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26/11 हमले में कसाब ने बिटिया छीनी, मगर पिता ने उस आतंकी की सुरक्षा में नहीं की कोई चूक

Mon, 26 Nov 2018 06:58 PM IST
नई दिल्ली, जितेंद्र भारद्वाज  
नई दिल्ली, जितेंद्र भारद्वाज   Updated Mon, 26 Nov 2018 06:58 PM IST
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In 26/11 attack Kasab killed daughter, but father did not protect the terrorist, no mistake
आतंकी कसाब
जिस पिता ने अपनी लाडली को गोद में खिलाया, अंगुली पकड़ कर उसे चलना सिखाया।इसके बाद वह दिन भी आया जब वह पिता अपनी बेटी के हाथ पीले करने की तैयारी करने लगा। उसे नहीं मालूम था कि लिखने वाले ने उसके लिए कुछ और ही लिख दिया था। बेटी को आतंकी कसाब ने मार दिया और उसके पिता को ड्यूटी व जज्बात, इनमें से किसी एक राह पर चलने की चुनौती दे दी। बेटी जैसमीन को खो चुके पिता ने जज्बात पर काबू पाकर अपनी ड्यूटी की राह पकड़ ली। 
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इत्तेफाक देखिए कि मुंबई हमले के बाद में कसाब की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उस अर्धसैनिक बल को मिली, जिसके ऑपरेशन की जिम्मेदारी जैसमीन के पिता निभा रहे थे। आईटीबीपी के तत्कालीन आईजी (ऑपरेशन) एमएस भुर्जी ने अपनी बिटिया के हत्यारे को फांसी के फंदे पर लटकने तक उसकी सुरक्षा में कोई चूक नहीं होने दी। भुर्जी 2017 में रिटायर हुए हैं और अब मोहाली में रहते हैं।
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बता दें कि 26/11 के मुंबई हमले के दौरान होटल ओबरॉय ट्रायडेंट में आतंकवादियों की पहली गोली रिसेप्शन पर मौजूद जैसमीन को लगी थी। कसाब की फांसी के बाद उस पिता के दिल को थोड़ा सुकून मिला, जिसने उसकी लाडली जैसमीन को छीन लिया था। एमएस भुर्जी का कहना था कि घाव अभी नहीं भरे। थोड़ा सुकून इसलिए है कि निर्दोष लोगों को मारने वाले कसाब की फांसी से वे देश सबक लेंगे, जो तोड़फोड़ की मंशा रखते हैं। 
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बीते दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि होटल प्रबंधन की पढ़ाई करने के बाद जैसमीन ताज मुंबई में ट्रेनिंग के लिए गई थी। हमें ही नहीं, बल्कि परिवार और रिश्तेदारों को भी वह खूब हंसाती थी। बेशक वह फोन पर बात करती, मगर ऐसा लगता था कि जैसे सामने बैठकर बोल रही है। ड्यूटी के दौरान भी उसका यह अंदाज नहीं बदला। मोहाली में अंतिम संस्कार के वक्त होटल प्रबंधन से आए अधिकारियों ने जब परिवार के साथ उसकी यादें सांझा की तो कोई अपने आंसू नहीं रोक पाया था।

मुंबई हमला और कसाब को फांसी: यह एक उदाहरण बने

एमएस भुर्जी ने कहा कि इस तरह के मामलों का निपटारा होने में दशक लग जाते हैं। कसाब के मामले में कानून की चुस्ती-फुर्ती काबिल-ए-तारीफ है।यह फैसला एक उदाहरण बनना चाहिए। हम बदले की भावना से काम नहीं करते। खासतौर से आतंकियों का समर्थन करने वाले देश अब यह सोचें कि भारत इस तरह का निर्णय भी ले सकता है।
 
कसाब की सुरक्षा में आईटीबीपी के 34 करोड़ खर्च

मुंबई की आर्थर रोड जेल में पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब की सुरक्षा पर आईटीबीपी के 34 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इस राशि का भुगतान होने में कई साल लग गए। लम्बे समय तक महाराष्ट्र सरकार और गृह मंत्रालय यही तय नहीं कर पाए कि इस राशि का भुगतान कौन करेगा। आईटीबीपी के दो सौ कमांडों कसाब की सुरक्षा में लगे थे। कसाब के मामले की सुनवाई के लिए जेल में जो खास सुरंग बनाई गई थी, उसे बमरोधी बनाने के लिए भी आईटीबीपी ने ही प्लान तैयार किया था।
कसाब की सुरक्षा पर खर्च राशि से 22 हजार एके-47 खरीदी जा सकती थी...

आईटीबीपी के अफसरों का कहना है कि कसाब की सुरक्षा पर खर्च हुए करोड़ों रुपये प्रत्यक्ष तौर से व्यर्थ चले गए। भारत-चीन सीमा या नक्सलवाद प्रभावित इलाकों में आईटीबीपी के जवान लगते तो उनका सार्थक नतीजा भी सामने आता। इतना ही नहीं, कसाब की सुरक्षा पर खर्च हुई राशि से 22600 एके-47 या फिर एक्स-95 जैसे अत्याधुनिक हथियार खरीदे जा सकते थे।
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