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रक्षा मंत्री ने कहा- वरिष्ठता सिर्फ पैमाना होता तो कंप्यूटर ही चुन लेता सेना प्रमुख

Wed, 04 Jan 2017 08:58 AM IST
एजेंसी/ नई दिल्ली
एजेंसी/ नई दिल्ली Updated Wed, 04 Jan 2017 08:58 AM IST
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If seniority only criterion, even computer would have selected Army chief SAYS Defense Minister
फाइल फोटो - फोटो : PTI

नए सेना प्रमुख बिपिन रावत की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद पर रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने सफाई देते हुए कहा कि इस मामले में सरकार ने सभी उचित प्रक्रियाओं का पालन किया है। उन्होंने कहा कि चयन के लिए यदि वरिष्ठता ही एकमात्र पैमाना होता तो कंप्यूटर भी जन्मतिथि के आधार पर सेना प्रमुखों का चयन कर सकता था। फिर किसी कैबिनेट कमेटी या उपयुक्त प्रक्रिया का सहारा लेने की जरूरत नहीं पड़ती। 

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परिकर सेना प्रमुखों के चयन में अपनाए जाने वाले ‘वरिष्ठता के सिद्धांत’ पर पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘वरिष्ठता का सिद्धांत’ कोई नियम नहीं वरन एक प्रक्रिया है जिसमें कमांडरों का मूल्यांकन उनके प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है।
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मैं यह मानता हूं कि जिन उम्मीदवारों पर विचार किया गया, वे सभी अच्छे और सक्षम अधिकारी थे। यही वजह है कि चयन में देरी हुई। संभवत: जनरल बिपिन रावत का चयन परिस्थितियों की आवश्यकता थी।

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'जन्मतिथि के आधार पर चयन कंप्यूटर भी कर सकता है'

If seniority only criterion, even computer would have selected Army chief SAYS Defense Minister
फाइल फोटो - फोटो : Getty

परिकर ने कहा कि ‘वरिष्ठता के सिद्धांत’ के लिए किसी दूसरी प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती। जन्मतिथि के आधार पर चयन कंप्यूटर भी कर सकता है। ऐसे चयन के लिए न तो किसी रक्षा मंत्री और न ही किसी मंत्रिमंडलीय समिति की आवश्यकता है।

यदि ऐसा ही करना होता तो सरकार अधिकारियों के प्रोफाइल के अध्ययन पर चार से पांच महीने क्यों खर्च करती। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘मैं आश्वस्त करता हूं कि सेना प्रमुख के चयन में सभी तय प्रक्रियाओं का पालन किया गया है, किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है।’

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने सरकार ने सेना के दो बड़े अधिकारियों, लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी और लेफ्टिनेंट जनरल पीएम हारिज की वरिष्ठता को दरकिनार कर जनरल बिपिन रावत को सेना प्रमुख के तौर पर नियुक्त किया था। इस नियुक्ति के मामले में सरकार पर सन् 1983 से चले आ रहे ‘वरिष्ठता के सिद्धांत’ को नजरअंदाज करने के आरोप लगे थे।

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