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ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन मामले में भारत विश्व का चौथा देश

Thu, 02 Mar 2017 03:33 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 02 Mar 2017 03:33 PM IST
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India globally on fourth place in green house gas emmissions

ग्रीन हाउस गैस के ज्यादा उत्सर्जन से पूरी दुनिया जूझ रही  है। इसमें कमी करने के भारत सहित पूरी दुनिया के तमाम देश अपनी तरफ से प्रयास कर रहे हैं। ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन के मामले में भारत विश्व का चौथा देश है।

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सरकार की तरफ से इसमें कमी लाने के लिए कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए एक टाइमलाइन भी बनाई गई है, जिसके अनुसार 2030 तक ग्रीन हाउस गैस के मामले में 33-35 फीसदी की कमी कर लेगा। वहीं 2020 तक यह लक्ष्य 20-25 फीसदी करने का है। 
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ग्रीन हाउस गैस के मामले में भारत हर साल अपनी तरफ से 6.9 फीसदी का उत्सर्जन करता है।

आज भी देश में करीब 27.5 करोड़ आबादी जो गांव में रहती है वो अपनी जीविका के लिए वन संपदा पर निर्भर हैं। देश का 46.1 फीसदी भूभाग पर खेती होती है और 24.1 फीसदी वन भूमि है। 
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2010 तक भारत ने की 12 फीसदी की कमी 

India globally on fourth place in green house gas emmissions

भारत ने 2005-10 के बीच जीडीपी में 12 फीसदी की कमी कार्बन उत्सर्जन के मामले में कर ली है। सरकार ने अक्तूबर 2015 में लक्ष्य किया है कि इसके लिए सरकार सौर उर्जा, पवन उर्जा और जल विद्युत योजना के जरिए पूरा करने की कोशिश में लगी है।

इसके तहत सभी सरकारी भवनों की छतों पर सौर उर्जा पैनल लगा रही है, जिससे वो खुद ही बिजली पैदा कर ले। सरकार ने क्लाइमेट चेंज के लिए एक नेशनल एक्शन प्लान तैयार किया है, जिससे ग्रीन इंडिया के मिशन को आसानी से पूरा किया जा सके।  

विश्व का तीसरा सबसे मछली उत्पादक देश है भारत

भारत तीन तरफ समुद्र से घिरा हुआ देश है। इसलिए आबादी का एक बहुत बड़ा भाग (लगभग 35 फीसदी) इनके किनारों पर रहती है। देश के कई प्रमुख शहर जैसे कि मुंबई, चेन्नई, पुरी, तिरुवनंतपुरम, विशाखापट्टनम और गोवा जैसे राज्य समुद्र से बिलकुल सटे हुए हैं।

समुद्र से सटे इन इलाकों में लोगों का प्रमुख भोजन मछली है, जिसके उत्पादन में देश तीसरे स्थान पर है। समुद्र के किनारे करीब 3651 गांव हैं, जो मछली पकड़ने का काम करते हैं। वहीं तालाबों, नदियों में भी लोग देश के अन्य भूभाग में मछली पालन करते हैं। इसमे भारत का दूसरा स्थान है। 

तटवर्ती इलाकों में न हो प्रदूषण इसके लिए सरकार कर रही है कार्य

यूएनडीपी के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में लोगों के कारण तटीय इलाकों में भी प्रदूषण फैल रहा है, जिसके कारण समुद्र का लेवल हर साल 1.33 मीलिमीटर बढ़ रहा है।

इसको बढ़ने से रोकना होगा, नहीं तो तटीय इलाके कम हो जाएंगे। इसके लिए सरकार कई तरह के कदम उठा रही है, जिसके लिए लोगों को भी जागरुक किया जा रहा है। 

खतरे में हैं जीव-जंतुओं की 1401 प्रजातियां

India globally on fourth place in green house gas emmissions
भारत के पास विश्व के कुल क्षेत्रफल का केवल 2.4 फीसदी हिस्सा है, लेकिन यह 8 फीसदी के करीब जैव विविधता का संरक्षण भी किए हुए है। हालांकि इसके बावजूद देश में 1401 जीव-जंतुओं की प्रजातियां खतरे में हैं।

पूरे देश की अगर बात की जाए तो देश 21 फीसदी  भूभाग वन से घिरा हुआ है, लेकिन इसमें से 5 फीसदी ही सुरक्षित इलाका है। 

भारत के लोग कृषि पर निर्भर है,  जहां 44 फीसदी लोग खेती की पैदावार करते हैं। यह आंकड़ा विश्व के ऐवरेज से काफी ज्यादा है, जो कि 11 फीसदी है। 27.5 करोड़ लोग कृषि से सीधे-सीधे जुड़े हुए हैं।
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