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रेलवे ने दूर की 20 साल पुरानी अड़चन, प्रीमियम ट्रेनों में कर सकेंगे ज्यादा आरामदायक सफर
Mon, 24 Jun 2019 05:45 PM IST
Gaurav Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Gaurav Pandey
Updated Mon, 24 Jun 2019 05:45 PM IST
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भारतीय रेलवे
देश में जर्मन लिंक हॉफमैन बुश (एलएचबी) कोच आने के दो दशक बाद भारतीय रेलवे ने सफर के दौरान लगने वाले सभी झटकों से छुटकारा दिलाने का प्रबंध कर लिया है, जिन्हें यात्री सफर के दौरान प्रीमियम ट्रेनों में भी महसूस करते आए हैं।
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'दि इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार इसके समाधान के लिए ट्रेन के कोच को आपस में जोड़े रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण सेंटर बफर कपलर्स के नए संस्करण का इस्तेमाल किया जाएगा। रेलवे ने इस साल अप्रैल महीने तक सभी एलचएचबी कोच में इसे लगा दिया है। इसमें 42 राजधानी ट्रेन समेत 5000 से ज्यादा कोच शामिल हैं।
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बता दें कि राजधानी एक्सप्रेस जैसी एलएचबी कोच युक्त ट्रेनों में यात्रियों को झटकों का सामना करना पड़ता था। खासकर तेज गति पर और ब्रेक लगाते वक्त ये झटके काफी तेज हो जाते थे। इससे कई बार यात्रियों की चाय गिर जाती थी तो कई बार यात्री खुद सीट से गिर जाते थे।
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पिछले कई सालों से ऐसी शिकायतें आ रही थीं और इसका कारण कपलर्स में गड़बड़ी बताई जाती रही। इसका कोई समाधान नहीं मिल पा रहा था। कपलर्स के अस्थायित्व की वजह से सुरक्षा का मुद्दा भी सामने था।
इस मुद्दे को संसद के दोनों सदनों में और इसकी समितियों में भी पेश किया गया था। रोलिंग स्टॉक रेलवे बोर्ड सदस्य राजेश अग्रवाल ने बताया कि रेलवे इस समस्या के समाधान को 10-15 साल से तलाश रहा था।
उन्होंने कहा कि रिसर्च, डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (आरडीएसओ), जोन और बोर्ड में रोलिंग स्टॉक की टीम ने डिजाइन और तकनीक आदि की समीक्षा की और मिशन मोड पर काम किया। नवंबर 2018 में शुरू हुए इस काम को छह महीने में खत्म करने का लक्ष्य रखा गया था। उन्होंने कहा कि राजधानी और शताब्दी सहित प्रीमियम ट्रेनों को जनवरी तक पूरा करने की प्राथमिकता दी गई थी।
अग्रवाल ने कहा, 'यह काम अब पूरा हो गया है। ड्राइवरों को परामर्श दिया जा रहा है कि 30 किलोमीटर प्रतिघंटा से ज्यादा की रफ्तार होने पर पुनर्योजी ब्रेक (रिजेनरेटिव ब्रेक) या डायनामिक ब्रेक का इस्तेमाल करें। भविष्य के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस में अर्ध-स्वाचिलत कपलिंग का इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही है।'