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मालदीव में चीन की सहायता से बने ब्रिज के उद्घाटन का भारत ने किया बहिष्कार

Sun, 02 Sep 2018 09:53 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 02 Sep 2018 09:53 AM IST
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India boycotted the inaugration programme of China funded Sinamale bridge in Maldives
सिनामाले पुल

बीते दिनों में भारत और मालदीव के रिश्तों में आए तनाव के बीच भारत ने वहां होने वाले एक पुल के उद्घाटन का बहिष्कार किया है। यह पुल चीनी फ्लैगशिप इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के तहत बना है, जो राजधानी माले को एयरपोर्ट आईलैंड से जोड़ता है। इसके जरिए एक बार फिर भारत और हिंद महासागर के पड़ोसी देशों के बीच तनाव की स्थिति सामने आ गई है। इसी वजह से भारत ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर सिनामाले पुल के उद्घाटन समारोह से दूर रहने का निर्णय लिया। 

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भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। मालदीव के एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'उन्हें हमारी सरकार ने आमंत्रित किया था लेकिन वह नहीं आए।' भारतीय अधिकारियों ने इस मामले पर कोई टिप्पणी ना करने का फैसला किया है। मिश्रा ने उस समारोह मे ना जाने का निर्णय किया जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में चीनी पटाखों के बीच पुल का उद्घाटन किया गया। इस आयोजन में मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के सुरक्षा कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से अन्य देशों के राजदूतों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया।
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मालदीव के विपक्ष का आरोप है कि केवल चीनी राजदूत की कार को आयोजन स्थल तक जाने की अनुमति दी गई। सांसद और संयुक्त विपक्षी प्रवक्ता अहमद महलोफ ने कहा, 'श्रीलंका और बांग्लादेश के राजदूतों ने पुल के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार किया क्योंकि उनकी कारों को यामीन के सुरक्षाधिकारियों ने रोक दिया और उन्हें पैदल चलने के लिए कहा। केवल चीनी राजदूत की कार को आयोजन स्थल तक जाने की अनुमति दी गई। पारंपरिक दोस्तों की इतनी बेइज्जती।' 
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राष्ट्रपति यामीन ने 200 मिलियन डॉलर मे बने इस पुल को अपने राजनयिक इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि करार दिया है। यामीन पर सभी सरकारी संस्थाओं को नष्ट करने, अपने राजनितिक प्रतिद्वंदियों को जेल में बंद करने का आरोप है। इस पुल के जरिए यामीन को उम्मीद है कि महीने के अंत में होने वाले चुनाव में वह दोबारा सत्ता में लौट सकते हैं। बता दें कि मालदीव, मॉरिशस और सेशल्ज जैसे देशों को हेलिकॉप्टर, पेट्रोल बोट और सैटलाइट सहयोग देना हिंद महासागर में भारत की नौसेना रणनीति का हिस्सा रहा है।

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