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इमरान की जीत ने बढ़ाई भारत की चिंता, पाकिस्तान से रिश्ते और बिगड़ने की आशंका

Fri, 27 Jul 2018 05:21 AM IST
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 27 Jul 2018 05:21 AM IST
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Imran victory raised India concerns, called Taliban Khan is said to be generous towards terrorists
पाकिस्तान के आम चुनाव में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी को मिली निर्णायक बढ़त ने कई कारणों से भारत की चिंता बढ़ा दी है। इस चुनाव में पाकिस्तान की सेना ने अप्रत्यक्ष रूप से जिस प्रकार पीटीआई के मुखिया इमरान खान को समर्थन दिया, उससे भारत को लगता है कि नई सरकार भविष्य में उस पाकिस्तानी सेना की कठपुतली होगी। सेना शुरू से ही भारत के साथ बेहतर रिश्ते की विरोधी रही है। इसके अलावा आतंकी संगठनों को दिया जाने वाला समर्थन भी भारत के लिए चिंता की बात है, जिससे पाकिस्तान में उन्हें तालिबान खान नाम दिया गया। 
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हालांकि पाकिस्तान चुनाव के रुझानों पर चिंता का माहौल बन रहा है लेकिन भारत अपनी प्रतिक्रिया नतीजों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही देगा। दरअसल चुनाव प्रचार के दौरान और उससे पहले इमरान ने जमकर भारत विरोधी बयान दिए। कश्मीर मुद्दे पर भारत को अपने देश की सेना की ताकत की याद दिलाई। इसके अलावा पूर्व पीएम और पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज के मुखिया नवाज शरीफ पर पीएम नरेंद्र मोदी से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए उन्हें पाकिस्तान का मीर जाफर घोषित किया। 
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भारत की सबसे बड़ी चिंता इमरान की आतंकी संगठनों के प्रति हमदर्दी से है। अंतरराष्ट्रीय दबाव खासतौर पर अमेरिका की खुली चेतावनी के बाद सेना की आतंकी संगठनों के खिलाफ मुहिम में इमरान ने पलीता लगा दिया। तब इमरान ने मानवाधिकार को ढाल बनाते हुए खुल कर इस मुहिम का विरोध किया। 
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नतीजा यह निकला कि सेना ने सियासी विरोध के बहाने आतंकियों के खिलाफ मुहिम को ठंडे बस्ते में डाल दिया। माना जा रहा है कि यह इमरान और सेना की मिलीभगत थी। फिर इस चुनाव में सेना ने परोक्ष रूप से पीटीआई की मदद की। यह स्थिति भी भारत को लिए चिंता पैदा करने वाली है। 

दरअसल पाकिस्तान की सेना ने हर बार दोनों देशों की शांति के प्रयासों को धक्का पहुंचाया है। वर्ष 1999 में नवाज और तत्कालीन पीएम नवाज के बीच बन रहे बेहतर समीकरणों से बंधी शांति की उम्मीदों पर तब तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ ने कारगिल जंग के जरिए पानी फेरा था। 


इसी प्रकार वर्ष 2008 में दोनों देशों के बीच बन रहे बेहतर संबंध की संभावनाओं को मुंबई आतंकी हमले से, तो नई सरकार के आने के बाद समग्र वार्ता की ओर बढ़ रहे दोनों देशों को रोकने के लिए पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला करा कर शांति की कोशिशों पर पलीता लगाया। ऐसे में भारत मान रहा है कि अगर इमरान सरकार चलाने के दौरान सेना की कठपुतली या मुखौटा साबित हुए तो दोनों देशों के बीच पहले से चली आ रही तनातनी और उग्र रूप लेगी। 
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