फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Indian Navy dismissed fighter plane Tejas 

‘मेक इन इंडिया’ को झटका, नौसेना ने तेजस को किया खारिज

Tue, 14 Feb 2017 10:51 PM IST
एजेंसी/ बंगलूरू/ नई दिल्ली
एजेंसी/ बंगलूरू/ नई दिल्ली Updated Tue, 14 Feb 2017 10:51 PM IST
विज्ञापन
Indian Navy dismissed fighter plane Tejas 
- फोटो : PTI

भारतीय नौसेना ने स्वदेश निर्मित लड़ाकू विमान तेजस को भारी-भरकम बताकर खारिज कर दिया है। नौसेना अब अपनी रक्षा प्रणाली की क्षमता बढ़ाने के लिए विदेशी लड़ाकू विमान की तलाश कर रही है। भारतीय रक्षा उद्योग के विकास और ‘मेक इन इंडिया’ मुहिम के लिए यह एक बड़ा झटका है। 

विज्ञापन


नौसेना ने पिछले महीने ही अपने लड़ाकू विमानवाहक के बेड़े में 57 विमान शामिल करने के लिए निर्माताओं को आमंत्रित किया था। अरबों डॉलर के इस ऑर्डर से सरकार को उम्मीद थी कि 33 वर्षों की मेहनत से स्वदेश निर्मित लड़ाकू विमान तेजस के निर्माताओं को बल मिलेगा। भारत, दक्षिण कोरिया, ताइवान और अन्य एशियाई देशों के खरीदार इस वर्ष स्वदेशी लड़ाकू विमान विकसित करने के प्रयासों में तेजी आने की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां इस क्षेत्र में कम दिलचस्पी दिखा रही हैं। 
विज्ञापन


 

लड़ाकू विमान तेजस का निर्माण अब भी जारी है

Indian Navy dismissed fighter plane Tejas 

विशेषज्ञों का कहना है कि अत्याधुनिक लड़ाकू विमान बनाने की उनकी आकांक्षाएं अब भी दशकों पीछे हैं क्योंकि इन देशों को प्रौद्योगिकी में महारत हासिल करने के लिए अभी और समय लगेगा। सिंगापुर में एस. राजरत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के रिचर्ड ए. बिजिंगर बताते हैं कि यह ऊंची महत्वाकांक्षा और छोटी सफलता का मामला है। ऐसा टेक्नो राष्ट्रवाद के कारण हो रहा है। ये सभी देश खुद को उभरती शक्तियां मानने लगे हैं। 

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत वैज्ञानिक मंगलवार को बंगलूरू में एयर शो के दौरान तेजस के करतब दिखाने वाले हैं। लेकिन इस लड़ाकू विमान का निर्माण अब भी जारी है और सिर्फ तीन विमान वायुसेना में शामिल हो पाए हैं। 

भारतीय रक्षा वैज्ञानिक नौसेना के इस फैसले से हताश

Indian Navy dismissed fighter plane Tejas 

इंडोनेशिया के सहयोग से दक्षिण कोरिया ने अरबों डॉलर की लागत से दोहरे इंजन वाले केएफ-एक्स लड़ाकू विकसित करने की योजना बनाई है जबकि ताइवान ने इसी महीने कहा है कि उसने 66 ऐसे जेट प्रशिक्षु विमान बनाने की योजना बनाई है जो लड़ाकू विमान बनाने में मददगार साबित होंगे।

भारतीय लड़ाकू विमान को वायुसेना में शामिल किए जाने की योजना 1994 से लंबित है जिसे सरकार ने 1983 में ही हरी झंडी दे दी थी। भारतीय वैज्ञानिक तभी से इंजन सहित विश्व का सबसे आधुनिक और हल्का लड़ाकू विमान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। 

दिसंबर में नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने कहा था कि समुद्र से छोड़े जाने वाले विमान मानकों पर खरे नहीं उतर पाए हैं और हथियार लादने के बाद यह विमानवाहक जहाज से उड़ान नहीं भर सकता। नौसेना के एक सूत्र का कहना है कि यह विमान वर्षों से हथियारों के साथ 200 मीटर के विमानवाहक डेक से उड़ान भरने में विफल रहा है।

इस वजह से नौसेना को पिछले महीने इसकी भरपाई के लिए एक विदेशी लड़ाकू विमान का अनुरोध करना पड़ा। भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों का कहना है कि वे नौसेना के इस फैसले से हताश हैं और लड़ाकू विमान का विकास हर कदम पर चुनौतीपूर्ण हो गया है।  

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed