है ‌जिन्होंने अपनी महिला शक्ति के दम पर समाज में एक नई क्रांति को जन्म दिया और सरकार-सिस्टम के खिलाफ आवाज बुलंद की। हम बात कर रहे हैं देश में महिलाओं के उन आंदोलनों की जिन्होंने सत्ता की चूलें हिला दी और समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ मुखर हो कर बदलाव की लौ जलाकर संघर्ष किया। आगे पढ़ें ऐसे महिला आंदोलन के बारे में।
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पेड़ों को बचाने के लिए महिलाओं का चिपको आंदोलन

पर्यावरण के लिए महिलाओं के इस आंदोलन को विश्व स्तर पर जाना जाता है।जंगल बचाने के लिए उत्तराखंड के रैणी गांव से महिला शक्ति गौरा देवी के नेतृत्व में चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई थी।
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26 मार्च 1974 को जब साइमन एंड कंपनी के मजदूर रैणी गांव में पेड़ों के कटान के लिए गए तो महिलाओं ने विरोध शुरू कर दिया। इस दिन गांव के सभी पुरुष गांव से बाहर थे। गौरा देवी के नेतृत्व में महिलाओं ने कई घंटों तक इसका विरोध किया तब भी कंपनी के मजदूर नहीं माने तो सभी महिलाएं पेड़ों से लिपट गईं।
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महिलाओं ने कहा कि पेड़ों के कटने से पहले हमें काटना होगा। महिलाओं की वन के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता और प्रचंड विरोध को देखते हुए उन्हें जंगलों से बैरंग लौटना पड़ा। जिसके बाद से वन संरक्षण के लिए चिपको आंदोलन शुरू हुआ। आज भी इस गांव की महिलाओं में जंगल और वनों की सुरक्षा को लेकर वही जज्बा और जुनून कायम हैं। 

खाप पंचायतों के खिलाफ उठी ये बुलंद आवाज

International Women’s Day 2017: Five mass movements spearheaded by women
हरियाण के रोहतक की जगमति सांगवान ने महिलाओं के अधिकारों के लिए पढ़ाई के दौरान ही संघर्ष का नारा बुलंद किया। दहेज प्रथा, पर्दा प्रथा, घरेलू हिंसा, यौन शोषण व अन्य कुरीतियों के खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई और उनके संघर्ष की लड़ाई अब भी जारी है।  

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगमति सांगवान पिछले 20 सालों से महिलाओं की स्वतंत्रता व उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ रही हैं। खाप पंचायतों के तुगलकी फरमानों का विरोध करना हो या यौन शोषण के विरुद्ध आवाज उठाना या फिर घरेलू हिंसा व दहेज उत्पीडि़त महिला को न्याय दिलाना हो, वह मोर्चा लेने के लिए हर दम तैयार रहती हैं।

प्रदेश की करीब 52 हजार महिलाएं समिति से जुड़ी हैं। एसोसिएट प्रोफेसर जगमति सांगवान अब तक भिवानी, रोहतक, जींद, हिसार, फतेहाबाद, गुड़गांव सिरसा, झज्जर, पानीपत, रेवाड़ी व अन्य जिलों में सैकड़ों जागरूकता अभियान चला चुकी हैं। 

हत्या-बालात्कार के खिलाफ जब महिलाओं ने किया नग्न प्रदर्शन

International Women’s Day 2017: Five mass movements spearheaded by women
वर्ष 2004 में मणिपुर में थांगजम मनोरमा के बलात्कार और हत्या के विरोध में महिलाओं ने नग्न हो कर प्रदर्शन किया। महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन से मणिपुर में भारतीय सेना द्वारा आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट के दुरुपयोग का पहलू उजागर किया और सेना पर आरोप लगायास था।

आरोप था कि असम राइफल्स के जवानों ने 11 जुलाई को 2004 को थांगजम मनोरमा को उसके घर से उठाया था, और कथित तौर पर उससे बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी थी।

लोगों का गुस्सा तब भड़का जब कुछ दिनों बाद मनोरमा की लाश बरामद हुई और यह पाया गया की उसके जननांग पर कई गोलियां मारी गयी थी, पोस्ट मॉर्टेम रिपोर्ट में यह बात साफ हुई की  उसके साथ बलात्कार हुआ था। म‌णिपुर की 12 महिलाओं के एक समूह ने इंफाल के कांगला फोर्ट के सामने सेना की इस बर्बरता के खिलाफ नग्न प्रदर्शन किया था।

महिला अधिकारों का गुलाबी गैंग

International Women’s Day 2017: Five mass movements spearheaded by women

बुंदेलखंड के बांदा और आसपास के इलाके में गुलाबी गैंग की खस पहचान है। गैंग की मुखिया संपत पाल की पहचान हाथ में लाठी और गुलाबी साड़ी से है। यूपी के  बांदा-चित्रकूट इलाके में गुलाबी गैंग मशहूर है।

गुलाबी कपड़ों में महिला अधिकारों के लिए संघर्ष करती महिलाओं का  एक गैंग है जिसकी मुखिया सम्पत पाल। गुलाबी गैंग घरेलू हिंसा का विरोध करता है। गुलाबी साड़ी पहनकर महिलाओं के हक  की लड़ाई लड़ने वाली संपत पाल देवी दुनिया के लिए मिसाल हैं।उनके गैंग के लोग महिला अधिकारों के लिए और उन पर होने वाले उत्पीड़न के खिलाफ लड़ती हैं। 

गुलाबी गैंग पर बनी फिल्‍म
गुलाबी गैंग की मुखिया सम्पत पाल और उनके गैंग से प्रभावित्त होकर  गुलाब गैंग नाम से एक फ‌िल्म भी बनी। पिंक साड़ी के नाम की इस फ‌िल्म में अभिनेत्री माधुरी दीक्षित और जूही चावला लीड रोल में थी। फिल्म में माधुरी दीक्षित ने संपत पाल की भूमिका निभाई।

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