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India China Standoff: भारत-चीन सीमा पर फिर से तनाव! जानिए LAC से लेकर अंतराराष्ट्रीय सीमाओं के बारे में सबकुछ
Tue, 13 Dec 2022 10:55 AM IST
धर्मेंद्र सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र सिंह
Updated Tue, 13 Dec 2022 10:55 AM IST
सार
भारत और चीन के सैनिकों के बीच जिस जगह पर झड़प हुई है उसे भारत और चीन के बीच की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के नाम से भी जाना जाता है। तो आइए जानते हैं कि आखिर भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा, नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा क्या है?
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जानिए LAC से लेकर अंतराराष्ट्रीय सीमाओं के बारे में सबकुछ
- फोटो : Twitter @Rezhasan
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विस्तार
India China Standoff: अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई है। इस घटना में दोनों देशों के सैनिक घायल हुए हैं। भारतीय सैनिकों का इलाज गुवाहाटी के आर्मी हॉस्पिटल में किया जा रहा है। अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले के यंगस्टे में यह झड़प हुई है। रक्षा मंत्रालय की तरह से बताया गया है कि 9 दिसंबर 2022 को भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प हुई है।
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तवांग में चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी एलएसी तक पहुंचना चाहती थी। भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों के इस कदम का दृढ़ता और ताकत के साथ विरोध किया है। इस दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई है। लेकिन भारती जवानों ने एलएसी तक पहुंचने की कोशिश कर रहे चीनी सेनाओं को खदेड़ दिया।
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न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाल से कहा है कि संघर्ष के तुरंत बाद दोनों पक्ष इलाके से पीछे हट गए। चीनी पीएलए सैनिकों की संख्या लगभग 300 थी जो भारी तैयारी के साथ आए थे, उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनका सामना करने के लिए भारतीय सैनिक पूरी तरह से तैयार होंगे। 9 दिसंबर को चीनी पीएलए सैनिकों और भारतीय सैनिकों के बीच अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में संघर्ष हुआ। भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों को करारा जवाब दिया। घायल चीनी सैनिकों की संख्या भारतीय सैनिकों की तुलना में अधिक है।
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भारत और चीन के सैनिकों के बीच जिस जगह पर झड़प हुई है उसे भारत और चीन के बीच की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के नाम से भी जाना जाता है। तो आइए जानते हैं कि आखिर भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा, नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा क्या है?
भारत की सीमा
भारत की थल सीमा (लैंड बॉर्डर) की कुल लंबाई 15,106.7 किलोमीटर है जो कुल सात देशों से लगती है। इसके अलावा 7516.6 किलोमीटर लंबी समुद्री सीमा है। भारत सरकार के मुताबिक ये सात देश हैं, बांग्लादेश (4,096.7 किमी), चीन (3,488 किमी), पाकिस्तान (3,323 किमी), नेपाल (1,751 किमी), म्यांमार (1,643 किमी), भूटान (699 किमी) और अफगानिस्तान (106 किमी)।
भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा
सबसे पहले तो यह जान लीजिए कि भारत चीन के साथ 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। यह सीमा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरती है।
यह तीन सेक्टरों में बंटी हुई है- पश्चिमी सेक्टर यानी जम्मू-कश्मीर, मिडिल सेक्टर यानी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड और पूर्वी सेक्टर यानी सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश। हालांकि दोनों देशों के बीच अब तक पूरी तरह से सीमांकन नहीं हुआ है, क्योंकि कई इलाकों को लेकर दोनों के बीच सीमा विवाद है। भारत पश्चिमी सेक्टर में अक्साई चीन पर अपना दावा करता है, जो फिलहाल चीन के नियंत्रण में है। भारत के साथ 1962 के युद्ध के दौरान चीन ने इस पूरे इलाके पर कब्जा कर लिया था।
वहीं पूर्वी सेक्टर में चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है। चीन कहता है कि यह दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है। चीन तिब्बत और अरुणाचल प्रदेश के बीच की मैकमोहन रेखा को भी नहीं मानता है। वह अक्साई चीन पर भारत के दावे को भी खारिज करता है।
इन विवादों की वजह से दोनों देशों के बीच कभी सीमा निर्धारण नहीं हो सका। हालांकि यथास्थिति बनाए रखने के लिए लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी टर्म का इस्तेमाल किया जाने लगा। हालांकि अभी ये भी स्पष्ट नहीं है। दोनों देश अपनी अलग-अलग लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल बताते हैं।
इस लाइन ऑफ एक्चुएल कंट्रोल पर कई ग्लेशियर, बर्फ के रेगिस्तान, पहाड़ और नदियां पड़ते हैं। एलएसी के साथ लगने वाले कई ऐसे इलाके हैं जहां अक्सर भारत और चीन के सैनिकों के बीच तनाव की खबरें आती रहती हैं।
भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा
सात दशकों से भी ज्यादा वक्त गुजर चुका है, लेकिन जम्मू और कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का मुख्य मुद्दा बना हुआ है। यह क्षेत्र इस समय एक नियंत्रण रेखा से बंटा हुआ, जिसके एक तरफ का हिस्सा भारत के पास है और दूसरा पाकिस्तान के पास।
1947-48 में भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू और कश्मीर के मुद्दे पर पहला युद्ध हुआ था जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में युद्धविराम समझौता हुआ। इसके तहत एक युद्धविराम सीमा रेखा तय हुई, जिसके मुताबिक जम्मू और कश्मीर का लगभग एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान के पास रहा जिसे पाकिस्तान 'आजाद कश्मीर' कहता है।
लगभग दो तिहाई हिस्सा भारत के पास है जिसमें जम्मू, कश्मीर घाटी और लद्दाख शामिल हैं। 1972 के युद्ध के बाद शिमला समझौता हुआ जिसके तहत युद्धविराम रेखा को 'नियंत्रण रेखा' का नाम दिया गया। भारत और पाकिस्तान के बीच ये नियंत्रण रेखा 740 किलोमीटर लंबी है।
यह पर्वतों और रिहाइश के लिए प्रतिकूल इलाकों से गुजरती है। कुछ जगह पर यह गांवों को दो हिस्सों में बांटती है तो कहीं पर्वतों को। वहां तैनात भारत और पाकिस्तान के सैनिकों के बीच कुछ जगहों पर दूरी सिर्फ सौ मीटर है तो कुछ जगहों पर यह पांच किलोमीटर भी है। दोनों देशों के बीच नियंत्रण रेखा पिछले पचास साल से विवाद का विषय बनी हुई है।
मौजूदा नियंत्रण रेखा, भारत और पाकिस्तान के बीच 1947 में हुए युद्ध के वक्त जैसी मानी गई थी, करीब-करीब वैसी ही है। उस वक्त कश्मीर के कई इलाकों में लड़ाई हुई थी।
उत्तरी हिस्से में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों को करगिल शहर से पीछे और श्रीनगर से लेह राजमार्ग तक धकेल दिया था। 1965 में फिर युद्ध छिड़ा, लेकिन तब लड़ाई में बने गतिरोध की वजह से यथास्थिति 1971 तक बहाल रही। 1971 में एक बार फिर युद्ध हुआ।
1971 के युद्ध में पूर्वी पाकिस्तान टूट कर बांग्लादेश बन गया। उस वक्त कश्मीर में कई जगहों पर लड़ाई हुई और नियंत्रण रेखा पर दोनों देशों ने एक-दूसरे की चौकियों पर नियंत्रण किया। भारत को करीब तीन सौ वर्ग मील जमीन मिली। यह नियंत्रण रेखा के उत्तरी हिस्से में लद्दाख इलाके में थी।
1972 के शिमला समझौते और शांति बातचीत के बात नियंत्रण रेखा दोबारा स्थापित हुई। दोनो पक्षों ने यह माना कि जब तक आपसी बातचीत से मसला न सुलझ जाए तब तक यथास्थिति बहाल रखी जाए। यह प्रक्रिया लंबी खिंची। फील्ड कमांडरों ने पांच महीनों में करीब बीस नक्शे एक-दूसरे को दिए। आखिरकार समझौता हुआ। इसके अलावा भारत पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा राजस्थान, गुजरात, जम्मू और गुजरात से लगती है।
सियाचिन ग्लेशियरः एक्चुअल ग्राउंड पोजिशन लाइन
सियाचिन ग्लेशियर के इलाके में भारत-पाकिस्तान की स्थिति 'एक्चुअल ग्राउंड पोजिशन लाइन' से तय होती है। 126.2 किलोमीटर लंबी 'एक्चुअल ग्राउंड पोजिशन लाइन' की रखवाली भारतीय सेना करती है।
80 के दशक से सबसे भीषण संघर्ष सियाचीन ग्लेशियर में चल रहा है। शिमला समझौते के समय न तो भारत ने और न ही पाकिस्तान ने ग्लेशियर की सीमाएं तय करने के लिए आग्रह किया।
कुछ विश्लेषकों का कहना है कि शायद इसकी वजह यह थी कि दोनों ही देशों ने इस भयानक इलाके को अपने नियंत्रण लेने की जरूरत नहीं समझी। कुछ यह भी कहते हैं कि इसका मतलब यह होता कि कश्मीर के एक हिस्से पर रेखाएं खींचना जो चीन प्रशासित है मगर भारत उन पर दावा करता है।
भारत-भूटान सीमा
भूटान के साथ लगने वाली भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा 699 किलोमीटर लंबी है। सशस्त्र सीमा बल इसकी सुरक्षा करता है। भारत के सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम और पश्चिम बंगाल राज्य की सीमा भूटान से लगती है।
भारत-नेपाल सीमा
उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम की सीमाएं नेपाल के साथ लगती हैं। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा की लंबाई 1751 किलोमीटर है और इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सशस्त्र सीमा बल के पास ही है। दोनों देशों की सरहद ज्यादातर खुली हुई और आड़ी-तिरछी भी है।
हालांकि अब सीमा पर चौकसी के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ी है। मुश्किल इस बात को लेकर ज्यादा है कि दोनों देशों की सीमाओं का निर्धारण पूरी तरह से नहीं हो पाया है। महाकाली (शारदा) और गंडक (नारायणी) जैसी नदियां जिन इलाकों में सीमांकन तय करती हैं, वहां मॉनसून के दिनों में आने वाली बाढ़ से तस्वीर बदल जाती है। नदियों का रुख भी साल दर साल बदलता रहता है। कई जगहों पर तो सीमा तय करने वाले पुराने खंभे अभी भी खड़े हैं, लेकिन स्थानीय लोग भी उनकी कद्र नहीं करते हैं।
भारत-म्यांमार सीमा
म्यांमार के साथ भारत की 1643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है। इसमें 171 किलोमीटर लंबी सीमा की हदबंदी का काम नहीं हुआ है। म्यांमार सीमा की सुरक्षा का जिम्मा असम राइफल्स के पास है।
भारत-बांग्लादेश सीमा
4096.7 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा पहाड़ों, मैदानों, जंगलों और नदियों से होकर गुजरती है। यह सरहदी इलाके सघन आबादी वाले हैं और इसकी सुरक्षा का जिम्मा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के पास है।
भारत-बांग्लादेश सीमा पर अंतरराष्ट्रीय सीमा के अंदर केवल एक किलोमीटर तक के इलाके में बीएसएफ अपनी कार्रवाई कर सकता है। इसके बाद स्थानीय पुलिस का अधिकार क्षेत्र शुरू हो जाता है।