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भारत-चीन एलएसी पर संयम बरतने और संवाद जारी रखने पर रजामंद
Mon, 22 Feb 2021 03:53 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 22 Feb 2021 03:53 AM IST
सार
- -दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच चीन की तरफ मोल्डो में 16 घंटे तक चली बातचीत
- -पैंगोंग खाली करने के बाद बाकी मसलों के हल के लिए मोल्डो की बैठक अहम साबित
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भारत और चीन की सेना(फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में सेनाओं को हटाने की प्रक्रिया को लेकर हुई दसवें दौर की 16 घंटे तक चली बातचीत में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर संयम बरतने और बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई। सकारात्मक माहौल में हुई इस बातचीत में दोनों पक्षों ने पैंगोंग झील से अग्रिम मोर्चे के सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया सहजता से पूरी होने पर सकारात्मक रूप से संतुष्टि जताई।
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भारतीय रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी दोनों देशों के साझा बयान में कहा गया है कि जमीनी स्तर पर हालात को नियंत्रित और स्थिर बनाए रखने के लिए आपसी रजामंदी से स्वीकार्य प्रस्ताव को संतुलित और व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाएंगे, ताकि संयुक्त रूप से सीमा क्षेत्रों में शांति और सद्भाव कायम रखा जा सके।
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इससे पहले लद्दाख में 1,597 किमी लंबी एलएसी से सटे चीन की ओर मोल्डो में शनिवार सुबह 10 बजे से शुरू हुई यह वार्ता रात दो बजे तक चली। बातचीत के बाद रविवार को जारी भारत-चीन के साझा बयान में कहा गया है कि पैंगोंग से सैनिकों को हटाना एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसने एलएसी से सटे पश्चिमी इलाकों में बाकी मुद्दों के समाधान के लिए अच्छा आधार प्रदान किया है।
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दोनों पक्षों ने स्पष्ट रूप से पश्चिमी सेक्टर में एलएसी से सटे अन्य मसलों पर व्यापक और गहनता से विचार-विमर्श किया। दोनों ही पक्ष अपने नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति का पालन करने और आपसी संवाद व चर्चा को जारी पर सहमत हैं।
यह बातचीत तब हुई है, जब दोनों देश पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी छोर से अपने सैनिकों और साजोसामान को हटाए जाने की प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। सूत्रों ने बताया कि बातचीत में दोनों पक्षों ने इस पर संतुष्टि जताई है।
दसवें दौर की वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन ने किया, जो लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर हैं। वहीं, चीनी पक्ष का नेतृत्व मेजर जनरल लिउ लिन ने किया, जो चीनी सेना के दक्षिणी शिनजियांग सैन्य जिले के कमांडर हैं।
हॉट स्प्रिंग, गोगरा और डेपसांग से तेजी से सेनाएं हटाने के पक्ष में भारत
सूत्रों के मुताबिक, भारत ने बातचीत में सीमा पर तनाव घटाने के लिए हॉट स्प्रिंग, गोगरा और डेपसांग समेत तनातनी वाले सभी इलाकों से सेनाओं को तेजी से हटाए जाने को कहा है। भारत ने यह भी कहा है कि सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जानी चाहिए।
चांग चेम्मो नदी के किनारों पर तैनात सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया जटिल
सूत्रों के मुताबिक, श्योक की सहायक चांग चेम्मो नदी के किनारों पर स्थित गोगरा-हॉट स्प्रिंग से सेनाओं को हटाने की प्रक्रिया जटिल होगी। इसके अलावा एक और सहायक नदी खूगरांग नदी पर स्थित सैनिकों की तैनाती भी बड़ी संख्या में है। ऐसे में इन इलाकों से आपसी सहमति से सैनिकों को हटाए जाने की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।
सबसे उलझा हुआ है डेपसांग, लग सकता है वक्त
डेपसांग का मुद्दा सबसे उलझा हुआ है। 2013 में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने भारतीय सेना को यहां के रैकी और जीवन नाला के बीच 10 से 13 पेट्रोलिंग प्वाइंट के बीच गश्त करने से रोकने की कोशिश की थी, जिससे दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ गए थे। एक अधिकारी ने कहा, डेपसांग मुद्दे को सुलझाने में वक्त लग सकता है।
सीमा पर एकतरफा बदलाव किसी सूरत में मंजूर नहीं: राजनाथ
सलेम (तमिलनाडु)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा, नौ दौर की बातचीत के बाद पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों को हटाए जाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
उन्होंने कहा, देश अपनी सीमा पर किसी भी तरह का एकतरफा बदलाव किसी भी सूरत में मंजूर नहीं करेगा और ऐसी किसी भी कोशिश का करारा जवाब देगा। भारतीय जनता युवा मोर्चा के राज्य स्तरीय सम्मेलन में राजनाथ ने कहा, दुर्भाग्य से कांग्रेस भारतीय सेना की वीरता पर संदेह करती है। क्या यह उन सैनिकों का अपमान नहीं है, जो देश के लिए बलिदान देते हैं।