रक्षा मंत्री ने कहा- वरिष्ठता सिर्फ पैमाना होता तो कंप्यूटर ही चुन लेता सेना प्रमुख
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नए सेना प्रमुख बिपिन रावत की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद पर रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने सफाई देते हुए कहा कि इस मामले में सरकार ने सभी उचित प्रक्रियाओं का पालन किया है। उन्होंने कहा कि चयन के लिए यदि वरिष्ठता ही एकमात्र पैमाना होता तो कंप्यूटर भी जन्मतिथि के आधार पर सेना प्रमुखों का चयन कर सकता था। फिर किसी कैबिनेट कमेटी या उपयुक्त प्रक्रिया का सहारा लेने की जरूरत नहीं पड़ती।
परिकर सेना प्रमुखों के चयन में अपनाए जाने वाले ‘वरिष्ठता के सिद्धांत’ पर पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘वरिष्ठता का सिद्धांत’ कोई नियम नहीं वरन एक प्रक्रिया है जिसमें कमांडरों का मूल्यांकन उनके प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है।
मैं यह मानता हूं कि जिन उम्मीदवारों पर विचार किया गया, वे सभी अच्छे और सक्षम अधिकारी थे। यही वजह है कि चयन में देरी हुई। संभवत: जनरल बिपिन रावत का चयन परिस्थितियों की आवश्यकता थी।
'जन्मतिथि के आधार पर चयन कंप्यूटर भी कर सकता है'
परिकर ने कहा कि ‘वरिष्ठता के सिद्धांत’ के लिए किसी दूसरी प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती। जन्मतिथि के आधार पर चयन कंप्यूटर भी कर सकता है। ऐसे चयन के लिए न तो किसी रक्षा मंत्री और न ही किसी मंत्रिमंडलीय समिति की आवश्यकता है।
यदि ऐसा ही करना होता तो सरकार अधिकारियों के प्रोफाइल के अध्ययन पर चार से पांच महीने क्यों खर्च करती। रक्षा मंत्री ने कहा, ‘मैं आश्वस्त करता हूं कि सेना प्रमुख के चयन में सभी तय प्रक्रियाओं का पालन किया गया है, किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है।’
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने सरकार ने सेना के दो बड़े अधिकारियों, लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी और लेफ्टिनेंट जनरल पीएम हारिज की वरिष्ठता को दरकिनार कर जनरल बिपिन रावत को सेना प्रमुख के तौर पर नियुक्त किया था। इस नियुक्ति के मामले में सरकार पर सन् 1983 से चले आ रहे ‘वरिष्ठता के सिद्धांत’ को नजरअंदाज करने के आरोप लगे थे।