हादसे की आपबीती: डर के मारे कांप रहे थे पैर, हर तरफ चीखने-चिल्लाने की आवाज
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‘भोर में करीब साढ़े तीन से चार बजे के बीच का समय था। ट्रेन अपनी रफ्तार में थी। एस-6 कोच के सभी यात्री बेफ्रिक सो रहे थे। अचानक बिजली जैसी कड़कड़ाहट हुई और लगा कि आसमान फट गया हो। कई यात्री एक-दूसरे पर गिर पड़े। किसी को कुछ समझ में नहीं आया। अचानक चीखपुकार और चीत्कार गूंजने लगी।
चारों तरफ लोग बचाने की गुहार लगा रहे थे, लेकिन कोई उनकी मदद नहीं कर रहा था। किसी तरह हिम्मत बांधकर गेट खोलकर देखा तो दिल-दिमाग सन्न रह गया। ट्रेन की कई बोगियां पलट गई थीं। उनकी भी बोगी पटरी से उतरी थी। भगवान का शुक्र था कि पलटी नहीं। चारों तरफ लाशें और रोते-तड़पते घायल दिखाई दे रहे थे। दिल-दिमाग सुन्न हो गया। पत्नी और बच्चों की याद आते ही अचानक बेहोशी टूटी। सभी बोगी में ही इधर-उधर गिर पड़े थे, लेकिन किसी को चोटें नहीं आई थीं।’
रविवार भोर में कानपुर के पास दुर्घटनाग्रस्त हुई इंदौर-पटना एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे राकेश श्रीवास्तव घटना के बारे में बताते हुए कांप रहे थे। कहा, ईश्वर की कृपा थी कि चारों लोग सही सलामत बच गए। उनकी बातें सुनकर लोगों के रोंगेट खड़े हो गए।
शोर मच गया कि ट्रेन पलट गई है
कंधई के बिबियाकरनपुर गांव के रहने वाले राकेश श्रीवास्तव पत्नी ज्योत्सना श्रीवास्तव पुत्र हिमांशु और बेटी तृषा के साथ एक सप्ताह पहले भाई की लड़की की शादी में शामिल होने के इंदौर गए थे। शादी में शिरकत करने के बाद वे इंदौर-पटना एक्सप्रेस से परिवार के साथ घर लौट रहे थे।
कोच एस-6 में सुल्तानपुर तक उनका आरक्षण था। सब लोग नींद में थे। अचानक भोर में साढ़े तीन से चार के बीच तेज आवाज के साथ झटका लगा। लोग सीटों से नीचे गिर पड़े। लगा आकाश से बिजली ट्रेन पर गिर पड़ी हो। झटका लगने से उनकी नींद खुल गई। शोर मच गया कि ट्रेन पलट गई है। सभी ने जान बचाकर भागना शुरू कर दिया।
कोच से बाहर निकले तो वहां का मंजर देखकर सहम गए। कई बोगियां क्षतिग्रस्त हो चुकी थीं। लोग सिर्फ चिल्ला रहे थे। खूनी मंजर देखकर कलेजा मुंह को आ गया। कई कोच टेढ़े हो गए थे। चक्के आसमान की तरफ थे।
एक किलोमीटर पैदल चले, हादसे की खबर से सहमा रहा परिवार
कई कोच जमीन में तिरछे पड़े थे। कई के परखचे उड़ गए थे। उसमें फंसे लोग चिल्ला-चिल्ला मदद की गुहार लगा रहे थे। कई मर चुके थे। उनकी लाशें कोचों के बीच फंसी हुई थी। हर तरफ चीख और चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं। वे भागकर अपने कोच में गाए और परिवार को लेकर नीचे उतरे।
एक किलोमीटर पैदल चले
राकेश पत्नी और बच्चों को लेकर किसी तरह बोगी से नीचे उतरे। सभी किसी तरह अंधेरे में हाइवे तक पहुंचे। हाइवे पर करीब आधा किलोमीटर पैदल चलने के बाद उन्हें एक मैजिक मिली। किसी तरह उससे गुहार करके वह कानपुर पहुंचे। फिर वहां से सड़क के रास्ते प्रतापगढ़ आए।
हादसे की खबर से सहमा रहा परिवार
हादसे की खबर सुनकर राकेश का पूरा सहमा रहा। घर में रोना-पीटना मच गया था। मगर जब राकेश से मोबाइल पर बात हुई तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली। शाम को जब राकेश परिवार के साथ घर पहुंचे तो उनके यहां गांव वालों का मजमा लगा रहा। सकुशल परिवार को देखकर लोगों की खुशी का ठिकाना न रहा।