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CJI: 'भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत-फ्रांस साझेदारी जीवनरेखा जैसी', जानिए मुख्य न्यायाधीश ने क्यों कही ये बात
Sat, 31 Jan 2026 01:45 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 31 Jan 2026 01:45 AM IST
सार
देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने भारत और फ्रांस के एक कार्यक्रम में दोनों देशों के संबंधों को बेहतर करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज जिस तरह से वैश्विक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय ढांचा कमजोर हो रहा है, वहां भारत और फ्रांस के मजबूत संबंध स्थिरता लेकर आते हैं।
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सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत
- फोटो : एएनआई
विस्तार
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने शुक्रवार को कहा कि भू-राजनीतिक तनाव अंतरराष्ट्रीय सहयोग के पूरे ढांचे को अस्थिर कर सकता है और ऐसे समय में फ्रांस-भारत साझेदारी कोई विलासिता नहीं बल्कि एक जीवनरेखा है। भारत-फ्रांस कानूनी और व्यापार सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध राजनयिक स्तर से आगे बढ़ गए हैं और अब रक्षा और सुरक्षा सहयोग, उन्नत प्रौद्योगिकियों की साझा खोज जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ रहा है।
भारत-फ्रांस संबंधों को लेकर क्या बोले सीजेआई
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भारत-फ्रांस संबंधों को लेकर क्या बोले सीजेआई
- मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'हमारे द्विपक्षीय व्यापार में एक उल्लेखनीय तेजी देखी है, जो पिछले दशक में दोगुने से भी अधिक हो गया है। साल 2009-10 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 6.4 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो पिछले वित्तीय वर्ष में बढ़कर 15.11 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है।'
- न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, 'फ्रांस और भारत के बीच संबंध सदियों से बना एक बंधन है। आज हम अनिश्चितता से बदली हुई दुनिया का सामना कर रहे हैं। वैश्विक तनाव से अंतरराष्ट्रीय सहयोग के पूरे ढांचे के अस्थिर होने का खतरा है। ऐसी दुनिया में, फ्रांस-भारत साझेदारी कोई विलासिता नहीं है, यह एक जीवनरेखा है।'
- मुख्य न्यायाधीश ने इस मौके पर मध्यस्थता पैनल को लेकर भी बात की। उन्होंने जोर दिया कि एक संयुक्त मध्यस्थता और मध्यस्थता पैनल की स्थापना बेहद अहम है, जिसमें नागरिक और सामान्य कानून परंपराओं में प्रशिक्षित पेशेवर शामिल होंगे। उन्होंने कहा, 'ऐसे पैनल न सिर्फ तकनीकी उत्कृष्टता लाएंगे, बल्कि विवादों को सुलझाने के लिए जरूरी सांस्कृतिक और कानूनी समझ भी लाएंगे।'
- जस्टिस कांत ने आगे कहा कि भारतीय आर्बिट्रेशन सेंटर्स और पेरिस स्थित संस्थानों के बीच संस्थागत साझेदारी को गहरा करना भी जरूरी है।
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