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सिर्फ 48 घंटे ही जी सकी भारत की पहली हर्लेक्विन बच्ची

Tue, 14 Jun 2016 02:33 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 14 Jun 2016 02:33 PM IST
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India's first Harlequin baby dies
नागपुर के लता मंगेशकर अस्पताल में पैदा हुई भारत की पहली हर्लेक्विन बच्ची का सोमवार को निधन हो गया। यह बच्ची जब पैदा हुई थी तो इसके शरीर पर स्किन ही नहीं थी। बच्ची के शरीर के अंदरूनी अंग साफ दिखाई दे रहे थे, जबकि बाहरी अंग अविकसित थे। बच्ची सिर्फ 48 घंटे ही जीवित रह सकी। 
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डाॅक्टरों ने जांच के बाद बताया था कि यह बच्ची हर्लेक्विन रोग से प्रभावित है। हर्लेक्विन दुर्लभ गंभीर किस्म का अनुवांशिक त्वचा रोग है, जिसके कारण बाहरी त्वचा की परत यानी ‘स्ट्रेटम कॉर्नियम’ मोटी हो जाती है। ऐसे मामलों में बच्चे का पूरा बदन त्वचा की मोटी सफेद प्लेटों के ‘कवच’ में लिपट जाता है। इसके अलावा, आंखें, कान, गुप्तांग और बाहरी हिस्से असामान्य तौर पर सिकुड़ जाते हैं।
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बचाया जा सकता था इस बच्ची को

India's first Harlequin baby dies
harlequin baby - फोटो : mid-day
डॉ. यश भारती के मुताबिक, वंशानुगत रोग के चलते यह बच्ची ऐसा पैदा हुई थी। अगर शुरुआत में ही बच्चे की मां ने जांच करायी होती तो शायद आज बच्ची जिन्दा होती।

डॉक्टरों ने बताया कि यह एक दुर्लभ चर्मरोग है, जो करीब 30 लाख में से एक बच्चे को होता है। डॉ. अविनाश के मुताबिक, इस तरह की बच्ची पूरी दुनिया में अबतक दो ही जगह पैदा हुई है। एक जर्मनी और दूसरी पाकिस्तान में। भारत में जन्मी इस तरह की भारत की पहली और दुनिया की तीसरी बच्ची है। डॉक्टरों ने कहा कि बच्ची को जीवित ना रहने का उन्हें दुख है।



 
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