सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक का विरोध करेगी केंद्र सरकार
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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में महिलाओं के अधिकार को आधार बनाकर तीन तलाक का विरोध करने का फैसला किया है। सरकार ने इसे अपरिहार्य करार दिया और कहा है कि तीन तलाक के मसले को समान नागरिक संहिता के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए।
सूत्रों ने बताया कि इस महीने के अंत तक कानून मंत्रालय इस मसले पर ठोस जवाब दाखिल कर देगा। इस मसले पर गृह, वित्त और महिला व बाल विकास जैसे मंत्रालयों के साथ सलाह-मशविरे के बाद यह फैसला किया गया।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमें इस मसले को समान नागरिक संहिता के नजरिये से नहीं देखना चाहिए। हमें महिलाओं के अधिकार के संदर्भ में बात करने की जरूरत है। हमारा जवाब केवल अधिकारों को लेकर होगा।
तीन तलाक का मसला भारत में
एक महिला के पास उसका अधिकार अपरिहार्य है और संविधान के मुताबिक उसके पास एक पुरुष की तरह सभी अधिकार हैं। अदालत का हर फैसला इसी सामान अधिकार पर टिका है। तीन तलाक का मसला पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी नहीं है। केवल हमारे यहां यह बना हुआ है।
मुस्लिम समुदाय में प्रचलित बहुविवाह, तीन तलाक और निकाह हलाला के मसले पर पिछले सप्ताह गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, रक्षा मंत्री मनोहर परिकर और महिला व बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने सरकार के रुख के बारे में गंभीर चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक सभी वरिष्ठ मंत्रियों के बीच इस बात पर सहमति थी कि इस विवादित मसले को महिलाओं के अधिकारों के नजरिये से देखने की जरूरत है।
इससे पहले इसी महीने सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर तीन तलाक से जुड़ी तमाम याचिकाओं पर जवाब देने को कहा था। उत्तराखंड की शायरा बानो ने सबसे पहले याचिका दाखिल कर तीन तलाक, बहुविवाह और निकाह हलाला को चुनौती दी थी।