एक पायलट का सपना बना हकीकत, उड़ान भरने को तैयार स्वदेशी विमान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया का असर दिखने लगा है। पायलट कैप्टन अमोल यादव के सपनों की उड़ान पूरी होने वाली है।
देश में निर्मित पहले स्वदेशी विमान का डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने रजिस्ट्रेशन कर लिया है। डीसीजीए अब इस छह सीटर विमान का निरीक्षण करेगा और इसके बाद इसे उड़ान भरने की इजाजत दी जाएगी।
कैप्टन अमोल यादव ने बताया कि उन्होंने 17 साल पहले स्वदेशी विमान बनाने की कल्पना की थी, लेकिन उनके सपनों की उड़ान को तब पंख लगे जब पिछले साल मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कांप्लेक्स (बीकेसी) में मेक इन इंडिया प्रदर्शनी लगी।
प्रदर्शनी में उनके बनाए विमान को भी जगह मिली। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने इस प्रोजेक्ट में व्यक्तिगत रुचि ली। अमोल ने बताया कि उन्होंने डीजीसीए के पास पहले ही विमान रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया था, लेकिन डीजीसीए ने कहा कि विमान रजिस्ट्रेशन के सभी नियम डिलीट किए जा चुके हैं।
दरअसल, देश में बने विमानों को लेकर कोई सरकारी नीति ही नहीं थी।अमोल ने बताया कि प्रदर्शनी के बाद मुख्यमंत्री का साथ मिला।
मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चार बार मुलाकात की और दो बार पत्र लिखा। आखिरकार, डीजीसीए की तरफ से रद्द किए गए नियम फिर से वापस लाए गए।
दो नवंबर को छह सीटर विमान का रजिस्ट्रेशन हो गया। अब विमान के परीक्षण के बाद इसे ‘परमिट टू फ्लाई’ की अनुमति मिलेगी।
छह सीटर विमान के बाद अमोल 14 सीटर विमान बनाने में लगे हैं। अमोल का कहना है कि देश में ही विमान बनने से धन की बचत होगी और युवकों को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिलेंगे।
अमोल के पास नहीं है एरोनॉटिक इंजीनियरिंग की डिग्री
छह सीटर स्वदेशी विमान बनाने वाले अमोल यादव पायलट हैं। उनके पास ऐरोनॉटिक इंजीनियरिंग की डिग्री नहीं हैं। अमेरिका से लौटकर उन्होंने भारत में विमान बनाने का सपना देखा। मुंबई पश्चिम उपनगर के चारकोप में अपने घर की छत पर उन्होंने पहला हवाई जहाज बनाया।
पीएम, सीएम के नाम पर रजिस्ट्रेशन
अमोल यादव ने देश में निर्मित पहले विमान का रजिस्ट्रेशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के नाम पर ‘वीटी-एनएमडी’ कराया है। उनका कहना है कि इन दोनों के प्रति आभार प्रकट करने के लिए इस नाम से पंजीकरण कराया है।