आतंकवाद से मिलकर मुकाबला करेंगे भारत-चीन
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भारत और चीन ने आतंकवाद से मुकाबले की कवायद के तहत सुरक्षा एवं सहयोग बढ़ाने के लिए मंगलवार को उच्च स्तरीय बैठक की। दोनों देशों के अधिकारियों ने इस पहली उच्च स्तरीय वार्ता में आतंकवाद से मुकाबले के लिए कानून और नीतियों पर सूचनाओं को साझा किया और कुछ महत्वपूर्ण सहमति बनी।
बीजिंग में आतंकवाद से मुकाबले और सुरक्षा पर आयोजित पहली भारत-चीन उच्च स्तरीय वार्ता में दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर विचारों का आदान-प्रदान किया। बैठक की सह-अध्यक्षता संयुक्त अन्वेषण समिति के चेयरमैन आरएन रावी और चीन के केंद्रीय राजनीतिक एवं विधि मामलों के आयोग के महासचिव वांग यांगकिंग ने की।
भारतीय दूतावास की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, दोनों अधिकारियों ने आतंकवाद से मुकाबले के लिए संबंधित नीतियों, तंत्र और कानून पर सूचनाओं का साझा किया और दोनों पक्षों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर आपसी समझ बढ़ाने पर सहमति बनी। आतंकवाद से मुकाबले के लए दोनों पक्षों ने आपसी सहयोग एवं सुरक्षा बढ़ाने पर भी चर्चा की।
चीन ने पाक से झाड़ा पल्ला, कहा- आतंकवाद पर हम साथ नहीं
आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को अलग थलग करने की मुहिम में जुटे भारत को उस समय एक और सफलता मिलती दिखी जब पाकिस्तान के आर्थिक और सामरिक साझेदार बताए जा रहे चीन ने आतंकवाद के मुद्दे पर उसके समर्थन से इंकार कर दिया।
चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मौजूदा झगड़ा दो पडोसी राष्ट्रों के बीच का है, इसमें चीन किसी भी पक्ष के समर्थन में नहीं है। चीन ने साफ कहा कि इस मसले को दोनों देशों को आपस में ही सुलझाना होगा।
चीन के इस रुख से पाकिस्तान को करारा झटका लगा है, क्योंकि अभी तक वह हर मुद्दे पर चीन के खुद के साथ होने का दावा करता रहा है।बता दें कि उड़ी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत लगातार पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करवाने की मुहिम चला रहा है।