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संयुक्त बयान: भारत-चीन पूर्वी लद्दाख में लंबित मुद्दों को तेजी से हल करने पर सहमत
Tue, 03 Aug 2021 12:17 AM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 03 Aug 2021 12:17 AM IST
सार
- भारतीय सेना की ओर से संयुक्त बयान जारी
- शनिवार को भारत और चीन के सैन्य कमांडरों ने 12वें दौर की वार्ता की थी
- वार्ता करीब नौ घंटे चली लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया था
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Indian Army and PLA at Ladakh
- फोटो : PTI
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विस्तार
भारत और चीन की सेना ने 12वें दौर की सैन्य वार्ता को रचनात्मक करार दिया है। पूर्वी लद्दाख के मुद्दे पर चल रहे गतिरोध और लंबित मुद्दों को सुलझाने पर दोनों देशों में सहमति बनी। हालांकि बातचीत में बाकी बचे प्वाइंट पर सेना वापसी को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं हो सका था। वर्तमान में एलएसी के पास संवदेनशील सेक्टरों में दोनों देशों के करीब 50 हजार से 60 हजार सैनिक तैनात हैं।
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वार्ता के दो दिन बाद भारतीय सेना की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने सीमा विवाद पर गहराई से बातचीत की। इसमें सैनिकों की वापसी पर बात हुई और इस दौरान आपसी समझ को बढ़ाने में मदद मिली। हॉट स्प्रिंग और गोगरा के मुद्दे पर दोनों पक्ष अगले दौर में और विस्तृत बातचीत करेंगे।
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बयान के मुताबिक, दोनों पक्षों ने बैठक के इस दौर को रचनात्मक करार दिया जिसने पारस्परिक समझ को और बढ़ाया। वे बाकी बचे मुद्दों को वर्तमान समझौतों और प्रोटोकॉल के अनुसार त्वरित आधार पर हल करने को लेकर सहमत हुए। साथ ही बातचीत व वार्ता की गति बरकरार रखने पर भी सहमति जताई गई। इसके मुताबिक, दोनों पक्ष एलएसी पर स्थिरता सुनिश्चित करने के प्रभावी प्रयासों को जारी रखने को लेकर भी सहमत हुए।
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12वें दौर में 9 घंटे लंबी बातचीत
शनिवार को भारत और चीन के सैन्य कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए 12 वें दौर की वार्ता की थी। वार्ता करीब नौ घंटे चली लेकिन इसके नतीजे अनुमान के अनुरूप ही आए। दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच में सीमा क्षेत्र में तनाव घटाने, एक तरफा सैन्य कार्रवाई या एक दूसरे को उकसाने जैसी कार्रवाई से बचने के उपायों पर सहमति बनी, लेकिन गोगरा पोस्ट और हॉट स्प्रिंग समेत भारतीय चिंताओं वाले इलाके से अपनी फौज को पीछे ले जाने पर चीन की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला।
बता दें कि हॉट स्प्रिंग, गोगरा पोस्ट समेत अन्य स्थानों से चीनी सुरक्षा बलों की वापसी को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 14 जुलाई को अपने चीन के समकक्ष वांग यी से चिंताओं का साझा किया था। विदेश मंत्री ने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच में विसैन्यीकरण को लेकर पहली बनी सहमति का भी हवाला दिया था और शिकायत दर्ज कराते हुए अभी तरक पूर्ण विसैन्यीकरण न हो पाने का उल्लेख किया था। दोनों विदेश मंत्रियों के बीच में यह वार्ता संघाई सहयोग संगठन के विदेश मंत्रियों की बैठक से इतर दुशांबे में हुई थी। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में भारत की विसैन्यीकरण को लेकर चिंताओं को प्रमुखता से रेखांकित किया गया था।