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West Asia Crisis: हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव बढ़ा, भारत, EU और यूरोप ने ऊर्जा सुरक्षा पर की बड़ी चर्चा

Tue, 17 Mar 2026 09:47 PM IST
Pavan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Tue, 17 Mar 2026 09:47 PM IST
सार

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ रहा है, खासकर होर्मुज पर तनाव से तेल और गैस की कीमतें बढ़ गई हैं। इसी मुद्दे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोपीय संघ के नेताओं के साथ ब्रसेल्स में चर्चा की। दोनों पक्षों ने संकट के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति पर जोर दिया।

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India, EU discuss energy security amid escalating West Asia conflict, News in Hindi
पश्चिम एशिया में संघर्ष पर ईयू की बैठक, भारत भी शामिल - फोटो : X @DrSJaishankar

विस्तार

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर साफ दिखने लगा है। इसी मुद्दे को लेकर भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच ब्रसेल्स में अहम बातचीत हुई। इस बैठक में भारत की तरफ से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर शामिल हुए, जबकि यूरोप की ओर से 27 देशों के विदेश मंत्री मौजूद थे। इस बैठक के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्षों ने माना कि पश्चिम एशिया का बढ़ता संघर्ष दुनिया के लिए चिंता का विषय है, खासकर ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से। इसलिए इस संकट को हल करने के लिए बातचीत और कूटनीति ही सबसे सही रास्ता है।
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होर्मुज पर रोक लगने से हालात गंभीर
दरअसल, हालात इसलिए और गंभीर हो गए हैं क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री रास्ते पर ईरान ने लगभग रोक लगा दी है। यह वही रास्ता है, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल और गैस गुजरता है। इसके कारण वैश्विक बाजार में तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं। भारत के लिए यह मामला और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से ही खरीदता है। ऐसे में सप्लाई पर असर पड़ने से भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव पड़ सकता है।
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यूरोपीय नेताओं के साथ जयशंकर की अलग-अलग बैठक
इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोपीय नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकों में कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने उर्सुला वॉन डेर लेयेन से भी मुलाकात की और भारत-ईयू के बीच हाल ही में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को पूरी तरह लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और यूरोप को रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में साझेदारी और मजबूत करनी चाहिए। साथ ही भारत-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल को ज्यादा प्रभावी बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।

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यूक्रेन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के मुद्दों पर भी हुई चर्चा
इस बैठक में यूक्रेन की स्थिति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत ने कहा कि वह यूरोप के साथ मिलकर एक स्थिर और संतुलित वैश्विक व्यवस्था बनाए रखने के लिए काम करना चाहता है। इस बैठक से साफ है कि भारत और यूरोप अब सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि सुरक्षा और वैश्विक संकटों से निपटने के लिए भी एक-दूसरे के मजबूत साझेदार बनते जा रहे हैं।
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