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आतंकवाद पर इन तर्कों के जरिए भारत कर देगा चीन और पाकिस्तान की बोलती बंद

Wed, 20 Mar 2019 07:16 PM IST
संदीप भट्ट जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संदीप भट्ट Updated Wed, 20 Mar 2019 07:16 PM IST
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India will make Pakistan and china talk not of terrorism through these arguments

पाकिस्तान के आतंकी संगठनों को कौन, कहां से और किस तरह मदद कर रहा है, भारतीय जांच एजेंसियां अब इस मामले की तह तक पहुंच गई हैं। एनआईए, ईडी और रॉ जैसी एजेंसियों ने पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तानी उच्चायोग आईएसआई आतंकी संगठन के नेक्सस को तोड़ दिया है। पीएमओ और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के कार्यालय को सौंपी गई एक विशेष रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि कश्मीर में आतंकियों को धन, वीजा और पासपोर्ट जैसी सुविधाएं पाकिस्तानी उच्चायोग की मदद से मुहैया कराई जा रही हैं। इतना ही नहीं, पिछले दो साल में आईएसआई और पाकिस्तानी उच्चायोग के जरिए कश्मीर में आतंकियों तक धन पहुंचाने वालों का भी पता लगा लिया गया है। आतंकवाद पर इन तर्कों के जरिए भारत अब यूएन में चीन-पाकिस्तान की बोलती बंद कर देगा।

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बता दें कि पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र संगठन की सुरक्षा परिषद में जब पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए प्रस्ताव लाया गया तो चीन ने उसे यह कह कर गिरा दिया कि इस मामले में अभी कुछ और ठोस सबूतों की जरूरत है।
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भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने अब आतंकी संगठनों में पाकिस्तान की सीधी भूमिका को लेकर ठोस सबूत एकत्रित कर लिए हैं। यूएन सुरक्षा परिषद में रखने के लिए इस बार जो रिपोर्ट तैयार हो रही है कि उसमें पाकिस्तानी उच्चायोग, आईएसआई और आतंकी संगठन, इन तीनों के नापाक गठजोड़ का खुलासा किया गया है। इतना ही नहीं, आतंक के इस गठजोड़ की कठपुतली बने कश्मीर के तीन दर्जन से ज्यादा अलगाववादियों का जिक्र भी उक्त रिपोर्ट में किया गया है।
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पुलवामा और दूसरे आतंकी हमलों की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी, प्रवर्तन निदेशालय, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों द्वारा अलग-अलग समय पर दी गई रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तान ही कश्मीर व दूसरे हिस्सों में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। एनआईए और ईडी की पूछताछ में भी सामने आया है कि अलगाववादियों की मदद से आतंकियों को धन मुहैया कराया जाता है।

रिपोर्ट में पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारियों के नाम भी

India will make Pakistan and china talk not of terrorism through these arguments
चीन और पाकिस्तान

खास बात है कि इस बार भारतीय एजेंसियों ने आतंकियों के हमदर्द बने पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारियों के नामों का जिक्र भी किया है। दो साल पहले भी एनआईए ने अपनी चार्जशीट में साफ तौर पर यह बात कही थी कि पाकिस्तानी उच्चायोग के जरिए आतंकियों को धन व दूसरी मदद पहुंचाई जा रही है।

इस बार रॉ व एनटीआरओ जैसी खुफिया इकाईयों के जरिए यह पता लगाया गया है कि पाकिस्तानी उच्चायोग में वे कौन से अधिकारी हैं, जो सीधे तौर पर आतंकियों व अलगाववादियों से जुड़े हैं। अलगाववादियों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि पाकिस्तान की आईएसआई और उच्चायोग की मदद से धन कश्मीर में पहुंचता है। दुबई में पाकिस्तान के आतंकी संगठनों के मददगार दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास के जरिए धन भेजते रहे हैं। हालांकि यह धन विभिन्न संस्थाओं के नाम पर आता है।

वजह, भारतीय एजेंसियों को शक न हो, इसके लिए पाकिस्तानी उच्चायोग की मदद ली जाती है। यहां से उस धन को आतंकियों तक पहुंचाने वाले लोगों, जिनमें अलगाववादी शामिल हैं, के हवाले कर दिया जाता है। करीब तीन दर्जन अलगाववादी एनआईए और ईडी के रडार पर हैं। एनआईए के एक अधिकारी का दावा है कि बहुत जल्द कई अलगाववादी नेता पुलिस की हिरासत में होंगे। इनके खिलाफ जांच एजेंसी के पास पर्याप्त सबूत हैं।

कस रहा है आतंकी संगठनों पर शिकंजा

आतंकी फंडिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाउद्दीन की जम्मू-कश्मीर में 13 संपत्तियों को जब्त कर लिया है। फिलहाल सलाउद्दीन पाकिस्तान के रावलपिंडी में रहता है। ईडी ने कहा कि सलाउद्दीन, शाह और अन्य के खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत दायर किए गए आरोप पत्र पर संज्ञान लेने के बाद धनशोधन का आपराधिक मामला दर्ज किया था।

इससे पहले जांच में सामने आया था कि आतंकवादी हाफिज सईद के कथित कैशियर अहमद शाह वटाली जो कि कश्मीर में व्यवसाय करते थे, हुर्रियर एवं दूसरे अलगाववादी संगठनों की मदद से आतंकियों व पत्थरबाजों को आगे लाने के लिए धन मुहैया कराते रहे हैं।वटाली अभी तिहाड़ जेल में हैं। इसके अलावा एनआईए ने 26 फरवरी को कई अलगाववादी नेताओं के ठिकानों पर छापे मारे थे।

इनमें जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के चेयरमैन यासीन मलिक, जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी के अध्यक्ष शब्बीर शाह,अवामी एक्शन कमेटी के चेयरमैन मीरवायज उमर फारुख, तहरीक-ए-हुर्रियत के चेयरमैन मोहम्मद अशरफ खान, एपीएचसी के महासचिव मशरत आलम, जेकेएसएम के चेयरमैन जफर अकबर भट्ट और सैयद अली गिलानी के पुत्र नसीम गिलानी शामिल हैं।

इनके कब्जे से कई अहम दस्तावेज, जिनमें प्रॉपर्टी पेपर, बैंक स्टेटमेंट व रुपयों के लेन-देन से संबंधित अन्य कागजात आदि बरामद किए गए हैं। कुछ लैपटॉप, ई-टेबलेट, मोबाइल फोन, पेनड्राइव और डीवीआर सिस्टम भी मिले हैं।जांच एजेंसी ने इन नेताओं के घर-दफ्तरों से कई आतंकवादी संगठनों के लैटर हैड और पाकिस्तान के शिक्षण संस्थानों में दाखिले के लिए वीजा फॉर्म भी बरामद किए गए हैं। इतना ही नहीं, मीरवायज उमर फारुख के निवास से हाईटेक इंटरनेट संचार उपकरण भी जांच एजेंसी के हाथ लगे हैं।

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