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दिल्ली: मोहन भागवत का बड़ा बयान, बोले- बीते 75 वर्षों में हमें जितना आगे बढ़ना चाहिए था, उतना नहीं बढ़े
Sun, 21 Nov 2021 08:44 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Sun, 21 Nov 2021 08:44 PM IST
सार
संघ प्रमुख मोहन भागवत दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित संत ईश्वर सम्मान 2021 कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कई अहम बातें कहीं।
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मोहन भागवत
- फोटो : ANI
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विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि बीते 75 वर्षों में जितना आगे बढ़ना चाहिए था हम उतना आगे नहीं बढ़े हैं। देश को आगे ले जाने के रास्ते पर चलेंगे तो आगे बढ़ेंगे, उस रास्ते पर नहीं चले इसलिए आगे नहीं बढ़े। संघ प्रमुख मोहन भागवत दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित संत ईश्वर सम्मान 2021 कार्यक्रम में बोल रहे थे।
दुनिया में सबसे अधिक महापुरुष भारत में हुए
भागवत ने कहा कि हम भगवान जय श्रीराम का जोर से नारा लगाते हैं, लेकिन उनके जैसा हमें बनना भी चाहिए। हम सोचते हैं कि वो तो भगवान थे। भरत जैसे भाई पर प्रेम करना तो भगवान ही कर सकते हैं, हम नहीं कर सकते। ऐसी सोच सामान्य आदमी की रहती है। इसलिए वे उस राह पर नहीं चल पाते। अपना स्वार्थ छोड़कर लोगों की भलाई करने का काम कठिन होता है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के सारे देश मिलाकर अब तक जितने महापुरुष हुए होंगे उतने हमारे देश में पिछले 200 वर्षों में ही हो गए। एक-एक का जीवन सर्वांगीण जीवन की राह उजागर करता है।
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इस कार्यक्रम में समाज की निस्वार्थ भावना से सेवा करने वाले संगठनों और व्यक्तियों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संत ईश्वर फाउंडेशन द्वारा राष्ट्रीय सेवा भारती के सहयोग से किया गया था। इस मौके पर कई गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं। संत ईश्वर सम्मान प्रति वर्ष ऐसे संगठनों एवं व्यक्तियों को दिया जाता है जो समाज की नजरों से दूर निस्वार्थ भाव से समाजसेवा का कार्य कर रहे हैं।
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दुनिया में सबसे अधिक महापुरुष भारत में हुए
भागवत ने कहा कि हम भगवान जय श्रीराम का जोर से नारा लगाते हैं, लेकिन उनके जैसा हमें बनना भी चाहिए। हम सोचते हैं कि वो तो भगवान थे। भरत जैसे भाई पर प्रेम करना तो भगवान ही कर सकते हैं, हम नहीं कर सकते। ऐसी सोच सामान्य आदमी की रहती है। इसलिए वे उस राह पर नहीं चल पाते। अपना स्वार्थ छोड़कर लोगों की भलाई करने का काम कठिन होता है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के सारे देश मिलाकर अब तक जितने महापुरुष हुए होंगे उतने हमारे देश में पिछले 200 वर्षों में ही हो गए। एक-एक का जीवन सर्वांगीण जीवन की राह उजागर करता है।
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इस कार्यक्रम में समाज की निस्वार्थ भावना से सेवा करने वाले संगठनों और व्यक्तियों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संत ईश्वर फाउंडेशन द्वारा राष्ट्रीय सेवा भारती के सहयोग से किया गया था। इस मौके पर कई गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं। संत ईश्वर सम्मान प्रति वर्ष ऐसे संगठनों एवं व्यक्तियों को दिया जाता है जो समाज की नजरों से दूर निस्वार्थ भाव से समाजसेवा का कार्य कर रहे हैं।