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कोयला संकट : भारत के पास दुनिया में सबसे ज्यादा बिजली बनाने की क्षमता, फिर भी क्यों है संकट? समझें पूरा गणित
Mon, 11 Oct 2021 07:49 PM IST
हिमांशु मिश्रा
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Mon, 11 Oct 2021 07:49 PM IST
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देश में कोयले की कमी के चलते बिजली का संकट बढ़ता जा रहा है।
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अमर उजाला
विस्तार
देश में कोयले की कमी होने लगी है। कई राज्यों ने इसके चलते बिजली संकट गहराने की आशंका जताई है। दिल्ली, पंजाब, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। इसमें जल्द से जल्द कोयले की कमी दूर करने की मांग की गई है, ताकि बिजली उत्पादन में होने वाली कमी को समय रहते दूर किया जा सके। हम आपको बता रहे हैं कि भारत में बिजली कैसे तैयार होती है? आखिर क्यों कोयले की कमी से देश में बिजली का संकट बढ़ने का खतरा मंडराने लगा है? बिजली उत्पादन में भारत क्या करने की क्षमता रखता है? हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटयू) के प्रोफेसर और कन्नौज इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक प्रो. मनोज शुक्ला समझा रहे हैं बिजली उत्पादन का पूरा गणित...भारत में बिजली का उत्पादन कैसे?
सामान्यत: हर देश में 7 तरीकों से बिजली का उत्पादन होता है। सबसे ज्यादा थर्मल यानी कोयले से बिजली बनाई जाती है। भारत में 70% बिजली का उत्पादन कोयले से ही होता है।
नेशनल पॉवर पोर्टल (NPP) के मुताबिक, देश में तीन लाख 88 हजार मेगावाट की बिजली बनाने की क्षमता है। हालांकि, अभी कई प्लांट्स अंडर मेंटेनेंस है। मतलब यहां अभी बिजली उत्पादन का काम नहीं हो पा रहा है। इस तरह से अभी देश में हर रोज 2 लाख 204 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इनमें...
नेशनल पॉवर पोर्टल (NPP) के मुताबिक, देश में तीन लाख 88 हजार मेगावाट की बिजली बनाने की क्षमता है। हालांकि, अभी कई प्लांट्स अंडर मेंटेनेंस है। मतलब यहां अभी बिजली उत्पादन का काम नहीं हो पा रहा है। इस तरह से अभी देश में हर रोज 2 लाख 204 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इनमें...
| तरीका | उत्पादन (मेगावाट) |
| थर्मल (कोयला) | 2.24 लाख |
| सोलर पॉवर | 46.228 हजार |
| विंड पॉवर | 39.870 हजार |
| बायो पॉवर | 10.577 हजार |
| न्यूक्लियर | 6.780 हजार |
बिजली की जरूरत और सप्लाई?
एनपीपी के अनुसार, देश में अभी हर रोज एक लाख 66 हजार 107 मेगावाट बिजली की डिमांड है। इसमें 1.63 लाख मेगावाट बिजली सप्लाई हो रही है। इस तरह से हर रोज करीब 2700 मेगावाट की कमी हो रही है। कोरोना के बाद बिजली की खपत में काफी बढ़ोतरी देखी गई है। 2019 में जहां हर महीने 106.6 बिलियन यूनिट की खपत होती थी, वहीं 2021 में 124.2 बिलियन यूनिट बिजली की खपत होने लगी। इसके चलते कोयले की खपत भी बढ़ गई। पिछले साल अगस्त-सितंबर के मुकाबले इस साल इसमें 18% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कोयले की कमी क्यों हुई?
1. लॉकडाउन खत्म होते ही पिछले दो महीनों में बिजली की डिमांड अचानक से बढ़ी है। ऐसा इसलिए क्योंकि करीब 18 महीने से बंदी और सुस्ती के कगार पर पहुंचे फैक्ट्रियों में तेजी से काम शुरू हुआ। इससे बिजली की खपत बढ़ गई।
2. कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अप्रैल-जून में कोयले के खनन का काम काफी प्रभावित हुआ।
3. इस बार मानसून का समय बढ़ गया। बारिश के दौरान कोयले का खनन कम हो जाता है। मानसून लंबे समय तक चलने के कारण हर साल जितने समय में नुकसान की भरपाई हो जाती थी, वो इस बार नहीं हो पाई।
4. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले के दाम में 40% का इजाफा हुआ। इसके चलते भारतीय कंपनियों ने कोयले के आयात कम कर दिया।
2. कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अप्रैल-जून में कोयले के खनन का काम काफी प्रभावित हुआ।
3. इस बार मानसून का समय बढ़ गया। बारिश के दौरान कोयले का खनन कम हो जाता है। मानसून लंबे समय तक चलने के कारण हर साल जितने समय में नुकसान की भरपाई हो जाती थी, वो इस बार नहीं हो पाई।
4. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले के दाम में 40% का इजाफा हुआ। इसके चलते भारतीय कंपनियों ने कोयले के आयात कम कर दिया।
क्या है चार विकल्प?
देश में कोयले पर निर्भरता कम करनी होगी। इसके पांच विकल्प हैं। पहला सोलर एनर्जी, दूसरा हाइड्रो पॉवर, तीसरा न्यूक्लियर, चौथा बायो एनर्जी और पांचवा फ्यूल एनर्जी।
1. फ्यूल एनर्जी : ये विकल्प काफी मंहगा है। दुनिया में फ्यूल एनर्जी खुद संकट में है। इसके दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं।
2. हाइड्रो पॉवर : इसके लिए कई डैम बनाने पड़ेंगे। ज्यादा आबादी वाले भारत में यह संभव नहीं है। जहां डैम बनते हैं वहां बाढ़ का खतरा भी मंडराने लगता है। इसलिए इस विकल्प पर भी ज्यादा काम नहीं किया जा सकता है।
3. सोलर एनर्जी और बायो एनर्जी : सरकार लगातार सोलर एनर्जी और बायो एनर्जी को प्रमोट कर रही है। हालांकि इसका परिणाम ज्यादा अच्छा नहीं मिल रहा है।
4. न्यूक्लियर एनर्जी : विशेषज्ञ इसे सबसे अच्छा विकल्प मानते हैं। भारत में दुनिया का 70% थोरियम पाया जाता है। थोरियम एटॉमिक मटेरियल होता है और इससे बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। जहां अभी एक किलो कोयले से तीन यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है, वहीं एक किलो थोरियम से तीन करोड़ यूनिट से ज्यादा बिजली का उत्पादन संभव है। प्रो. मनोज शुक्ला बताते हैं कि इसकी दौड़ में सबसे ज्यादा खतरा रेडिएशन फैलने का होता है। लेकिन अगर इसपर सही से काम हो तो देश में बिजली की दिक्कत हमेशा के लिए दूर की जा सकती है।
1. फ्यूल एनर्जी : ये विकल्प काफी मंहगा है। दुनिया में फ्यूल एनर्जी खुद संकट में है। इसके दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं।
2. हाइड्रो पॉवर : इसके लिए कई डैम बनाने पड़ेंगे। ज्यादा आबादी वाले भारत में यह संभव नहीं है। जहां डैम बनते हैं वहां बाढ़ का खतरा भी मंडराने लगता है। इसलिए इस विकल्प पर भी ज्यादा काम नहीं किया जा सकता है।
3. सोलर एनर्जी और बायो एनर्जी : सरकार लगातार सोलर एनर्जी और बायो एनर्जी को प्रमोट कर रही है। हालांकि इसका परिणाम ज्यादा अच्छा नहीं मिल रहा है।
4. न्यूक्लियर एनर्जी : विशेषज्ञ इसे सबसे अच्छा विकल्प मानते हैं। भारत में दुनिया का 70% थोरियम पाया जाता है। थोरियम एटॉमिक मटेरियल होता है और इससे बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। जहां अभी एक किलो कोयले से तीन यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है, वहीं एक किलो थोरियम से तीन करोड़ यूनिट से ज्यादा बिजली का उत्पादन संभव है। प्रो. मनोज शुक्ला बताते हैं कि इसकी दौड़ में सबसे ज्यादा खतरा रेडिएशन फैलने का होता है। लेकिन अगर इसपर सही से काम हो तो देश में बिजली की दिक्कत हमेशा के लिए दूर की जा सकती है।