विदेश सचिव का चीन को संदेश: संप्रभुता का सम्मान करो, भारत की तरक्की खतरा नहीं
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत और चीन के बीच बढ़ती असहजता को लेकर भारत ने दो-टूक कहा है कि वह भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता का सम्मान करे। भारत ने चीन की सरकार को आश्वस्त किया है कि भारत का विकास चीन के लिए नुकसानदायक नहीं है। विदेश सचिव एस. जयशंकर ने सार्क में ‘बाधा डालने’ के लिए पाकिस्तान की आलोचना की और कहा कि एक सदस्य देश की असुरक्षा के कारण क्षेत्रीय समूह ‘अप्रभावी’ बन गया है।
विदेश सचिव जयशंकर ने आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘सबसे गंभीर खतरा’ बताते वैश्विक स्तर पर इस खतरे से निपटने में समन्वय नहीं होने पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत है ताकि यह बड़ी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। रायसीना सम्मेलन को संबोधित करते हुए विदेश सचिव एस. जयशंकर ने पीओके होकर गुजरने वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
उन्होंने कहा कि इसे लेकर भारत की नाराजगी पर चीन को सोचना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘चीन ऐसा देश है जो अपनी संप्रभुता को लेकर काफी संवेदनशील है, इसलिए हम उम्मीद कर सकते हैं कि उसे दूसरों की संप्रभुता को भी समझना चाहिए।’ विदेश सचिव का बयान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान के एक दिन बाद आया है जिसमें प्रधानमंत्री ने कहा था कि दोनों पक्षों को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और एक-दूसरे की मुख्य चिंताओं और हितों का सम्मान करना चाहिए। मोदी ने कल कहा था कि संबद्ध देशों की संप्रभुता का सम्मान कर ही क्षेत्रीय संपर्क मार्ग को पूरा करते हुए ‘मतभेद व कलह’ से बचा जा सकता है।
जयशंकर ने कहा कि ‘हम चीन को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि हमारी प्रगति चीन के विकास के लिए नुकसानदायी नहीं है। ठीक इसी तरह से चीन की प्रगति भी भारत के लिए चिंता की बात नहीं है।’ उन्होंने कहा कि सीपीईसी ‘उस जगह से गुजरता है जिसे हम पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर कहते हैं और जो भारत का क्षेत्र है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है।’उन्होंने कहा कि परियोजना को भारत की सलाह के बिना ही शुरू किया गया और इसलिए इसको लेकर संवेदनशीलता और चिंताएं स्वाभाविक हैं।
भारतीय हितों के खिलाफ नहीं अमेरिका-रूस के सुधरते संबंध
जयशंकर ने डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति पद के लिए निर्वाचन का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका और रूस के संबंध काफी बदल सकते हैं, जो 1945 के बाद से नहीं देखे गए हैं।
इसके प्रभाव का अनुमान लगाना फिलहाल कठिन है। विदेश सचिव ने कहा कि अमेरिका और रूस दोनों देशों के साथ भारत के संबंध प्रगति पर हैं और अमेरिका-रूस के बीच सुधरते संबंध भारतीय हित के खिलाफ नहीं है।
चीन के साथ समझौते पर जयशंकर ने कहा कि खासकर व्यवसाय और लोगों के बीच संपर्क वाले क्षेत्रों में संबंध बढ़ रहे हैं, लेकिन कुछ राजनीतिक मुद्दों पर मतभेद के चलते ये कम प्रभावी दिखते हैं। जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि सामरिक बातचीत से पीछे नहीं हटें।’