आईसीएमआर ने कहा, दूसरा राष्ट्रीय सीरो सर्वे सितंबर के पहले सप्ताह में होगा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 26 Aug 2020 05:16 AM IST
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI

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भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के निदेशक डॉ बलराम भार्गव ने सीरो सर्वे और वैक्सीन पर चल रहे शोध के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने मंगलवार को देर शाम दिल्ली में यह जानकारी दी। इसके अनुसार दूसरा राष्ट्रीय सीरो सर्वे सिंतबर तक आ जाएगा।
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सीरोलॉजिकल सर्वे एक तरह से खून की जांच है जो पता लगाती है कि हमारे शरीर में रोग से लड़ने की कितनी क्षमता है। कोरोना वायरस एक नए तरह का है ऐसे में इसे लेकर प्रतिरोधक क्षमता का खासा महत्व है। दूसरा राष्ट्रीय सीरो सर्वे 17 अगस्त से शुरु हुआ है। इसमें देश भर से नमूने लिए जा रहे हैं।
डॉ भार्गव ने बताया कि दूसरा राष्ट्रीय सीरो सर्वे सिंतबर के पहले सप्ताह तक पूरा हो जाएगा। डॉ भार्गव ने कहा उन्हें उम्मीद है कि यह इस सप्ताह इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में दिखाई देना चाहिए। इस  सर्वे का मकसद लोगों में कोरोना संक्रमण और उससे लड़ने के लिए बनने वाली प्रतिरोधक क्षमता को लेकर पता लगाना है।

कोरोना संक्रमण को लेकर वैक्सीन को लेकर चल रहे ट्रायल पर उन्होंने बताया कि भारत में तीन कोरोन वैक्सीन का परीक्षण चल रहा है। सीरम  की वैक्सीन का 2 (बी) फेज और 3 फेज ट्रायल टेस्ट चल रहा है। भारत बायोटेक और जेडस कैडिला की वैक्सीन ने 1 फेज के ट्रायल टेस्ट को पूरा कर लिया है।

सीरो सर्वे को लेकर बढ़ रही जिज्ञासा की बड़ी वजह  है दिल्ली का ताजा सीरो सर्वे, एक अगस्त से सात अगस्त तक किए गए दिल्ली के दूसरे सीरोलॉजिकल सर्वें के दिल्ली में चौंकाने वाले नतीजे मिले है। ऐसे में राष्ट्रीय सर्वे का इंतजार बेसब्री से किया जा रहा है।  

दिल्ली के सर्वे के मुताबिक 5 साल से 17 साल की आयु वर्ग में कोरोना का मामले सबसे ज्यादा देखने को मिले हैं। जबकि पहले कहा जा रहा था कि कोरोना का वायरस सबसे अधिक बड़ी उम्र के लोगों को अपना शिकार बना रहा है।  

सर्वे के नतीजों ने सबकों चौंका दिया इसमें पाया गया 5 से 17 साल के 34.7 फीसदी लोगों में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता विकसित है। इसी क्त्रस्म में 50 साल से अधिक आयु वाले 31.2 फीसदी लोगों में यह पाया गया।  

सर्वे के अनुसाक 18 से 49 साल के मध्य के 28.5 फीसदी लोगों में कोरोना के एंटीबॉडीज पाए गए। इन नतीजों के बाद अब चिकित्सा विशेषज्ञों और कोरोना संक्रमण की देखभाल कर रहे चिकित्सकों की निगाह राष्ट्रीय सर्वे पर लगी है।

डॉ बलराम भार्गव ने बताया  देश में कोरोना संक्त्रस्मण को रोकने के लिए सभी एकजुट होकर तेजी से काम कर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि देश में कोरोना संक्रमण की जांच में 30 जनवरी को हमारी क्षमता 10 टेस्ट प्रतिदिन थी, 15 मार्च को 1000 टेस्ट प्रतिदिन, 15 मई 95000 टेस्ट और 21 अगस्त को हम 10 लाख टेस्ट प्रतिदिन के लैंडमार्क पर पहुंच गए हैं।

उन्होंने कहा जांच, परीक्षण और उपचार के माध्यम से हम कोरोना संक्रमण की जंग तो जीतने  के लिए तत्पर है। यही वजह है कि एक्टिव केसों से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। उन्होंने युवाओं और घर से बाहर निकलने वालों को मास्क अनिवार्य रुप से प्रयोग करने की सलाह भी दी।

इन सबके मध्य एक राहत भरी खबर यह भी है कि आईसीएमआर से मिली जानकारी के मुताबिक उनके द्वारा  24 अगस्त तक कोरोना वायरस के कुल 3 करोड़ 72 लाख सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं, जिनमें से 9 लाख सैंपल की टेस्टिंग पिछले 24 घंटे में हुई है।  इसमें  संक्त्रस्मितों की दर 7 प्रतिशत से कम है।

यानि मार्च से कोरोना की दुश्वारियों से जूझ रहे देश में पिछले 24 घंटों में 61 हजार मरीज आए हैं। इसमें एक्टिव मामलों से ठीक होने वाले केस ज्यादा हैं।  एक्टिव केस सात लाख 4 हजार हैं, वहीं ठीक होने वाली की संख्या इससे तीगुनी 24 लाख है।
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