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आईसीएमआर ने बनाई एंटीजन-आधारित कोविड-19 परीक्षण को बढ़ाने की योजना

Mon, 29 Jun 2020 08:31 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 29 Jun 2020 08:31 AM IST
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indian govt planning to expand use of rapid antigen based Covid 19 tests, ICMR advise states about it
स्वैब नमूना लेता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

सरकार रैपिड एंटीजन-आधारित कोविड-19 परीक्षणों के उपयोग का विस्तार करने की योजना बना रही है। वहीं देश में बढ़ते कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए देश के शीर्ष बायोमेडिकल रिसर्च बॉडी ने राज्यों को वायरस का पता लगाने के लिए आरटी-पीसीआर परीक्षण की बजाए आसान तरीके का उपयोग करने की सलाह दी है।

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भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा रैपिड एंटीजन आधारित परीक्षण देश में जारी संक्रमण का जल्दी पता लगाने में मदद कर सकते हैं। नाम न बताने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, ‘यही कारण है कि यह एक अच्छा उपकरण है जिसका उपयोग आरटी-पीसीआर परीक्षण कोविड-19 के निदान के लिए किया जा सकता है।’
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अधिकारी ने आगे कहा, ‘आरटी-पीसीआर कोरोना का पता लगाने के लिए सबसे बेहतर है लेकिन इसके विश्लेषण के लिए एक उचित जैव सुरक्षा लेवल 2 प्रयोगशाला की आवश्यकता है। वहीं एंटीजन आधारित परीक्षण रैपिड पाइंट ऑफ केयर परीक्षण है जिसे की मौके पर एक जैव सुरक्षा खतरा पैदा किए बिना आसानी से किया जा सकता है क्योंकि यह लाइव वायरस का विश्लेषण नहीं करता है।’
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ये परीक्षण किसी व्यक्ति के मुंह या नाक के स्वैब में किसी विदेशी पदार्थ (फॉरेन सब्सटेंस) की उपस्थिति का पता लगाते हैं जो एंटीबॉडी के उत्पादन को बढ़ावा देता है और इसलिए संक्रमण का पता लग जाता है। लेकिन ये गैर-पुष्टिकरण परीक्षण हैं। इसका मतलब यह है कि जो लोग रैपिड एंटीजन परीक्षण के जरिए पॉजिटिव पाए जाते हैं उन्हें कोविड-19 के लिए पॉजिटिव माना जा सकता है लेकिन जिन लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है उन्हें पुष्टि के लिए आरटी-पीसीआर परीक्षण करवाना चाहिए।

आपरटी-पीसीआर या रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पोलीमरेज चेन रिएक्शन सार्स-कोव-2 वायरस के आनुवंशिक सामग्री का परीक्षण करता है। लेकिन आरटी-पीसीआर परीक्षण विश्लेषण के लिए एक विशेष प्रयोगशाला की आवश्यकता के कारण व्यापक उपलब्धता के संदर्भ में सीमित है और इसके जरिए परिणाम मिलने में लगभग पांच घंटे का समय लग जाता है। बता दें कि दिल्ली पहला राज्य था जिसने एंटीजन-आधारित परीक्षण शुरू किया क्योंकि कोविड-19 मामले पिछले दो हफ्तों में बढ़ गए थे।

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