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Trade pact: भारत-अमेरिका व्यापार समझौता नौ जुलाई से पहले होने की उम्मीद, कई क्षेत्रों पर अभी नहीं बनी सहमति

Fri, 04 Jul 2025 06:05 PM IST
राहुल कुमार पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Fri, 04 Jul 2025 06:05 PM IST
सार

India-US Trade: अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत करने के बाद वाशिंगटन गया भारतीय दल वापस लौट आया है। कृषि और वाहन सेक्टर में कुछ मुद्दों को अभी भी सहमति नहीं बनी है, इसलिए दोनों देशों के बीच चर्चा जारी रहेगी।

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Indian team returned from Washington after holding talks with US on trade pact certain issues still pending
पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत करने के बाद वॉशिंगटन गया भारतीय दल वापस लौट आया है। इस समझौते को नौ जुलाई से पहले अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है, लेकिन कृषि और वाहन सेक्टर में कुछ मुद्दों को अभी भी सहमति नहीं बनी है, इसलिए दोनों देशों के बीच चर्चा जारी रहेगी। भारतीय दल का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल कर रहे हैं। वे वाणिज्य विभाग में विशेष सचिव भी हैं।

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मामले में एक अधिकारी ने बताया कि वार्ता अंतिम चरण में है और इसके निष्कर्ष की घोषणा नौ जुलाई से पहले होने की उम्मीद है, जो भारत समेत कई देशों पर लगाए गए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाबी शुल्क के 90-दिवसीय निलंबन की अवधि का अंतिम दिन है। अधिकारी ने कहा, भारतीय टीम वॉशिंगटन से वापस आ गई है, वार्ता जारी रहेगी, कृषि और वाहन क्षेत्रों में कुछ मुद्दे हैं जिन्हें हल करने की जरूरत है।
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डब्ल्यूटीओ के सामने उठाया वाहन क्षेत्र में 25% शुल्क का मुद्दा
भारत ने वाहन क्षेत्र में 25 प्रतिशत शुल्क को लेकर मुद्दा उठाया है। इसने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की सुरक्षा समिति में इस मामले को उठाया है। भारत ने डब्ल्यूटीओ को यह भी बताया है कि उसने इस्पात और एल्युमीनियम पर अमेरिकी शुल्क के जवाब में चुनिंदा अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाने का अधिकार सुरक्षित रखा है। 
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भारत ने डब्ल्यूटीओ को भेजे एक पत्र में कहा, 26 मार्च 2025 को अमेरिका ने भारत में बने या वहां से आयातित यात्री वाहनों और हल्के ट्रकों तथा कुछ वाहन कलपुर्जों के आयात पर 25 प्रतिशत शुल्क वृद्धि की है। जो तीन मई 2025 से असीमित अवधि के लिए लागू हो गई। पिछले साल अमेरिका ने वैश्विक स्तर पर 89 अरब डॉलर के वाहन कलपुर्जों का आयात किया। इसमें मेक्सिको का हिस्सा 36 अरब डॉलर, चीन का 10.1 अरब डॉलर और भारत का हिस्सा सिर्फ 2.2 अरब डॉलर का था।

कृषि क्षेत्र में भी टैरिफ पर नहीं बन पाई सहमति
कृषि क्षेत्र में अमेरिका डेयरी उत्पादों, सेब, वृक्षों से प्राप्त मेवों और आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों जैसे उत्पादों पर शुल्क रियायतें चाहता है। राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण, भारत के लिए कृषि क्षेत्र में कोई रियायत देना कठिन और चुनौतीपूर्ण होगा। भारत ने अब तक जितने भी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं, उनमें से किसी भी व्यापारिक साझेदार के लिए डेयरी क्षेत्र को नहीं खोला है। भारत ने अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों को शुल्क रियायत देने पर अपना रुख कड़ा कर लिया है।

दो अप्रैल को अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त 26 प्रतिशत जवाबी शुल्क लगाया था, लेकिन इसे 90 दिनों के लिए निलंबित कर दिया था। हालांकि, अमेरिका द्वारा लगाया गया 10 प्रतिशत मूल शुल्क अभी भी लागू है। भारत अतिरिक्त 26 प्रतिशत शुल्क से पूरी छूट चाहता है। अमेरिका कुछ औद्योगिक वस्तुओं, वाहन, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों, वाइन और पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर शुल्क रियायतें चाहता है।


दूसरी ओर, भारत प्रस्तावित व्यापार समझौते में कपड़ा, रत्न और आभूषण, चमड़े के सामान, परिधान, प्लास्टिक, रसायन, झींगा, तिलहन, अंगूर और केले जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए शुल्क रियायतें चाहता है। दोनों देश इस साल सितंबर-अक्टूबर तक प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण के लिए बातचीत पूरी करने की उम्मीद कर रहे हैं। इस समझौते का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 191 अरब डॉलर से दोगुना करके 2030 तक 500 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।

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