फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Indian defence officers impressed with US drone attack technology

अमेरिकी ड्रोन हमले के कायल हुए रक्षा मंत्रालय के अफसर, ईरान के सारे हथियार हुए फेल!

Fri, 10 Jan 2020 07:39 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 10 Jan 2020 07:39 PM IST
विज्ञापन
Indian defence officers impressed with US drone attack technology
US drone strike
अमेरिका और ईरान के बीच में फिलहाल सैन्य टकराव के आधार शिथिल पड़ गए हैं, लेकिन अपने-अपने स्तर की गुर्राहट जारी है। अब दुनिया के तमाम देश दोनों देशों के बीच में शांति बहाली के प्रयास में लग गए हैं।
विज्ञापन


लेकिन सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों में युद्ध की नौबत आती, तो ईरान के लिए अमेरिका की छींकभर झेलना भारी पड़ जाता। सैन्य शक्ति के मुकाबले  में अमेरिका के सामने ईरान कहीं नहीं ठहरता। पहला बड़ा फर्क तो यही है कि ईरान के पास अमेरिकी हमले में खुद के बचाव का कोई प्रतिरक्षी हथियार नहीं है।

विज्ञापन

भारतीय रक्षा मंत्रालय के अधिकारी भी हैरान

अमेरिका ने ईरान के सैन्य कमांडर जनरल सुलेमानी, उनके डिप्टी चीफ और अन्य पर हमले के लिए जिस ड्रोन तकनीक का उपयोग किया, उसे देखकर भारतीय रक्षा मंत्रालय के अधिकारी भी दांतों तले अंगुली दबा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन


डीआरडीओ के साथ मिलकर देश के लिए सबसे अत्याधुनिक 150 एमएम और 52 कैलिबर की तोप बनाने वाले भारत फोर्ज और कल्याणी समूह के चेयरमैन बाबासाहब नीलकंठ कल्याणी का भी कहना है कि अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर का यह बेहतरीन उदाहरण है।

पूर्व एयरवाइस मार्शल एनबी सिंह का कहना है कि मानव रहित विमान से अमेरिका ने जिस तरह से हवाई हमला करके जनरल कासिम समेत उनके काफिले को नुकसान पहुंचाया है, यह अमेरिका की ताकत का एक नमूना है। इससे पता चलता है कि अमेरिकी सैन्य शक्ति किस तरह से आगे बढ़ रही है।

रक्षा मामलों के वरिष्ठ पत्रकार रंजीत कुमार बताते हैं कि अभी तक अमेरिका पहले से निर्धारित ठिकाने पर मानव रहित विमानों से हमला करता रहा। यह अमेरिकी सैन्य मारक क्षमता और उसकी सटीकता का शानदार उदाहरण है।

ईरान के पास बचाने वाले हथियार नहीं

सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान ने पिछले कुछ समय में अपनी सैन्य क्षमता को बहुत बढ़ाया है। उसके पास इलेक्ट्रानिक वार फेयर, कंप्यूटर हैकिंग, साइबर अटैक में क्षमता हासिल की है। उसके पास छोटी, मध्यम, कुछ लंबी दूरी की मिसाइलें भी हैं, लेकिन तेहरान और ईरान के सैन्य बेस पर होने वाले मिसाइल, एयरक्राफ्ट आदि के हमलों से बचाव का समुचित इंतजाम नहीं है।

बताते हैं इराक के पास यह क्षमता नहीं थी और उसकी स्कड मिसाइलों को अमेरिका ने आसमान में ही ध्वस्त कर दिया था। इस तरह की स्थिति का असर युद्ध छिड़ जाने पर सैन्य मनोबल पर सीधा पड़ता है। जबकि अमेरिका की आक्रमण और रक्षा दोनों ही पंक्ति बहुत मजबूत है।

अमेरिका के रेड-फ्लैग जैसे प्रतिष्ठित युद्धाभ्यास को देख चुके एक सैन्य सूत्र का कहना है कि दोनों की कोई तुलना नहीं है। अमेरिका के पास पांचवी पीढ़ी का लड़ाकू विमान, उन्नत मिसाइलों, यूएवी, फाइटरजेट्स, एयरक्राफ्ट कैरियर, फ्रिगेट, डिस्ट्रॉयर का जखीरा है। उसके सामने ईरान जैसे देश कहीं नहीं ठहरते।

फिर क्या है ईरान की ताकत?

पूर्व सैन्य अधिकारियों का कहना है कि ईरान की सबसे बड़ी ताकत अमेरिकी दादागिरी के खिलाफ खड़े होना है। इससे दुनिया में अमेरिका की किरकिरी होती है। दूसरी ताकत सहयोगी देशों, भौगोलिक परिस्थितियों समेत अन्य की होती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed