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हिमालयन खेलों में भारत ने पाकिस्तान और चीन को नहीं दिया बुलावा
हेमंत रस्तोगी/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 24 Mar 2017 05:50 AM IST
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संसद की ओर से मंजूर हुए हिमालयन खेलों में भारत के साथ दोस्ताना संबंध रखने वाले देशों को ही आमंत्रित किया जा रहा है। भारत सरकार ने रणनीतिक तौर पर इन खेलों में अफगानिस्तान को तो आमंत्रित किया है, लेकिन पाकिस्तान को बुलावा नहीं भेजा है।
सरकार का मानना है कि पाकिस्तान को इन खेलों में बुलाकर उसके कश्मीर पर दावे को मजबूत करना होगा। यही कारण है कि अफगानिस्तान को तो इन खेलों में बुला लिया गया है, लेकिन पाकिस्तान को दूर रखने का फैसला लिया गया।
गुवहाटी में होने वाले इन खेलों में अफगानिस्तान के अलावा भूटान, नेपाल, म्यानमार और थाईलैंड को आमंत्रित किया गया है।इन खेलों में एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बॉक्सिंग, वेटलिफ्टिंग, फेंसिंग, स्क्वाश, जूडो और फुटबाल का आयोजन किया जाना है।
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मंत्रालय की योजना पहले इन खेलों को अप्रैल में कराने की थी। इसके लिए आईओए को भी साथ जोड़ लिया गया था। आईओए ने जब सभी देशों को इन खेलों में भाग लेने का प्रस्ताव दिया तो सभी ने हामी तो भर दी, लेकिन अप्रैल माह में भागीदारी पर एतराज जता दिया।
अफगानिस्तान को छोड़ सभी देशों का कहना है कि अप्रैल में उनकी टीमों की भागीदारी दूसरे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में होनी है। ऐसे में वह अगले माह इन खेलों में भाग नहीं ले सकते हैं। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि अब अप्रैल के स्थान पर इस वर्ष के अंत में इनका आयोजन कराया जाए।
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सरकार का मानना है कि पाकिस्तान को इन खेलों में बुलाकर उसके कश्मीर पर दावे को मजबूत करना होगा। यही कारण है कि अफगानिस्तान को तो इन खेलों में बुला लिया गया है, लेकिन पाकिस्तान को दूर रखने का फैसला लिया गया।
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गुवहाटी में होने वाले इन खेलों में अफगानिस्तान के अलावा भूटान, नेपाल, म्यानमार और थाईलैंड को आमंत्रित किया गया है।इन खेलों में एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बॉक्सिंग, वेटलिफ्टिंग, फेंसिंग, स्क्वाश, जूडो और फुटबाल का आयोजन किया जाना है।
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मंत्रालय की योजना पहले इन खेलों को अप्रैल में कराने की थी। इसके लिए आईओए को भी साथ जोड़ लिया गया था। आईओए ने जब सभी देशों को इन खेलों में भाग लेने का प्रस्ताव दिया तो सभी ने हामी तो भर दी, लेकिन अप्रैल माह में भागीदारी पर एतराज जता दिया।
अफगानिस्तान को छोड़ सभी देशों का कहना है कि अप्रैल में उनकी टीमों की भागीदारी दूसरे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में होनी है। ऐसे में वह अगले माह इन खेलों में भाग नहीं ले सकते हैं। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि अब अप्रैल के स्थान पर इस वर्ष के अंत में इनका आयोजन कराया जाए।
चीन को भी बुलावा नहीं
इन खेलों को साल 2014 के बजट सत्र में भूटान और नेपाल के साथ कराने की मंजूरी दी गई थी, लेकिन जब इन्हें कराने की बारी आया तो फैसला हुआ इनका आयोजन बड़े स्तर पर कराया जाए। गुवहाटी में सैफ खेलों का इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार है।
ऐसे में इन पर ज्यादा खर्च भी नहीं आएगा। हालांकि म्यानमार और थाईलैंड भी हिमालयी देश नहीं हैं, लेकिन हिमालय और देश के उत्तर पूर्वी राज्यों से इनकी नजदीकी है। इसी को ध्यान में रख दोनों को आमंत्रित किया गया।
जब बात पाकिस्तान की उठी तो इसे रणनीतिक तौर पर सिरे से खारिज कर दिया गया। वहीं चीन भी हिमालयी देश है, लेकिन उसके साथ भारत के कभी खेलों के अच्छे रिश्ते नहीं रहे हैं। इस वजह से चीन को भी नहीं बुलाया गया।
ऐसे में इन पर ज्यादा खर्च भी नहीं आएगा। हालांकि म्यानमार और थाईलैंड भी हिमालयी देश नहीं हैं, लेकिन हिमालय और देश के उत्तर पूर्वी राज्यों से इनकी नजदीकी है। इसी को ध्यान में रख दोनों को आमंत्रित किया गया।
जब बात पाकिस्तान की उठी तो इसे रणनीतिक तौर पर सिरे से खारिज कर दिया गया। वहीं चीन भी हिमालयी देश है, लेकिन उसके साथ भारत के कभी खेलों के अच्छे रिश्ते नहीं रहे हैं। इस वजह से चीन को भी नहीं बुलाया गया।