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क्या आप जानते हैं भारत को अकालों से बचाने वाले चमत्कारी चावल के बारे में?
एजेंसी/ नई दिल्ली
Updated Mon, 19 Dec 2016 03:26 AM IST
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चावल
- फोटो : AmarUjala
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आज नकदी की आपूर्ति सीमित होने की वजह से भारतीय कतारों में खड़े होने पर मजबूर हैं। आज से लगभग 60 साल पहले भी भारतीय कतारों में खड़े थे क्योंकि तब खाद्य आपूर्ति सीमित कर दी गई थी। चावल और गेहूं जैसे प्रमुख खाद्य पदार्थों की आपूर्ति कम थी। लोगों को कुछ किलोग्राम अनाज खरीदने के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता था।
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1950 के दशक में एशिया का अधिकांश हिस्सा भुखमरी के कगार पर था। तभी फिलीपींस में ‘इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (आईआरआरआई) के वैज्ञानिकों ने एक चमत्कारी पौधा विकसित किया, जिसने ‘दुनिया को बदलकर’ रख दिया। धान का यह छोटा पौधा आईआर-8 कहलाता था और इसने उत्पादन को दोगुना कर दिया।
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इस पौधे ने एक कृषि क्रांति ला दी, जिसने लाखों जिंदगियां बचा लीं। इसने भारत को धीरे-धीरे खाद्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के युग में प्रवेश कराया। आईआरआरआई के वैज्ञानिकों ने तब दो किस्म के धानों का आपस में मेल कराया। इनमें से एक धान इंडोनेशिया से था और दूसरा ताइवान से। तब एक नए पौधे ‘आईआर-8’ का जन्म हुआ, जिसने दुनिया को भुखमरी से निजात दिलाई।
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इस ‘चमत्कारी धान’ के बीजों को बिना किसी पेटेंट सुरक्षा के फिलीपींस, भारत और एशिया के अन्य हिस्सों में व्यापक स्तर पर मुफ्त में बांटा गया था। पूर्वी एशिया के किसानों ने तत्काल ही इसे अपना लिया