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तीन तलाक बिल पास नहीं हुआ तो विपक्ष को सुधार विरोधी बताएगी BJP
अमर उजाला ब्यूरो / नई दिल्ली
Updated Tue, 02 Jan 2018 04:26 AM IST
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ट्रिपल तलाक
- फोटो : सांकेतिक चित्र
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एक साथ तीन तलाक को गैरजमानती अपराध बनाने संबंधी बिल लोकसभा में पारित कराने के बाद भाजपा सियासी मोर्चे पर निश्चिंत है। नरम हिंदुत्व की राह पर चल रही कांग्रेस में बनी असमंजस की स्थिति के बीच पार्टी राज्यसभा में इस बिल को पारित कराने को ले कर ज्यादा माथापच्ची नहीं कर रही। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि बिल के राज्यसभा में लटकने या पारित होने जैसी दोनों स्थितियों में भाजपा सियासी फायदे में रहेगी। बिल पारित न होने की स्थिति में पार्टी विपक्ष पर एक बड़े सुधार की राह में रोड़ा अटकाने का आरोप लगाएगी तो पारित होने पर कानून बनाने का उसे स्वाभाविक श्रेय मिलेगा।
कांग्रेस की इस बिल के कुछ प्रावधानों पर आपत्तियां तो है, मगर वह इस पर स्पष्ट राजनीतिक लाइन तय नहीं कर पा रही। सीधे बिल के विरोध में उतरने पर उसके नरम हिंदुत्व की छवि पर उल्टा असर पड़ेगा, जबकि चुप्पी साधने पर सुधार का सारा श्रेय भाजपा ले जाएगी। फिलहाल पार्टी में एक साथ तीन तलाक को गैरजमानती के बदले जमानती अपराध बनाने की मांग करने पर मंथन हो रहा है। पार्टी चाहती है कि इस बिल को सिलेक्ट कमेटी को भेजा जाय। ऐसे में उसे अपनी रणनीति पर सोचने के लिए समय मिलेगा।
पढ़ें- तीन तलाक पर यूपी के सबसे बड़े राजनीतिक घराने की 'छाेटी बहू का रिएक्शन'
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कांग्रेस की इस बिल के कुछ प्रावधानों पर आपत्तियां तो है, मगर वह इस पर स्पष्ट राजनीतिक लाइन तय नहीं कर पा रही। सीधे बिल के विरोध में उतरने पर उसके नरम हिंदुत्व की छवि पर उल्टा असर पड़ेगा, जबकि चुप्पी साधने पर सुधार का सारा श्रेय भाजपा ले जाएगी। फिलहाल पार्टी में एक साथ तीन तलाक को गैरजमानती के बदले जमानती अपराध बनाने की मांग करने पर मंथन हो रहा है। पार्टी चाहती है कि इस बिल को सिलेक्ट कमेटी को भेजा जाय। ऐसे में उसे अपनी रणनीति पर सोचने के लिए समय मिलेगा।
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क्यों हैं भाजपा के पौ बारह
triple talaq
सरकार के एक मंत्री के मुताबिक बिल मंगलवार या बुधवार को पेश हो सकता है। अपनी ओर से रणनीति बनाने के बदले हमारी निगाहें विपक्ष की रणनीति पर है। विपक्ष में शामिल अलग-अलग दलों की अलग-अलग आपत्तियां हैं। सरकार यह देखना चाहती है कि क्या विपक्ष अपनी आपत्तियों पर सहमति बनाने में कामयाब होता है या नहीं। कामयाब न होने की स्थिति में सरकार बिल पारित कराने के लिए जरूरी 33 मतों का जुगाड़ करने का रास्ता तलाशेगी। अगर विपक्ष आपत्तियों पर एकमत हुआ तो सरकार बिल को सिलेक्ट कमेटी को भेजे जाने की मांग स्वीकार कर लेगी।
तीन तलाक मुद्दे पर भाजपा के पौ बारह होने के कारण हैं। अपवादों को छोड़ दें तो मुस्लिम मतदाताओं ने कभी भाजपा के पक्ष में वोट नहीं किया है। भाजपा तीन तलाक, हज यात्रा में सुधार के जरिए इस बिरादरी के महिलाओं के एक तबके का समर्थन हासिल करने की कोशिश में है। अगर उसे अपनी इस रणनीति में सफलता नहीं भी मिली तो उसे किसी तरह का सियासी नुकसान नहीं होगा, क्योंकि यह बिरादरी हमेशा से भाजपा से दूर रही है।
तीन तलाक मुद्दे पर भाजपा के पौ बारह होने के कारण हैं। अपवादों को छोड़ दें तो मुस्लिम मतदाताओं ने कभी भाजपा के पक्ष में वोट नहीं किया है। भाजपा तीन तलाक, हज यात्रा में सुधार के जरिए इस बिरादरी के महिलाओं के एक तबके का समर्थन हासिल करने की कोशिश में है। अगर उसे अपनी इस रणनीति में सफलता नहीं भी मिली तो उसे किसी तरह का सियासी नुकसान नहीं होगा, क्योंकि यह बिरादरी हमेशा से भाजपा से दूर रही है।