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कश्मीर मुद्दे पर इस्तीफा देने वाले आईएएस गोपीनाथन को मिला तुरंत ड्यूटी पर लौटने का आदेश
Thu, 29 Aug 2019 12:25 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Thu, 29 Aug 2019 12:25 PM IST
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आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन
- फोटो : PTI
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भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी न दिए जाने के मुद्दे पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें तुरंत अपनी ड्यूटी पर वापस लौटने के लिए कहा गया है। केरल के रहने वाले कन्नन इस्तीफा देने से पहले केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली में तैनात थे। वह 2012 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।
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33 साल के आईएएस अधिकारी गोपीनाथ को इस्तीफा मंजूर होने तक अपने काम पर वापस लौटने के लिए कहा गया है। गोपीनाथ केंद्र शासित प्रदेश के पावर एंड नॉन कन्वेंशनल ऑफ एनर्जी में सचिव पद पर कार्यरत थे। उन्होंने 21 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्रालय को अपना इस्तीफा सौंपा था। जिसके जवाब में उन्हें काम पर लौटने के लिए कहा गया है।
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27 अगस्त को जारी हुए नोटिस पर दमन और दीव के कार्मिक विभाग में कार्यरत उप सचिव गुरप्रीत सिंह के हस्ताक्षर हैं। जिसमें लिखा है, 'सरकारी अधिकारी का इस्तीफा स्वीकार किए जाने पर प्रभावी होता है। इसलिए आपको निर्देश दिया जाता है कि आप तब तक खुद को मिली जिम्मेदारियों का निर्वहन करना शुरू कर दें जब तक कि आपके इस्तीफे पर कोई फैसला नहीं हो जाता है।'
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चूंकि गोपीनाथ सिलवासा में मौजूद नहीं थे इसलिए अधिकारियों ने उनके सरकारी गेस्टहाउस के कमरे के दरवाजे के बाहर नोटिस को चिपका दिया। आईएएस अधिकारी ने नोटिस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया है। इससे पहले पिछले हफ्ते गृह मंत्रालय ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था। गोपीनाथ का कहना है कि कश्मीर में जो हो रहा है वह स्वीकार्य नहीं है।
इस्तीफा देने के बाद अधिकारी ने दावा किया कि वह सिविल सेवा में इस उम्मीद से शामिल हुए थे कि वह उन लोगों की आवाज बन सकेंगे जिन्हें खामोश कर दिया गया लेकिन यहां, वह खुद की आवाज गंवा बैठे। उन्होंने कहा कि वह अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता वापस चाहते हैं। वह अपनी तरह से जीना चाहते हैं, भले ही वह एक दिन के लिए ही हो। हालांकि उनके इस्तीफे में कही भी कश्मीर मसले का जिक्र नहीं है।
2012 सिविल सेवा परीक्षा में कन्नन ने 59वीं रैंक हासिल की थी। उन्होंने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग की थी। आईएएस बनने से पहले वह एक निजी कंपनी में डिजाइन इंजीनियर थे। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने कहा था, 'कश्मीर पर फैसला लिए लगभग 20 दिन बीत चुके हैं और अब भी वहां के लोगों को इस पर प्रतिक्रिया या जवाब देने की अनुमति नहीं है और यह एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है। व्यक्तिगत रूप से मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता और ऐसे समय में सेवा नहीं कर सकता।'