फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   inherent flaws in covid 19 testing mean some of those infected dont get the treatment they need

कोरोना टेस्टिंग में बुनियादी गलती से संक्रमितों को नहीं मिल रहा जरूरी इलाज

Sat, 09 May 2020 04:20 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला Published by: Tanuja Yadav Updated Sat, 09 May 2020 04:20 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
inherent flaws in covid 19 testing mean some of those infected dont get	the treatment they need
कोरोना की जांच के लिए नमूना एकत्र करता एक स्वास्थ्य कर्मी - फोटो : PTI

फरवरी अंत में, कई अमेरिकी शहरों में लॉकडाउन लगने और कोरोना के राष्ट्रीय आपदा से पहले कैरी रॉसन की तबीयत खराब होने लगी। रॉसन ने बताया कि शुरुआत में बीमारी के दौरान फ्लू जैसा महसूस होता था। रॉसन को पहले से अस्थमा की दिक्कत थी। 


loader

फरवरी अंत में, कई अमेरिकी शहरों में लॉकडाउन लगने और कोरोना के राष्ट्रीय आपदा से पहले कैरी रॉसन की तबीयत खराब होने लगी। रॉसन ने बताया कि शुरुआत में बीमारी के दौरान फ्लू जैसा महसूस होता था। रॉसन को पहले से अस्थमा की दिक्कत थी। 

41 वर्ष की रॉसन फ्लोरिडा में अपने दो बच्चों के साथ रहती हैं। रॉसन को 11 दिन बुखार रहा और उनके बच्चों में भी तापमान ज्यादा दिखने लगा। रॉसन के बेटे के शरीर का तापमान 102 डिग्री रहा जो हालांकि कुछ दिनों में सामान्य हो गया लेकिन उनकी बेटी को गले छीलने जैसी खांसी होने लगी, डॉक्टर ने बेटी को ब्रोंकाइटिस बताया।

रॉसन ने बताया कि तब पहली बार कोविड-19 के बारे में डॉक्टर से चर्चा हुई थी। छह मार्च तक रॉसन को बुखार और सीने में दर्द रहने लगा। उस समय फ्लोरिडा में करीब कोरोना के दस मामले थे। डॉक्टर ने रॉसन ने यात्रा और संपर्क के बारे में पूछा, ना में जवाब मिलने पर डॉक्टर ने कहा कि हम सीडीसी के दिशा निर्देशों के आधार पर काम करते हैं इसलिए टेस्ट नहीं कर सकते।

रॉसन ने राजकीय स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग दोनों से संपर्क किया लेकिन जवाब में यही मिला कि कोई यात्रा और किसी कोरोना मरीज से संक्रमित नहीं है इसलिए टेस्ट नहीं करेंगे। हालांकि रॉसन गंभीर रूप से बीमार भी नहीं थी।

अगले कुछ हफ्तों में रॉसन की हालत बिगड़ती गई। रॉसन का ब्लड प्रेशर बढ़ गया, दिल की धड़कने बढ़ गईं और सांस लेने में दिक्कत होने लगी। रॉसन ने अपने पारिवारिक डॉक्टर से बात की और कहा कि उन्हें कोरोना होने की संभावना नजर आती है।

डॉक्टर ने उनको इमरजेंसी कमरे में भर्ती किया। रॉसन ने बताया कि वहां पर डॉक्टर ने सभी तरह के टेस्ट किए लेकिन कोरोना का टेस्ट नहीं किया। रॉसन को खुद में कोरोना के लक्षण दिखे दो हफ्तों से ज्यादा हो गया था लेकिन अब तक कोविड-19 का टेस्ट नहीं हुआ।

12 मार्च को कैरी रॉसन का सीटी स्कैन हुआ, डॉक्टर ने बताया कि रॉसन को बाइलैटरल निमोनिया हुआ है। रॉसन के सीटी स्कैन रिपोर्ट में बताया गया कि रॉसन के फेफड़ों में ग्रे रंग के धब्बे से दिखाई दे रहे हैं, जो कोविड-19 के मरीजों में देखा जाता है। 

13 मार्च को रॉसन को आइसोलेशन वार्ड में रखा गया और दो अलग तरह की एंटीबॉडी दी गई। इसके बाद रॉसन नाक और गले के जरिए कोरोना का टेस्ट हुआ छह घंटे बाद टेस्ट का परिणाम नकारात्मक आता है। हालांकि रॉसन को लगा था कि टेस्ट का परिणाम गलत आया है।

कुछ समय बाद रॉसन को आइसोलेशन वार्ड से बाहर कर पर्यवेक्षण कक्ष में रख दिया। 14 मार्च को कैरी रॉसन अपने घर चली गईं, जहां वो अकेले निमोनिया, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं और नींद की परेशानी से जूझने लगी। अप्रैल के मध्य तक रॉसन की तबियत में कोई सुधार नहीं दिखा।

टेस्ट के परिणाम संदेहपूर्ण क्यों हो रहे हैं?

एडिन्बर्ग विश्वविद्यालय के पीएचडी छात्र डॉ कैथरीन कार्वर के मुताबिक अगर आप 100 लोगों को टेस्ट कर रहे हो जिनमें कोरोना है, उसमें से 30 मामलों के परिणाम नकारात्मक ही आएंगे। इसका मतलब यह हो सकता है कि हजारों अमेरिकी लोगों के टेस्ट परिणाम आएं हैं, जिनमें से कुछ लोगों के टेस्ट निगेटिव है जबकि असल में उनमें कोरोना संक्रमण हो सकता है।

डॉ कार्वर का कहना है कि ये एक गलत प्रक्रिया हो सकती है क्योंकि ऐसा करने से कोरोना संक्रमित मरीज को जरूरी इलाज नहीं मिल पाएगा। साथ ही ऐसे मरीज से दूसरे लोगों को भी कोरोना वायरस होने की संभावना बढ़ जाएगी।

डॉ कोलिन वेस्ट का कहना है कि कोरोना को काबू करने के लिए कोविड-19 की टेस्टिंग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन ये समझने की जरूरत है कि टेस्ट उचित तरीके से नहीं किए जा रहे हैं जिस वजह से कुछ टेस्ट के परिणाम गलत आ रहे हैं। 

किसी टेस्ट के निगेटिव आने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि नासिका स्वाब का अच्छे से काम ना करना। वेस्ट बताती हैं कि इस प्रक्रिया को अच्छे से करने के लिए नासाग्रसनी में ठीक प्रकार से फुरहरी को डालना जरूरी है। कई बार देखा गया है कि ये पाइप नाक के जरिए गले तक पूरी तरह नहीं जाता इसलिए टेस्ट संपूर्ण नहीं आ पाता है।

गलत टेस्ट आने की दूसरी संभावना समय हो सकता है। ऐसा भी हो सकता है कि किसी इंसान में उसमें उचित मात्रा में वायरस की कमी हो जिससे सैंपल में वायरस की पुष्टि नहीं हो पाती है। इसलिए अगर टेस्ट देरी से कराते हैं तो टेस्ट के निगेटिव आने की संभावनाएं ज्यादा हो जाती हैं।

जानकारों का कहना है कि टेस्ट की विश्वसनीयता पर और शोध करने की जरूरत है। डॉक्टर्स और मरीजों को ये जानने की जरूरत है कि टेस्ट पर कितना विश्वास करना है ताकि सही फैसला लिया जा सके।

डॉक्टर से पूरी तरह से किया दूर 

हालांकि कैरी रॉसन को अभी तक नहीं पता कि उन्हें कोरोना है या नहीं। वो बस इतना जानती हैं कि टेस्ट निगेटिव आने की वजह से उन्हें उचित मेडिकल केयर नहीं मिल पा रही है। 22 मार्च को कार्डियक दिक्कत होने की वजह से रॉसन दोबारा इमरजेंसी रूम में आईं। 

अब तक राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना के मामले ज्यादा बढ़ गए थे और अस्पतालों में इंटेंसिव केयर में सख्ती हो गई थी। अप्रैल के अंत तक रॉसन की हालत में सुधार देखने को मिला लेकिन उनके फेफड़ें कमजोर हो गए थे। हालांकि कैरी रॉसन का दोबारा कोरोना टेस्ट किया गया लेकिन वो नहीं जानती कि उनका परिणाम क्या रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed