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Indian Army: भारतीय सेना खुद को कर रही भविष्य के लिए तैयार, 250 फ्यूचर रेडी डिफेंस टेक्नोलॉजी पर कर रही काम
Sat, 10 Aug 2024 07:10 PM IST
पवन पांडेय
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 10 Aug 2024 07:10 PM IST
सार
Indian Army: भारतीय सेना का आर्मी डिजाइन ब्यूरो (एडीबी) भारत के टॉप एकेडमिक एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस, रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूशंस और स्टार्ट-अप्स के साथ मिल कर अपने ऑपरेशनल फ्रेमवर्क में स्वदेशी टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है।
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भारतीय सेना खुद को कर रही भविष्य के लिए तैयार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारतीय सेना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल को आगे बढ़ाने के लिए कई नई योजनाओं पर काम कर रही है। सेना को पूरा जोर इन दिनों टेक्नोलॉजी पर है। इसके लिए सेना का आर्मी डिजाइन ब्यूरो (एडीबी) भारत के टॉप एकेडमिक एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस, रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूशंस और स्टार्ट-अप्स के साथ मिल कर अपने ऑपरेशनल फ्रेमवर्क में स्वदेशी टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। वहीं इस सहयोग के जरिए न केवल सेना इनोवेशंस को बढ़ावा दे रही है, बल्कि अपनी तकनीकी क्षमता को भी मजबूत कर रही है।
आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने 250 संस्थानों से किया करार
सेना की तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने अपने-अपने फील्ड के विशेषज्ञों को भी अपने साथ जोड़ा है। इसके लिए आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने देश भर में 200 से अधिक टॉप एकेडमिक टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूशंस और 50 प्रमुख रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूशंस के साथ करार किया है। इसका सेना को बड़ा फायदा यह हुआ है कि टेक्नोलॉजी इनोवेशंस हब (टीआईएच) बनाने से डुअल यूज टेक्नोलॉजी को लेकर सेना की समझ और गहरी हुई है।
शिक्षण संस्थान भेज रहे प्रपोजल
वहीं, सेना की इस सफल पहल के अब सकारात्मक परिणाम भी आने शुरू हो गए हैं। 15 फरवरी 2023 को रक्षा मंत्री की तरफ से जारी कंपोडियम ऑफ प्रॉब्लम डेफिनेशंस स्टेटमेंट्स (सीपीडीएस) के छठे एडिशन को काफी वाहवाही मिली थी। जबकि पिछले संस्करणों में शिक्षा जगत से केवल 30-40 प्रतिक्रियाएं मिली थीं। लेकिन इस साल 478 प्रतिक्रियाएं मिलीं, जिनमें से रिकॉर्ड तोड़ 210 प्रतिक्रियाएं अकेले शैक्षणिक संस्थानों से मिलीं। इसके अलावा, शिक्षा जगत ने भी सेना के साथ मिल कर रिसर्च एंड डेवलपमेंट में अपनी रूचि दिखाई है। शिक्षा जगत ने खुद से प्रेरित हो कर लगभग 35 रिसर्च एंड डेवलपमेंट के प्रपोजल्स दिए हैं, जिनकी संख्या पहले मात्र 5 से 10 के आसपास ही होती थी।
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आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड भी नहीं है पीछे
सेना ने बताया कि आर्मी डिजाइन ब्यूरो के अलावा, आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड (एटीबी) ने भी इस पहल को आगे बढ़ाने में अहम साझेदारी निभाई है। प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिल कर एटीबी ने अपने रिसर्च प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो को भी काफी आगे बढ़ाया है। 2022 में एटीबी के पास जहां केवल 17 प्रोजेक्ट थे, तो वहीं अब 13 तकनीकी क्षेत्रों में 62 प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिसमें रैमजेट प्रोजेक्टाइल, लो लाइट इमेजिंग और सेंसर फ़्यूज़्ड म्यूनिशन आदि शामिल हैं। लगभग 228 करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं में 23 शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। वहीं, आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड की बैठकें भी जल्दी-जल्दी हो रही हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 25वें एडिशन का आयोजन 24वें के ठीक छह महीने बाद किया गया।
सेना के मुताबिक सेना की सातों कमानों में स्वदेशीकरण और अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। स्वदेशीकरण और अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं की संख्या 2022 में 18 से बढ़कर 176 हो गई है, जिसकी लागत 59 करोड़ रुपये है, जिसमें 14 शैक्षणिक प्रौद्योगिकी संस्थान शामिल हैं।
भारतीय सेना में इनोवेशंस को बढ़ावा
इसके अलावा सेना अपने सैन्य कर्मियों को भी इनोवेशन के लिए प्रेरित कर रही है। सेना कर्मियों की बनाए गए इनोवेशंस को आगे बढ़ाने में शिक्षाविदों के साथ साझेदारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जो पहले लोवर टेक्नोलॉजी रेडिनेस लेवल था, अब शैक्षिक संस्थानों की मदद से वह बढ़ कर फील्ड इंडक्शन के स्तर तक पहुंच चुका है। मौजूता समय में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों की मदद से चार ऐसे इनोवेंशस को बढ़ाया जा रहा है, जो इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सेना में इनोवेशंस का कल्चर डेवलप किया जा रहा है।
आईआईटी में इंडियम आर्मी सेल्स
सूत्रों ने बताया कि आईआईटी दिल्ली, आईआईटी कानपुर और आईआईएससी बेंगलुरु जैसे प्रमुख संस्थानों में इंडियम आर्मी सेल्स बनाना बेहद पायदेमंद रहा है। ये सेल्स अब सेना मुख्यालय और फील्ड फॉर्मेशंस दोनों के साथ मिल कर 23 अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा सेना ने प्रमुख सरकारी कंपनियों के साथ भी अपने सहयोग को मजबूत किया है। 15 मार्च 2024 को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के साथ हुए करार के बाद सेना को विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के 81 डोमेन एक्सपर्ट्स की तकनीकी विशेषज्ञता हासिल हुई है।
स्पेशल पर्पज व्हीकल बनाने की तैयारी
28 मई 2024 को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सीडीएसी) के साथ हुए करार के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए एक स्पेशल पर्पज व्हीकल बनाया जाएगा। इसके अलावा, सेना ने पिछले तीन सालों में एआई, साइबर सुरक्षा और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में व्यापक सहयोग के लिए शैक्षणिक और अनुसंधान एवं विकास संस्थानों के साथ 38 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। कुपवाड़ा, सिक्किम और लेह जैसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में फॉरवर्ड एरिया टूर भी एकेडेमिशियंस के लिए आयोजित किए गए हैं। वर्तमान में 230 से अधिक प्रोजेक्ट्स भारत की रक्षा को क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं।
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आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने 250 संस्थानों से किया करार
सेना की तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने अपने-अपने फील्ड के विशेषज्ञों को भी अपने साथ जोड़ा है। इसके लिए आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने देश भर में 200 से अधिक टॉप एकेडमिक टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूशंस और 50 प्रमुख रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूशंस के साथ करार किया है। इसका सेना को बड़ा फायदा यह हुआ है कि टेक्नोलॉजी इनोवेशंस हब (टीआईएच) बनाने से डुअल यूज टेक्नोलॉजी को लेकर सेना की समझ और गहरी हुई है।
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शिक्षण संस्थान भेज रहे प्रपोजल
वहीं, सेना की इस सफल पहल के अब सकारात्मक परिणाम भी आने शुरू हो गए हैं। 15 फरवरी 2023 को रक्षा मंत्री की तरफ से जारी कंपोडियम ऑफ प्रॉब्लम डेफिनेशंस स्टेटमेंट्स (सीपीडीएस) के छठे एडिशन को काफी वाहवाही मिली थी। जबकि पिछले संस्करणों में शिक्षा जगत से केवल 30-40 प्रतिक्रियाएं मिली थीं। लेकिन इस साल 478 प्रतिक्रियाएं मिलीं, जिनमें से रिकॉर्ड तोड़ 210 प्रतिक्रियाएं अकेले शैक्षणिक संस्थानों से मिलीं। इसके अलावा, शिक्षा जगत ने भी सेना के साथ मिल कर रिसर्च एंड डेवलपमेंट में अपनी रूचि दिखाई है। शिक्षा जगत ने खुद से प्रेरित हो कर लगभग 35 रिसर्च एंड डेवलपमेंट के प्रपोजल्स दिए हैं, जिनकी संख्या पहले मात्र 5 से 10 के आसपास ही होती थी।
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आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड भी नहीं है पीछे
सेना ने बताया कि आर्मी डिजाइन ब्यूरो के अलावा, आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड (एटीबी) ने भी इस पहल को आगे बढ़ाने में अहम साझेदारी निभाई है। प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिल कर एटीबी ने अपने रिसर्च प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो को भी काफी आगे बढ़ाया है। 2022 में एटीबी के पास जहां केवल 17 प्रोजेक्ट थे, तो वहीं अब 13 तकनीकी क्षेत्रों में 62 प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिसमें रैमजेट प्रोजेक्टाइल, लो लाइट इमेजिंग और सेंसर फ़्यूज़्ड म्यूनिशन आदि शामिल हैं। लगभग 228 करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं में 23 शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। वहीं, आर्मी टेक्नोलॉजी बोर्ड की बैठकें भी जल्दी-जल्दी हो रही हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 25वें एडिशन का आयोजन 24वें के ठीक छह महीने बाद किया गया।
सेना के मुताबिक सेना की सातों कमानों में स्वदेशीकरण और अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। स्वदेशीकरण और अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं की संख्या 2022 में 18 से बढ़कर 176 हो गई है, जिसकी लागत 59 करोड़ रुपये है, जिसमें 14 शैक्षणिक प्रौद्योगिकी संस्थान शामिल हैं।
भारतीय सेना में इनोवेशंस को बढ़ावा
इसके अलावा सेना अपने सैन्य कर्मियों को भी इनोवेशन के लिए प्रेरित कर रही है। सेना कर्मियों की बनाए गए इनोवेशंस को आगे बढ़ाने में शिक्षाविदों के साथ साझेदारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जो पहले लोवर टेक्नोलॉजी रेडिनेस लेवल था, अब शैक्षिक संस्थानों की मदद से वह बढ़ कर फील्ड इंडक्शन के स्तर तक पहुंच चुका है। मौजूता समय में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों की मदद से चार ऐसे इनोवेंशस को बढ़ाया जा रहा है, जो इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सेना में इनोवेशंस का कल्चर डेवलप किया जा रहा है।
आईआईटी में इंडियम आर्मी सेल्स
सूत्रों ने बताया कि आईआईटी दिल्ली, आईआईटी कानपुर और आईआईएससी बेंगलुरु जैसे प्रमुख संस्थानों में इंडियम आर्मी सेल्स बनाना बेहद पायदेमंद रहा है। ये सेल्स अब सेना मुख्यालय और फील्ड फॉर्मेशंस दोनों के साथ मिल कर 23 अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा सेना ने प्रमुख सरकारी कंपनियों के साथ भी अपने सहयोग को मजबूत किया है। 15 मार्च 2024 को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के साथ हुए करार के बाद सेना को विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के 81 डोमेन एक्सपर्ट्स की तकनीकी विशेषज्ञता हासिल हुई है।
स्पेशल पर्पज व्हीकल बनाने की तैयारी
28 मई 2024 को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सीडीएसी) के साथ हुए करार के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए एक स्पेशल पर्पज व्हीकल बनाया जाएगा। इसके अलावा, सेना ने पिछले तीन सालों में एआई, साइबर सुरक्षा और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में व्यापक सहयोग के लिए शैक्षणिक और अनुसंधान एवं विकास संस्थानों के साथ 38 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। कुपवाड़ा, सिक्किम और लेह जैसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में फॉरवर्ड एरिया टूर भी एकेडेमिशियंस के लिए आयोजित किए गए हैं। वर्तमान में 230 से अधिक प्रोजेक्ट्स भारत की रक्षा को क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं।
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