चीन संग कारोबार से घाटे में भारत, क्या मोदी-जिनपिंग की महामुलाकात बदलेगी तस्वीर?
- 2018 में भारत ने चीन से किया 95 अरब डॉलर का कारोबार, 57.86 अरब डॉलर का हुआ घाटा
- वार्ता में चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने व्यापार घाटा कम करने को कदम उठाने का भरोसा जताया
- भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा ट्रेड वॉर का असर, चीनी बाजारों में बनानी होगी ज्यादा पहुंच
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अनौपचारिक शिखर वार्ता में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने व्यापार घाटा कम करने को कदम उठाने का भरोसा जताया है। साल 2018 में भारत और चीन के बीच करीब 95.54 अरब डॉलर का व्यापार हुआ, जिससे दोनों देशों के कारोबारी रिश्तों ने नई ऊंचाइयों को छुआ था।
साल 2000 तक यह कारोबार केवल तीन अरब डॉलर तक ही था। चीन के साथ लगातार कारोबार बढ़ रहा है और भारत में चीनी राजदूत के दावे के मुताबिक, 2019 में द्विपक्षीय कारोबार 100 अरब डॉलर को पार कर जाएगा। हालांकि ज्यादा कारोबार से मतलब यह नहीं कि इसका फायदा दोनों देशों को हुआ है।
भारत को चीन के साथ ही सबसे ज्यादा घाटा हो रहा है। इसकी मुख्य वजह है कि भारत चीन से ज्यादा सामान खरीद रहा है, लेकिन इसकी तुलना में बहुत कम सामान बेच रहा है। 2018 में भारत को चीन के साथ करीब 57.86 अरब डॉलर का व्यापारिक घाटा हुआ, जिसे भारत ने जिनपिंग के साथ हुई वार्ता में प्रमुखता से उठाया।
भारतीय विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक, 2018 में भारत ने चीन से 18.84 अरब डॉलर का निर्यात किया। चीन ने भारत से कम सामान खरीदा और उसे पांच गुना ज्यादा सामान बेचा। ऐसे में इस कारोबार में चीन का ज्यादा फायदा हुआ।
पहले भी हुई थी असंतुलन दूर करने की कोशिश
दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन को दूर करने की कोशिश पांच साल पहले भी हुई थी। 2014 में जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कारोबारी सहयोग बढ़ाने के लिए पांच वर्षीय विकास कार्यक्रम बनाया था। तब इस मुद्दे पर प्रमुखता से बात हुई थी कि कैसे भारत अपने सामान की चीन के बाजारों में पहुंच बनाए। पिछले साल दोनों देशों के बीच तय हुआ था कि भारत गैर बासमती चावल, मछली और मछली के तेल जैसे कुछ उत्पाद चीन को निर्यात करेगा।
चीनी बाजारों में बनानी होगी ज्यादा पहुंच
चीन के बाजारों में ज्यादा से ज्यादा भारतीय उत्पादों की पहुंच से असंतुलन को दूर किया जा सकता है। भारत ने इसको लेकर चीन से बात की है। भारत चीन में दवाइयां, चावल, चीनी, फल, सब्जियां, मांस उत्पाद, सूती धागा और कपड़ा निर्यात कर सकता है। इसके अलावा आईटी और इंजीनियरिंग की सेवाएं भी दे सकता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी ट्रेड वॉर का असर
अमेरिका के साथ चीन की ट्रेड वार का असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 2019-20 वित्तीय वर्ष में दुनिया के 90 फीसदी हिस्से में आर्थिक सुस्ती की बात कही है। जिसकी प्रमुख वजहों में से ट्रेड वॉर भी है।
यह मुलाकात व्यापार मुद्दों को सुलझाने की दिशा में बेहतर संकेत : फियो
निर्यातकों के प्रमुख संगठन फियो ने कहा कि पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अनौपचारिक बैठक दोनों देशों के बीच व्यापार सहित अन्य मुद्दे सुलझाने की दिशा में बेहतर संकेत है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशन (फियो) के अध्यक्ष शरद कुमार ने कहा, दो देशों के बीच मतभेद होना आश्चर्यजनक बात नहीं है। भारत का व्यापार घाटा चिंता का विषय है। दूसरी बड़ी चिंता बाजार पहुंच है, जो भारतीय निर्यात की राह में बाधा है। इससे भारतीय निर्यात अपनी वास्तविक क्षमता को हासिल नहीं कर पा रहे हैं।
भारत से डेयरी, सोयाबीन उत्पादों समेत फलों की पहुंच चीन के बाजार तक नहीं है। भारतीय दवाइयों के लिए भी चीन में निर्यात करना मुश्किल है क्योंकि पंजीकरण में काफी समय लगता है। कुमार ने भारत में चीन के नागरिकों के लिये पांच साल का विविध प्रवेश सुविध वीजा का स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि चीन भी इसी तरह की सुविधा भारतीयों के लिये उपलब्ध करायेगा जिससे की पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।