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दवा उद्योग को राहत: आयात-रिसर्च लाइसेंसिंग से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव, एक दिन में चार बड़े फैसले

Sat, 27 Jun 2026 06:19 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 27 Jun 2026 06:19 AM IST
सार

भारत को वैश्विक फार्मा और हेल्थकेयर हब बनाने के लिए सरकार ने दवा और खाद्य उद्योग से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, जिनका मकसद अनुपालन का बोझ कम करना और निवेश व रिसर्च को बढ़ावा देना है। अब छोटी तकनीकी गलतियों पर आपराधिक कार्रवाई की जगह केवल जुर्माना लगेगा। पढ़िए रिपोर्ट-

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india pharma industry import research licensing rules major reforms four key decisions
मेडिकल और फूड इंडस्ट्री में बूम की तैयारी - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

भारत को वैश्विक फार्मा और हेल्थकेयर हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम बढ़ाया है। अस्पतालों और क्लिनिकों के लिए अनुपालन नियमों में राहत देने के बाद अब दवा और खाद्य उद्योग से जुड़े चार बड़े फैसले लिए गए हैं।
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इनमें छोटी तकनीकी गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना, आयातित दवाओं के नियम आसान बनाना, अनुसंधान एवं परीक्षण के लिए विदेश से दवा मंगाने की प्रक्रिया सरल करना और खाद्य कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ कम करना शामिल है। सरकार का कहना है कि इन सुधारों का उद्देश्य 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' बढ़ाना, मेडिकल और फार्मा इंडस्ट्री में निवेश आकर्षित करना, रिसर्च एवं इनोवेशन को गति देना और अनावश्यक कानूनी व नियामकीय बोझ कम करना है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुरक्षा, दवाओं की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों में किसी तरह की ढील नहीं दी गई है।
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छोटी गलती पर अब जेल नहीं, प्रशासनिक जुर्माना
जन विश्वास अधिनियम, 2026 के तहत दवा, कॉस्मेटिक और खाद्य कारोबारियों को बड़ी राहत दी गई है। रिकॉर्ड रखने में कमी, लेबलिंग की मामूली त्रुटि और अन्य तकनीकी एवं प्रक्रियागत उल्लंघनों पर अब आपराधिक मुकदमा नहीं चलेगा। ऐसे मामलों का निपटारा प्रशासनिक जुर्माने से होगा। हालांकि नकली, मिलावटी और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक उत्पादों पर पहले की तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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आयातित दवाओं के लिए बदलेगा शेल्फ लाइफ का नियम : सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि आयात के समय दवा की कुल शेल्फ लाइफ का 60% बचा होना जरूरी नहीं होगा। इसके बजाय अगर दवा में कम से कम 12 महीने की शेष शेल्फ लाइफ होगी तो उसका आयात किया जा सकेगा। इससे दवाओं की बर्बादी कम होगी, सप्लाई चेन मजबूत होगी और इन्वेंट्री प्रबंधन आसान होगा।


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रिसर्च के लिए विदेश से दवा मंगाना होगा आसान
रिसर्च, परीक्षण और विश्लेषण के लिए विदेश से छोटी मात्रा में दवा मंगाने की लाइसेंस प्रक्रिया भी आसान की जा रही है। अब केवल ऑनलाइन पूर्व सूचना देनी होगी और सिस्टम से मिलने वाले सूचना के आधार पर दवा आयात की जा सकेगी। इससे स्टार्टअप्स, रिसर्च संस्थानों और फार्मा कंपनियों को अनुसंधान शुरू करने में तेजी मिलेगी।
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