पहाड़ पर उलझे चीन को समुद्र में घेरेगा भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ करेगा युद्धाभ्यास
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लद्दाख के पहाड़ों पर उलझे चीन को भारत समुद्र में घेरने की तैयारी में है। हालांकि विवाद को सुलझाने के लिए चीनी सेना पीछे जरूर हटी है, लेकिन भारत फिर भी चौंकन्ना है। चीन पर बनाए अपने दबाव को भारत किसी भी सूरत में कम नहीं करना चाहता है। इसलिए भारत ने मालाबार नौसेना अभ्यास में शामिल होने के लिए ऑस्ट्रेलिया को आमंत्रित करने की योजना बनाई। अबतक इस युद्धाभ्यास में अमेरिका और जापान की नौसेनाएं ही भारतीय नौसेना के साथ मिलकर हिस्सा लेती रही हैं। भारत की तरह ही ऑस्ट्रेलिया के साथ चीन के रिश्ते पिछले कुछ महीनों में बिगड़े हैं।
ऑस्ट्रेलिया को मालाबार अभ्यास में शामिल कर नई दिल्ली बीजिंग को कड़ा संदेश देने की कोशिश में है। भारत और चीन के बीच पिछले चार दशक का सबसे गंभीर सीमा विवाद चल रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इस साल के आखिर में बंगाल की खाड़ी में भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाएं एक साथ युद्धाभ्यास करेंगी। समुद्र में इस संयुक्त युद्धाभ्यास को देखकर बीजिंग के खुराफाती दिमाग ठिकाने लग जाएंगे।
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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने कहा है कि जापान और अमेरिका से इस सिलसिले में बात चल रही है। दोनों देशों की सहमति के बाद अगले हफ्ते तक ऑस्ट्रेलिया को औपचारिक निमंत्रण भेज दिया जाएगा। वॉशिंगटन स्थित रैंड कॉर्पोरेशन के शोधकर्ता डेरेक ग्रॉसमैन ने कहा कि भारत में संभावित रूप से ऑस्ट्रेलिया का मालाबार में प्रवेश विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा। चीन लगातार इन चार देशों की नजदीकियों से परेशान है।
अलग-थलग पड़ने लगा है चीन
2004 में आई सुनामी के बाद ये चारों देश मदद के लिए इंडो-पैसिफिक में एक साथ आए थे। उसके बाद 2017 में फिर नजदीकियां बढ़ीं। कोरोना महामारी के फैलने के बाद से इन चार देशों के बीच संवाद और मजबूत स्थिति में पहुंचा है। इसके अलावा इन चारों देशों ने लगातार वियतनाम, दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड के साथ संपर्क साधा है। चीन को यह सब देखकर अब समझ गया है कि वो अलग-थलग पड़ने लगा है।
भारत और अमेरिका के बीच मालाबार युद्धाभ्यास की शुरुआत 1992 में हुई थी, लेकिन 2004 के बाद इसने रफ्तार पकड़ी। साल 2007 में जब पहली बार ऑस्ट्रेलिया ने इस ड्रिल में भारत, जापान, अमेरिका और सिंगापुर के साथ हिस्सा लिया था तो चीन ने आपत्ति जताई थी। मई में भारत और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्रियों ने लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट का एलान किया था। जिससे दोनों देशों को एक दूसरे के बंदरगाह इस्तेमाल कर सकते हैं। अमेरिका और भारत के बीच भी ऐसा ही समझौता है।