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अंतरिक्ष महाशक्ति बनने के पांच दिन बाद भारत को मिला रक्षक
Tue, 02 Apr 2019 12:37 PM IST
Shilpa Thakur
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shilpa Thakur
Updated Tue, 02 Apr 2019 12:37 PM IST
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पीएसएलवी एमिसेट मिशन, इसरो
- फोटो : PTI
इसरो ने सोमवार को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (डीआरडीओ) की मदद से विकसित किए गए सैन्य सैटेलाइट एमिसैट को अंतरिक्ष में स्थापित कर एक बड़ी कामयाबी हासिल की। ये सैटेलाइट दुश्मन के इलाकों में रडार का पता कर लड़ाकू विमानों और अंतरिक्ष यान की रक्षा करेगा।
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इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक इंटेलिजेंस सैटेलाइट (एमिसैट) रडार किस जगह मौजूद है और किस तरह का है, ये पता लगाएगा। केवल इतना ही नहीं इसमें जमीन से सैकड़ों किलोमीटर की ऊंचाई पर रहते हुए जमीन पर संचार प्रणालियों, इलेक्ट्रानिक उपकरणों से निकलने वाले सिग्नल को पकड़ने की क्षमता भी है।
एमिसैट जमीन पर स्थित बर्फीली घाटियों, बारिश, तटीय इलाकों, जंगल और समुद्र की लहरों को बहुत आसानी नापने की क्षमता रखता है। इस सैटेलाइट में रडार की ऊंचाई मापने वाला डिवाइस एल्टिका लगा है। इसे डीआरडीओ के प्रोजेक्ट 'कौटिल्य' के तहत विकसित किया गया है।
डीआरडीओ के वैज्ञानिक के अनुसार "यह हमें बताएगा कि दूसरी तरफ किस तरह का रडार काम कर रहा है और हम रडार एवं अपने लड़कू विमान आदि की दूरी का पता लगा सकेंगे।" बेहद कम समय में भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में दो बड़ी कामियाबी हासिल की हैं।
इसरो ने सोमवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से स्वदेशी सर्विलांस सैटेलाइट एमिसैट के साथ 28 विदेशी नैनो सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजा था। पीएसएलवी-सी45 ने एमसैट को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया।
28 विदेशी उपग्रहों को भी उनकी कक्षाओं में सफलतापूर्वक स्थापित किया जा चुका है। इनमें भारत का एमिसैट, 24 अमेरिका के, 2 लिथुआनिया के और एक-एक उपग्रह स्पेन और स्विट्जरलैंड के हैं। पहली बार इसरो का मिशन एकसाथ तीन कक्षाओं के लिए भेजा गया।
एमिसैट सैटेलाइट के जरिए भारत ने और ताकत हासिल कर ली है। युद्ध में यह बहुत जरूरी होता है कि दुश्मन देश के रडार को खोजकर उसे नष्ट करना ताकि हवाई हमले के वक्त एयर डिफेंस सिस्टम उसके विमानों को निशाना ना बना सकें। एमिसैट इस काम को बखूबी अंजाम दे सकता है। यह चीन और पाकिस्तान में चल रही गतिविधियों पर भी निगरानी रखने में सक्षम है। साथ ही तटीय क्षेत्रों में नजर रखना और आसान हो जाएगा।