International Women Day 2023: तकनीक और महिला शक्ति का संगम, वूमेन लीडरशिप से जानें सपने साकार करने के मंत्र
'डिजिट-ऑल' : लैंगिक समानता के लिए इनोवेशन और तकनीक... इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर यही विमर्श का विषय है। भारत तकनीक, सूचना प्रौद्योगिकी और इनोवेशन के लिहाज से प्रमुख देशों में शुमार है। इस मौके पर, अमर उजाला ने महिला लीडरशिप से जाने सपने साकार करने के मंत्र।
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विस्तार
कनिका टेकरीवाल: अक्सर ऑफिस की बैठकों में अकेली लड़की होती थी
कनिका कहती हैं, आज कार्यस्थलों पर महिलाओं की संख्या बढ़ाने का सबसे अच्छा समय है। इनोवेशन और टेक्नोलॉजी इसमें मदद कर रही है। नए अवसर बन रहे हैं, पुरानी बाधाएं मिट रही हैं।
बराबरी... महिला हो या पुरुष दोनों को समान अवसर मिलने चाहिए
सफल होने के लिए सभी को बराबरी के अवसर मिलने चाहिए, इन अवसरों के लिए महिला-पुरुष होने से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। बल्कि समान अवसर देकर और बराबरी का व्यवहार करके ही हम महिलाओं व वंचितों की पूरी क्षमता काम में ले सकते हैं। वहीं 50 प्रतिशत आबादी का पूरा योगदान लेना हमारी अर्थव्यवस्था के लिए भी जरूरी है।
- 33 साल की कनिका टेकरीवाल जेट सेट गो की संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।
- 2012 में शुरू हुई यह कंपनी चारधाम यात्रा हो या बिजनेस ट्रिप, चार्टर्ड विमान लीज पर मुहैया करवाती है, इनमें हल्के जेट, हेलिकॉप्टर भी शामिल हैं।
- कनिका ने महज 21 साल की उम्र में स्टेज-2 के हॉजकिन्स लिम्फोमा कैंसर को भी पराजित किया था।
एविएशन इंडस्ट्री में अपनी कंपनी की संस्थापक और उद्यमी होने के नाते मेरे कई निजी अनुभव हैं...जब मैंने कंपनी शुरू की, कई बार ऑफिस की बैठक में मैं अकेली लड़की होती थी। यही बात मुझे दोगुना काम करने के लिए प्रेरित करती। समय के साथ मैंने सीखा कि अपने कार्यालय या कारोबार में अगर हम लैंगिक समानता प्रोत्साहित करें, तो पूरी टीम की क्षमता बढ़ती है। सभी को अपने काम के लिए बराबर सम्मान मिले, तो यह पूरे समाज और दुनिया को समृद्ध बनाने में भी योगदान देगा।
लड़कियां सपने देखना न छोड़ाे... दृढ़ता से काम करो, तो सपने साकार हो जाएंगे। अपने काम पर एकाग्र रहो, जिज्ञासु बनो और लक्ष्य से कभी पीछे न हटो।
मेघना अग्रवाल: बदलाव हो रहे, पूरी उम्मीद है कि बढ़ेगा महिलाओं का नेतृत्व
मेघना ने 25 वर्ष की उम्र में हायरप्रो की सह स्थापना की, फिर अल्ट्राफाइन मिनरल्स बनाया। साल 2015 में इंडिक्यूब की सह संस्थापक बनीं।
- इंडिक्यूब बड़े उद्यमियों से लेकर स्टार्टअप तक को वर्क-स्पेस मुहैया करवाने पर काम कर रहा है।
- 10 शहरों में इसके जरिये कई जानी-मानी कंपनियों को अपने कार्यालय स्थापित करने में मदद मिली। अपनी इनोवेटिव कार्यशैली की वजह से अलग पहचान भी मिली।
नेतृत्व की शुरुआत हर क्षेत्र में सबसे निचले हिस्से में सुधारों से होती है
महिलाएं गृहिणी हों या उद्यमी, उनके प्रति कुछ पूर्वाग्रह हमारे समाज और दुनिया में लंबे समय से रहे हैं। ध्यान रखना होगा कि तकनीक और इनोवेशन में भी इनमें से कुछ पूर्वाग्रह बने रह सकते हैं। सवाल हैं कि क्या हम इसे रोक सकते हैं और कितना रोक सकते हैं? सबसे अहम है कि इन सवालों पर चर्चा व निर्णयों के दौरान क्या महिलाएं लीडरशिप रोल में होंगी? नेतृत्व पाने की शुरुआत हर क्षेत्र में सबसे निचले हिस्से में सुधारों से होती है।
तकनीक-इनोवेशन से बदल रहे नौकरियों के स्वरूप
आज सुधार हो रहे हैं, फिर भी महिलाएं लीडरशिप के समय गुम क्यों नजर आ रही हैं? क्लास 10 और 12 के स्कूली परिणामों में लड़कियां न केवल मेरिट लिस्ट बल्कि अनुपात में भी बड़ी संख्या में आगे नजर आती हैं, लेकिन कॉरपोरेट में वे नहीं हैं, वर्कफोर्स में भी उतनी संख्या में नहीं हैं। मुझे लगता है कि यह समय के साथ होने वाले बदलाव की प्रक्रिया है। आज तकनीक और इनोवेशन से नौकरियों के स्वरूप बदल रहे हैं, महिलाओं के लिए अवसर बढ़े हैं। सभी क्षेत्रों, खासतौर पर द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों में बदलाव दिख रहे हैं। आने वाले कुछ वर्षों में हमें महिलाएं कहीं अधिक संख्या में लीडरशिप में नजर आएंगी।
लड़कियों यह ध्यान रखना
उद्यमिता या स्टार्टअप के लिए महिलाओं को अलग से प्रेरित करने की जरूरत नहीं है। यहां समस्याएं और बाधाएं जेंडर से जुड़ी नहीं, बल्कि सभी को समान रूप से प्रभावित करने वाली हैं। महिलाओं को केवल इतना पता होना चाहिए कि उन्हें जीवन में क्या चाहिए? आज महिला उद्यमियों की सफलता की इतनी कहानियां हैं, अवसर भी भरपूर हैं, बाकी मेहनत तो उन्हें खुद करनी होगी।
अमृतागंधा दत्ता: एआई तकनीक में पूर्वाग्रहों की घुसपैठ रोकना जरूरी
साल 2020 में एक्सपैंड एआई स्टार्टअप के जरिये अमृता ने डाटा लेबलिंग प्रक्रिया के ऑटोमेशन क्षेत्र में कदम रखा। इसके जरिये विभिन्न कंपनियों को 95 प्रतिशत सफलता से डाटा मुहैया करवा रही हैं।
तकनीकी समझ वाली महिलाओं का लीडरशिप में होना जरूरी
तकनीक और इनोवेशन जिस तेजी से हमारी दुनिया के हर पहलू पर हावी हो रहे हैं, इस मौके पर कुछ जरूरी बातों पर चर्चा होनी चाहिए। दरअसल आशंकाएं बनी हुई हैं कि महिलाओं को लेकर समाज और दुनिया में जो पूर्वाग्रह हम अब तक देखते आए हैं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भी वे घुसपैठ कर सकते हैं। इसे पक्षपाती नजरिये और पूर्वाग्रहों के असर से बचाने के लिए तकनीक की अच्छी समझ रखने वाली महिलाओं का लीडरशिप में होना आज बहुत जरूरी है।
मेरा अनुभव : दरअसल एआई हम से ही सृजित डाटा से खुद को विकसित कर रही है। एक वाक्य में कहें तो एआई केवल डाटा की भाषा समझती है। अगर उसमें लैंगिक भेदभाव से भरा डाटा फीड होगा तो पूरे तकनीकी क्षेत्र में यह भेदभाव हमें नजर आने लगेंगे। इस क्षेत्र में काम कर रही हर कंपनी के लिए अपने एआई मॉडल में यह डाटा जाने से रोकना इस समय अहम दायित्व है।
सानिया जेसवानी, पर्केंट टेक: आज उद्यमिता में योगदान को बराबरी का सम्मान
नीति आयोग की ओर से भारत की 75 प्रमुख महिला उद्यमियों में शामिल सानिया का बनाया स्टार्टअप पर्केंट टेक चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में काम कर रहा है। अपने इनोवेटिव उपकरणों के जरिये उन्होंने भारत के आंचलिक क्षेत्रों में चिकित्सा जांच को आसान बनाने पर जोर दिया है।
कामकाजी, उद्यमी और स्टार्टअप शुरू करने का ख्याल रखने वाली महिलाओं के लिए आज नए अवसर खुल रहे हैं। अर्थव्यवस्था में महिलाओं के उद्यमिता कौशल के जीवनदायी योगदान को समझा जाने लगा है।
मेरा अनुभव : भेदभाव को खत्म करना है तो महिलाओं को हर संबंधित क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ानी होगी, नेतृत्व क्षमता हासिल करनी होगी। एक महिला उद्यमी के तौर पर आप जब कुछ चीजों को बदलने लगती हैं, तो इन बदलावों को बाकी लोग भी अपनाने के बारे में सोचते हैं।
लक्ष्य हासिल करने में जुटें : स्टार्टअप को किसी महिला या पुरुष उद्यमी के नेतृत्व में शुरू हो रहे स्टार्टअप की तरह देखना बंद करें। अपने काम के बारे में सोचें, लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जुट जाएं। सबसे अहम है कि आप कितनी इनोवेटिव हो सकती हैं? कुछ अलग काम होगा तो सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।
वंदना सूरी: सड़कों पर ज्यादा महिलाएं कार चलाएं...यही लक्ष्य
विश्व बैंक की ओर से सतत विकास लक्ष्यों के तहत सम्मानित वंदना अपने स्टार्टअप टैक्सशी के जरिये महिलाओं और बच्चों को बेहतर परिवहन देने पर काम कर रही हैं। महिलाओं को कई शहरों में ड्राइविंग प्रशिक्षण भी दे रही हैं।
काफी समय यह पुरुषों की दुनिया रही, 100 साल पहले पुरुषों ने तय किया महिलाओं को शिक्षा दी जाए, इसके बाद वोट करने दिया। हमें आज सवाल करने पड़ रहे कि लैंगिक बराबरी क्यों चाहिए? मुझे लगता है बराबर अवसर, प्रतिनिधित्व और निजी जीवन के बराबर दायित्वों को साझा करने के लिए हमें इसकी जरूरत है।
परिवहन उद्योग में महिला सर्वेसर्वा
टैक्सशी के जरिये परिवहन उद्योग में महिलाओं को सर्वेसर्वा बनाना चाहते हैं। उम्मीद है कि आने वाले समय में परिवहन उद्योग को महिलाएं संचालित करेंगी। इसका प्रभाव हर शहर में नजर आएगा।
कांक्षी अग्रवाल: राजनीति में बढ़े भागीदारी
साल 2019 में महिला राजनीति से जुड़ा स्टार्टअप नेत्री फाउंडेशन बनाने का दावा...कांक्षी के अनुसार उनके बनाए कार्यक्रम महिलाओं को चुनावों से लेकर राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
मेरा प्रयास है कि महिलाओं की आवाज संसद में गूंजे, विधानसभाओं में गूंजे, अंतरराष्ट्रीय मंचों में सुनाई दे। महिलाओं का सबसे बड़ा मुद्दा इस समय उनकी आवाज उठाने वालों की कमी का है। चाहे वह किसी भी स्तर पर हो। संसद-विधानसभाएं और तमाम राजनीतिक मंच वे जगह हैं, जहां निर्णय लिए जाते हैं। महिलाएं उद्यमी बनना चाहें या नेता, या किसी अन्य पेशे से जुड़ना चाहें, वहां के नेतृत्व में अगर उनकी भागीदारी है, तो उनके लिए परिस्थितियां दूसरे क्षेत्रों से बेहतर होती हैं।
प्रतिनिधित्व कम तो कैसे आएंगे सुधार
हमारी संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 15 प्रतिशत तक नहीं पहुंच सका है। संसद और विधानसभाओं में जब नीतियां और कानून बनाने की बात होगी और वहां महिलाएं इतने कम अनुपात में होंगी, तो सुधार कैसे आएंगे?
शैली मोदी: सामाजिक अपेक्षाओं में दबकर न गंवाएं आगे बढ़ने के मौके
महिलाओं को पूरी आजादी समाज में लैंगिक समानता लाने से मिल सकती है। आज हम डिजिटल क्रांति के दौर में हैं, जहां महिलाओं को न केवल घर में रहते हुए काम करने व पैसे कमाने के अवसर मिल रहे हैं, बल्कि वे समाज पर व्यापक प्रभाव भी डाल रही हैं। हमें तकनीक व इनोवेशन को लैंगिक समानता बढ़ाने के लिए श्रेय देना चाहिए। महिला दिवस की थीम बिल्कुल वाजिब नजर आती है।
अब वित्तीय आजादी पर जोर
प्रतिलिपि पर सबसे ज्यादा कमाई करने वालों में 70 प्रतिशत महिलाएं हैं। पर अधिकतर अपने पति या किसी अन्य के बैंक खाते मुहैया करवाती हैं। उनके अपने बैंक खाते तक नहीं होते, न उन्हें इनकी जरूरत कभी महसूस हुई। अब प्लेटफॉर्म से जुड़ी सैकड़ों लेखिकाओं ने नियमित आय को देखते हुए बैंक खाते खुलवाए हैं। यही वित्तीय आजादी इनोवेशन और तकनीक उन्हें दिला रहे हैं। ऑनलाइन पढ़ने की आदत बढ़ने से आय भी बढ़ रही है। कई लेखिकाओं की रचनाओं का लाइसेंस ओटीटी प्लेटफॉर्म व प्रोडक्शन हाउस लेने लगे हैं।
लड़कियों ध्यान रखना : आपसे कुछ सामाजिक अपेक्षाएं होती हैं, लेकिन इनकी वजह से आगे बढ़ने के मौके न गवाएं। शिक्षा हासिल करने के बाद काम का अनुभव भी हासिल करें। शादी कर रही हैं, या बच्चा प्लान कर रही हैं, इन वजहों से अपने कॅरिअर को हमेशा के लिए छोड़ने का ख्याल मन में न लाएं।
परिचय : 2014 में मित्रों के साथ प्रतिलिपि लॉन्च किया, जहां लोग कहानियां, साहित्य व ऑडियो बुक्स प्रकाशित करते हैं। 12 भाषाओं में 8 लाख लेखक व 2.5 करोड़ पाठक इसका उपयोग कर रहे हैं।
नमिता शाह: समानता से मिलता है नया नजरिया, विचार व समाधान
सभी वर्गों की पूरी क्षमता का उपयोग भविष्य के लिए जरूरी
समाज में बराबरी, न्याय और निष्पक्षता लैंगिक समानता से आ सकती है। यही समानता लाने में आज इनोवेशन मदद कर रहे हैं। इन इनोवेशन को हमारे जीवन का हिस्सा बनाते हुए समाज के कोने-कोने तक बदलाव लाने का प्रयास नई तकनीकों से हो रहा है। यह हमारी व्यवस्था, विचारों और दिमागों को भी प्रगतिशील बना रहे हैं।
मेरा अनुभव : कंपनी बनाते समय मैंने समझ लिया था कि समानता को बढ़ावा देने के कई फायदा मिलेंगे। महिलाओं व पुरुषों को बराबर माना जाता है, तो नया नजरिया, विचार और समस्याओं के समाधान निकलते हैं। सभी वर्गों की पूरी क्षमता का उपयोग कर पाना, हमारे भविष्य के लिए भी जरूरी है।
अपनी शक्ति को पहचानें
सदियों से घरों व परिवारों का अच्छा प्रबंधन कर रही महिलाओं को अपनी इस क्षमता का उपयोग करना चाहिए। अपनी शक्ति को पहचानें और ऐसा सोचना बंद करें कि महिला होने की वजह से आप किसी पर बोझ हैं।
परिचय : सीए और वकील नमिता और उनके साथियों ने प्री-सॉल्व360 स्टार्टअप बनाया, जहां कानूनी विवादों, खासतौर पर कंपनियों से जुड़े मामलों को सद्भावना से सुलझाने का प्रयास होता है। संबंधित पक्षों का खर्च और समय बचते हैं। विवाद समाधान के लिए ऑनलाइन जरिया अपनाया जा रहा है।