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चिंताजनक: चूहों-चमगादड़ों के बीच बढ़ता संघर्ष इन्सानों के लिए खतरनाक, वायरस का जोखिम बढ़ा
Tue, 25 Nov 2025 04:52 AM IST
लव गौर
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: लव गौर
Updated Tue, 25 Nov 2025 04:52 AM IST
सार
जलवायु परिवर्तन व शहरीकरण ने शिकार व शिकारियों के बीच संतुलन बिगाड़ गया है। जो कि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए घातक है। चूहों-चमगादड़ों के बीच बढ़ता संघर्ष इन्सानों के लिए खतरनाक बनता जा रहा है।
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जलवायु परिवर्तन व शहरीकरण ने शिकार व शिकारियों के बीच बिगाड़ा संतुलन
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
चूहों और चमगादड़ों के बीच बढ़ता संघर्ष जलवायु परिवर्तन और मानव-परिवर्तनशील वातावरण का सबसे खतरनाक संकेत उभर सामने आया है। जलवायु परिवर्तन और मानव हस्तक्षेप ने पारिस्थितिक संतुलन को इतना बदल दिया है कि शिकारी व शिकार के बीच संबंध असामान्य और हिंसक रूप ले रहे हैं।
कुल मिलाकर जलवायु परिवर्तन ने पारिस्थितिक संतुलन उलट दिया है। एनवायरमेंटल साइंस यूरोप में प्रकाशित एक रिपोर्ट का कहना है कि जंगलों के सिकुड़ने, तापमान में उतार-चढ़ाव और भोजन स्रोतों में बदलाव के कारण चमगादड़ शहरों और मानव बस्तियों की ओर जा रहे हैं, वहीं चूहे मानव परिवर्तित आवासों में तेजी से फल-फूल रहे हैं।
एक तरफ चमगादड़ नए वातावरण में संघर्ष कर रहे हैं, दूसरी तरफ चूहे इस संघर्ष से फायदा उठा रहे हैं और यह असंतुलन सीधा जलवायु परिवर्तन का दुष्प्रभाव है। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी (यूएस) की प्रोफेसर रेना प्लोवराइट कहती हैं, मानव-परिवर्तित आवास चूहों को मजबूत और चमगादड़ों को कमजोर बना रहे हैं। यह सिर्फ वन्य संघर्ष नहीं यह धरती की बदलती जलवायु और अस्थिर होती प्रकृति का संकेत है। रिपोर्ट के अनुसार उत्तरी जर्मनी की अंधेरी गुफाओं में रिकॉर्ड किए गए एक इन्फ्रारेड वीडियो ने जीव विज्ञानी समुदाय को हिला दिया है।
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ये भी पढ़ें: चिंताजनक: कीटनाशकों से बढ़ रहा डिप्रेशन और याददाश्त की बीमारी; आईसीएमआर ने राष्ट्रीय कार्यक्रम की मांग की
तेजी से चमगादड़ों का शिकार कर रहे चूहे
जर्मनी की दो शहरी हाइबरनेशन गुफाओं में की गई निगरानी के दौरान व्यावहारिक पारिस्थितिकी और बायोअकूस्टिक्स लैब, म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री बर्लिन की प्रमुख मिर्याम क्नॉर्नश्मिल्ड के कैमरों में जो कैद हुआ, वह पहली नजर में अकेली घटना लगा। लेकिन दूसरी गुफा में 50 से अधिक चमगादड़ों की लाशें मिलने और प्रवेश-निकास मार्ग पर गश्त लगाते चूहों को देखने के बाद शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि यह एक दुर्लभ अपवाद नहीं, बल्कि उभरता हुआ बड़ा खतरा है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि छोटी संख्या में भी चूहे एक साल में हजारों चमगादड़ों को मार सकते हैं। न्यूजीलैंड की ग्रेटर शॉर्ट-टेल्ड बैट की विलुप्ति भी जहाजी चूहों के आक्रमण के कारण मानी जाती है जो इस पैटर्न की पुष्टि करती है।
ये भी पढ़ें: चिंताजनक: हिमाचल में बच्चे, बुजुर्ग भी मनोरोगी, एक साल में 76 हजार आए अस्पताल
इन्सानों में वायरस का जोखिम बढ़ा
चमगादड़ पहले से ही जलवायु परिवर्तन, आवास क्षरण और रोगों के दबाव में हैं। इस पर चूहों का शिकारी खतरा जोड़ना पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर अलार्म है। जलवायु परिवर्तन ने मनुष्यों को ऐसे क्षेत्रों में विस्तार करने पर मजबूर किया, जहां पहले वन्यजीवों का एकांत आवास था। इस वजह से चूहे मानव समाज के संपर्क में अधिक आए। चमगादड़ भी तनाव की वजह से भोजन और आवास के लिए शहरों में प्रवेश करने लगे, इसलिए दोनों प्रजातियों के बीच टकराव में वृद्धि हो रही है। इसकी वजह से इंसानों तक फैलने वाले वायरस का खतरा काफी बढ़ जाता है।
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कुल मिलाकर जलवायु परिवर्तन ने पारिस्थितिक संतुलन उलट दिया है। एनवायरमेंटल साइंस यूरोप में प्रकाशित एक रिपोर्ट का कहना है कि जंगलों के सिकुड़ने, तापमान में उतार-चढ़ाव और भोजन स्रोतों में बदलाव के कारण चमगादड़ शहरों और मानव बस्तियों की ओर जा रहे हैं, वहीं चूहे मानव परिवर्तित आवासों में तेजी से फल-फूल रहे हैं।
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एक तरफ चमगादड़ नए वातावरण में संघर्ष कर रहे हैं, दूसरी तरफ चूहे इस संघर्ष से फायदा उठा रहे हैं और यह असंतुलन सीधा जलवायु परिवर्तन का दुष्प्रभाव है। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी (यूएस) की प्रोफेसर रेना प्लोवराइट कहती हैं, मानव-परिवर्तित आवास चूहों को मजबूत और चमगादड़ों को कमजोर बना रहे हैं। यह सिर्फ वन्य संघर्ष नहीं यह धरती की बदलती जलवायु और अस्थिर होती प्रकृति का संकेत है। रिपोर्ट के अनुसार उत्तरी जर्मनी की अंधेरी गुफाओं में रिकॉर्ड किए गए एक इन्फ्रारेड वीडियो ने जीव विज्ञानी समुदाय को हिला दिया है।
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तेजी से चमगादड़ों का शिकार कर रहे चूहे
जर्मनी की दो शहरी हाइबरनेशन गुफाओं में की गई निगरानी के दौरान व्यावहारिक पारिस्थितिकी और बायोअकूस्टिक्स लैब, म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री बर्लिन की प्रमुख मिर्याम क्नॉर्नश्मिल्ड के कैमरों में जो कैद हुआ, वह पहली नजर में अकेली घटना लगा। लेकिन दूसरी गुफा में 50 से अधिक चमगादड़ों की लाशें मिलने और प्रवेश-निकास मार्ग पर गश्त लगाते चूहों को देखने के बाद शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि यह एक दुर्लभ अपवाद नहीं, बल्कि उभरता हुआ बड़ा खतरा है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि छोटी संख्या में भी चूहे एक साल में हजारों चमगादड़ों को मार सकते हैं। न्यूजीलैंड की ग्रेटर शॉर्ट-टेल्ड बैट की विलुप्ति भी जहाजी चूहों के आक्रमण के कारण मानी जाती है जो इस पैटर्न की पुष्टि करती है।
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इन्सानों में वायरस का जोखिम बढ़ा
चमगादड़ पहले से ही जलवायु परिवर्तन, आवास क्षरण और रोगों के दबाव में हैं। इस पर चूहों का शिकारी खतरा जोड़ना पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर अलार्म है। जलवायु परिवर्तन ने मनुष्यों को ऐसे क्षेत्रों में विस्तार करने पर मजबूर किया, जहां पहले वन्यजीवों का एकांत आवास था। इस वजह से चूहे मानव समाज के संपर्क में अधिक आए। चमगादड़ भी तनाव की वजह से भोजन और आवास के लिए शहरों में प्रवेश करने लगे, इसलिए दोनों प्रजातियों के बीच टकराव में वृद्धि हो रही है। इसकी वजह से इंसानों तक फैलने वाले वायरस का खतरा काफी बढ़ जाता है।