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सीजीएचएस सूची में शामिल अस्पतालों ने आपातकालीन इलाज के लिए किया मना तो पैनल से कटेगा नाम
Mon, 21 Sep 2020 11:24 AM IST
Harendra Chaudhary
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Mon, 21 Sep 2020 11:24 AM IST
सार
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक किसी भी आपातकालीन स्थिति में सीजीएचएस लाभार्थी ऐसे अस्पताल में भर्ती हो सकता है, जो सीजीएचएस पैनल पर आता हो...
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फाइल फोटो
- फोटो : PTI
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विस्तार
केंद्र सरकार के करीब 35 लाख कर्मी जो सीजीएचएस सेवा का लाभ उठाते हैं, उनके लिए राहत की खबर है। सीजीएचएस की सूची में शामिल कोई भी अस्पताल किसी सदस्य को आपातकालीन इलाज के लिए मना नहीं कर सकता। बिना किसी कारण के यदि वह ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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ये सीजीएचएस अस्पताल मरीज को दाखिल करने से भी मना नहीं कर सकते और न ही उसके परिजनों से एडवांस पेमेंट मांग सकते हैं। ऐसे अस्पताल का नाम तुरंत प्रभाव से सीजीएचएस वाली सूची से हटा दिया जाएगा। मौजूदा समय में सरकारी कर्मियों को 71 शहरों में सीजीएचएस की सेवा मुहैया कराई जा रही है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक किसी भी आपातकालीन स्थिति में सीजीएचएस लाभार्थी ऐसे अस्पताल में भर्ती हो सकता है, जो सीजीएचएस पैनल पर आता हो। इसके लिए सीजीएचएस कार्ड धारक व्यक्ति को किसी से पूर्व इजाजत लेने की आवश्यकता नहीं है।
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मंत्रालय की जानकारी में आया है कि सीजीएचएस वाली सूची में शामिल कई अस्पताल मरीज को दाखिल करने से मना करते हैं। इतना ही नहीं, मंत्रालय को यह शिकायत भी मिली है कि ऐसे अस्पताल में जब आपातकालीन स्थिति के तहत कोई मरीज पहुंचता है तो उससे सीजीएचएस वेलनेस सेंटर का रेफरल मेमो मांगा जाता है।
ऐसी स्थिति में मरीज की जान जोखिम में पड़ जाती है। मरीज के परिजनों को इधर उधर दौड़ना पड़ता है। भारत सरकार और सीजीएचएस सूची में शामिल अस्पतालों के बीच में जो समझौता हुआ है, उसके नियमानुसार, ये अस्पताल ऐसा नहीं कर सकते हैं। वे किसी भी आपातस्थिति वाले कर्मी को यह कह कर वापस नहीं लौटा सकते कि उसके पास सीजीएचएस का रेफरल मेमो नहीं है। बिना किसी ठोस कारण के यदि कोई अस्पताल इस तरह की हरकत करता है तो उसका नाम सीजीएचएस सूची से हटा दिया जाएगा।